रोजमर्रा की वो एक्टिविटीज जो मन और शरीर को करती हैं मजबूत, एक्सपर्ट्स ने भी दिए सुझाव
मन और शरीर दो अलग-अलग चीज़ें नहीं हैं। दोनों हर समय एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं और लगातार बातचीत करते हैं। दिक्कत यह है कि हम अक्सर इस बातचीत को सुनते ही नहीं। रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हम बिना सोचे-समझे ऑटोपायलट मोड में जीते रहते हैं-काम की डेडलाइन, फोन नोटिफिकेशन और लोगों की उम्मीदों में उलझे रहते हैं। धीरे-धीरे शरीर जो संकेत देता है, हम उन्हें नज़रअंदाज़ करने लगते हैं। नतीजा यह होता है कि थकान, बेचैनी, नींद की कमी, पेट की परेशानी या बिना वजह अस्वस्थ महसूस होना शुरू हो जाता है।

अच्छी बात यह है कि मन और शरीर के बीच तालमेल बनाने के लिए किसी महंगे रिट्रीट या लंबी दिनचर्या की ज़रूरत नहीं होती। यह छोटी-छोटी रोज़ की आदतों से बनता है, जिन्हें आसानी से अपनाया जा सकता है।
सुबह उठने के बाद के कुछ मिनट बहुत अहम होते हैं। अगर आंख खुलते ही फोन देखने के बजाय थोड़ा स्ट्रेच कर लिया जाए, गहरी सांस ली जाए या दो मिनट चुपचाप बैठा जाए, तो शरीर को धीरे-धीरे जागने का मौका मिलता है। इससे दिमाग शांत रहता है और दिन की शुरुआत हल्केपन के साथ होती है।
खाने का तरीका भी मन और शरीर को जोड़ता है। अक्सर हम टीवी या मोबाइल देखते हुए खाना खाते हैं, जिससे शरीर तनाव में रहता है और पाचन सही नहीं होता। अगर खाना ध्यान से, स्वाद और भूख को समझते हुए खाया जाए, तो पेट बेहतर काम करता है और भारीपन या ज्यादा खाने की समस्या कम होती है।
शारीरिक गतिविधि का मतलब रोज़ कड़ी एक्सरसाइज़ करना नहीं है। हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग, योग या थोड़ा हिलना-डुलना भी काफी होता है। ज़रूरी यह है कि इसे रोज़ किया जाए। जब हम शरीर को सज़ा देने की जगह उसका ख्याल रखते हैं, तो मन भी बेहतर महसूस करता है।
तनाव अक्सर हमारी जल्दी प्रतिक्रिया देने की आदत से बढ़ता है। किसी मैसेज या मुश्किल बात का जवाब देने से पहले थोड़ा रुक जाना दिमाग को शांत रहने में मदद करता है और बेवजह की चिंता कम करता है। नींद मन और शरीर को दोबारा जोड़ने का सबसे ज़रूरी समय है। सोने से पहले स्क्रीन कम करना, रोशनी धीमी करना और एक छोटी रूटीन बनाना शरीर को आराम का संकेत देता है। अच्छी नींद से ऊर्जा, मूड और सोचने की क्षमता बेहतर होती है।
स्टेरिस हेल्थकेयर के चेयरमैन श्री जीवन कसारा कहते हैं, "दैनिक स्वास्थ्य साधारण पलों में ही बनता है। जब लोग अपने शरीर की सुनते हैं, तनाव को नियंत्रित करते हैं और सचेत होकर चलते हैं, तो वे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को शुरू होने से पहले ही रोक लेते हैं। मन और शरीर का स्वास्थ्य सबसे अच्छा तब होता है जब उन्हें एक प्रणाली के रूप में माना जाता है, न कि अलग-अलग हिस्सों के रूप में।"
आखिर में बात इतनी सी है-अच्छा स्वास्थ्य किसी बड़े बदलाव से नहीं, बल्कि रोज़ की छोटी समझदारी भरी आदतों से बनता है। यही आदतें समय के साथ हमें मजबूत और संतुलित बनाती हैं।
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