भेड़ चराने वाले इस 85 साल के बुजुर्ग ने खोद डाले 14 तालाब

नई दिल्ली। कर्नाटक के मांडया में रहने वाले कामेगौड़ा को लोग उनके नाम के बजाए 'मैडमैन' के नाम से जानते हैं। अगर आप बेंगलुरु-महावल्ली-कोल्लेगल रोड से गुजरते हैं तो रास्ते में आपको निश्चित तौर पर कामेगौड़ा उर्फ मैडमैन के बारे में सुनने को मिलेगा। कामेगौड़ा ने अपने हाथों से, बिना किसी सरकारी मदद के एक-दो नहीं बल्कि 14 तालाब बना डाले। 82 साल के कामेगौड़ा ने भेड़-बकरी चराते-चराते अपने हाथों से 14 तालाब खोदकर विरान पड़े पहाड़ी को हरा-भरा कर दिया।

 82 साल के शख्स ने खोद डाले 14 तालाब

82 साल के शख्स ने खोद डाले 14 तालाब

कामेगौड़ा का घर डासनाडोड्डी में है। वो गरीब परिवार से आते हैं। घर का खर्चा चलाने के लिए भेड़-बकरियों को पालते हैं। सुबह 5 बजे ही वो अपने भेड़ों के झुंड को लेकर उन्हें पास के कुंदिनीबेट्टा गांव के आसपास लेकर चले जाते थे। जब तक उनके भेड़ चरते थे तब तक कामेगौड़ा वहां पेड़ लगाते थे। वहां तालाब की खुदाई करते थे। 40 साल में कामेगौड़ा ने कुल 14 तालाब खोद डाले। जबकि 2017 तक उन्होंने सिर्फ छह तालाब ही बनाए थे लेकिन पिछले एक साल में उनके काम में तेजी आई और 2018 में उन्होंने 14 तालाब खोद डाले।

 पहाड़ों की हालात देख थे चिंतिंत

पहाड़ों की हालात देख थे चिंतिंत

कामेगौड़ा वहां के पहाड़ की हालात देख चिंतिंत थे। वो सोचते रहते थे कि आखिर पहाड़ पर हरियाली क्यों नहीं है। उन्होंने जब उन्होंने वजह तलाशना शुरू किया तो पाया कि वहां कोई तालाब नहीं है, जहां बरसात का पानी इकट्ठा हो सके। फिर क्या था, कामेगौड़ा ने तालाब खोदना शुरू किया। तालाब खोदने के लिए औजार खरीदने के लिए उन्हें अपनी कुछ भेड़ें बेचनी पड़ी। उन्होंने 14 तालाब खोदने में करीब 10 से 15 लाख रुपए खर्च कर दिए।

कई पुरस्कारों से किया गया सम्मानित

कई पुरस्कारों से किया गया सम्मानित

कामेगौड़ा को उनके काम के लिए कई सारे इनाम से सम्मानित किया गया। कई बार उन्हें इनाम में पैसे भी मिले, जिसे भी उन्होंने तालाब बनाने में खर्च कर दिया। उन्होंने पहाड़ी पर जानेवालों के लिए एक रास्ता भी बनवाया। उनके बच्चे आज भी झोपड़ी में रहते हैं और जानवर चराते हैं। कामेगौड़ा ने बताया कि वो जब मैं पहाड़ियों पर भेड़ चराने जाते थे तो उन्हें कहीं पर भी पानी नहीं मिलता था और जानवर प्यासे रह जाते थे। इसके बाद ही उन्होंने तालाब खोदने का फैसला किया। पहले उन्होंने लकड़ी से तालाब खोदना शुरू किया। फिर कुध पैसे इकट्ठा कर औजार खरीदा। बिना पढ़े लिखे और बिना किसी तकनीकी कौशल के ही कामेगौड़ा ने तालाब बनाकर पहाड़ों को सुरक्षित किया। उन्होंने हर साल पहाड़ी पर हजारों पेड़ लगाए। इस साल उन्होंने पहाड़ी पर 2,000 से ज्यादा बरगद के पेड़ लगाए हैं।

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