Fact Check: इतिहास में पहली बार सेना भर्ती में पूछी जा रही है जाति? जानें क्या है सच

नई दिल्ली, 19 जुलाई; अग्निवीर योजना के तहत होने वाली भर्ती योजना में जाति प्रमाण पत्र मांगने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है कि भारत के इतिहास में पहली बार सेना भर्ती में जाति पूछी जा रही है। आज आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इस मामले में ट्वीट कर उन्होंने सरकार पर निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। इसी बीच सरकार की ओर इस मामले पर सफाई आई है। उन्होंन इस दावे को फर्जी बता दिया है।

PIB Fact Check Caste Is Being Asked in Army Recruitment for First Time in History?

दरअसल सेना की नई भर्ती योजना अग्निपथ के तहत मांगे गए आवेदनों में आवेदकों से जाति और धर्म प्रमाण पत्र भी उपलब्ध कराने को कहा गया था। इस मामले में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि मोदी सरकार का घटिया चेहरा देश के सामने आ चुका है। क्या नरेंद्र मोदी पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों को सेना में भर्ती होने के काबिल नहीं मानते? भारत के इतिहास में पहली बार सेना भर्ती में जाति पूछी जा रही है। मोदी आपको अग्निवीर बनाना है, या जातिवीर।

तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने तंज कसा, 'जात न पूछो साधु की लेकिन जात पूछो फौजी की'। संघ की बीजेपी सरकार जातिगत जनगणना से दूर भागती है लेकिन देश सेवा के लिए जान देने वाले अग्निवीर भाइयों से जाति पूछती है। ये जाति इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि देश का सबसे बड़ा जातिवादी संगठन आरएसएस बाद में जाति के आधार पर अग्निवीरों की छंटनी करेगा। आरजेडी नेता ने कहा, 'आजादी के बाद 75 वर्षों तक सेना में ठेके पर अग्निपथ व्यवस्था लागू नहीं थी। सेना में भर्ती होने के बाद 75% सैनिकों की छंटनी नहीं होती थी लेकिन संघ की कट्टर जातिवादी सरकार अब जाति/धर्म देखकर 75% सैनिकों की छंटनी करेगी। सेना में जब आरक्षण है ही नहीं, तो जाति प्रमाणपत्र की क्या जरूरत?'

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इसे लेकर पीआईबी फैक्ट चेक टीम ने पड़ताल की। इस दावे को पूरी तरह से फर्जी करार दिया है। पीआईबी का कहना है कि सेना भर्ती के लिए जाति प्रमाण पत्र दिखाने का प्रावधान पहले से ही है। इसमें विशेष रूप से अग्निपथ के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। पीआईबी ने बताया जाति प्रमाणपत्र को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह प्रावधान पहले से की मौजूद था।

वहीं दूसरी ओर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि, भारतीय सेना किसी भी कीमत पर धर्म या जाति के आधार पर भर्ती नहीं करती है। जाति और धर्म से कहीं ऊपर हिंदुस्तान की सेना है। फिर भी ये कॉलम क्यों हैं? इसका उत्तर 2013 में सुप्रीम कोर्ट के पटल पर मिला। एक व्यक्ति ने पीआईएल दाखिल किया था कि जाति और धर्म के कॉलम सेना की भर्ती में क्यों होते हैं। उसी साल एफिडेविट पेश कर भारतीय सेना ने स्पष्ट किया था कि इसमें धर्म और जाति का कोई रोल नहीं है पर यह एक प्रशासनिक और ऑपरेटिव जरूरत है।

संबित ने कहा कि 2013 में मोदी सरकार नहीं थी, तब कांग्रेस के समय सेना की ओर से साफ किया जा चुका है। क्या माननीय सांसद, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस नहीं जानती? फिर भी सेना को अखाड़े में लाना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह राजनीति सेना को बदनाम करने के लिए है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सेना ने कहा है कि अगर युद्ध के समय कोई जवान शहीद होता है तो उसकी अंत्येष्टि की जाएगी, वो कैसे की जाएगी, ये निर्धारण भी पूरी संवेदनशीलता के साथ किया जाता है इसलिए धर्म का कॉलम भर्ती प्रक्रिया में रखा जाता है।

Fact Check

दावा

भारत के इतिहास में पहली बार सेना भर्ती में जाति पूछी जा रही है। मोदी आपको अग्निवीर बनाना है, या जातिवीर।

नतीजा

इसे लेकर पीआईबी फैक्ट चेक टीम ने पड़ताल की। इस दावे को पूरी तरह से फर्जी करार दिया है। पीआईबी का कहना है कि सेना भर्ती के लिए जाति प्रमाण पत्र दिखाने का प्रावधान पहले से ही है।

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