क्या कोरोना की बूस्टर डोज के कारण बढ़ रहा हार्ट डिजीज ? डॉक्टरों से जानिए सच्चाई
क्या COVID-19 के बूस्टर टीकों और भारत में हृदय रोग के बीच कोई संबंध है। जानिए इस फैक्ट चेक में COVID booster vaccines heart dysfunction link Expert opinion fact check
नई दिल्ली, 28 सितंबर : क्या भारत में हृदय रोग और COVID-19 वैक्सीन के तीसरे टीके यानी बूस्टर डोज के बीच कोई संबंध है ? कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट के बारे में लोगों के मन में कई आशंकाएं हैं। इसी बीच विशेषज्ञों ने कोरोना टीकों की बूस्टर खुराक का शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जानकारी दी है। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज शरीर पर क्या असर डालती है।

क्या हार्ट पर साइड इफेक्ट हो रहा
इंसानों के दिल पर कोरोना टीके की बूस्टर खुराक का क्या प्रभाव पड़ रहा है, इस पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। मन में आशंकाओं और सवालों से पटे पड़े सोशल मीडिया पोस्ट्स के बीच विशेषज्ञों की राय जानना सबसे अहम है। क्या सचमुच कोरोना टीकों की बूस्टर खुराक इंसानों के हार्ट पर कोई गलत असर डाल रही है ?

वैक्सीन लगवा चुके लोगों में हार्ट से जुड़ी बीमारियां
फरीदाबाद में एक बड़े अस्पताल के डॉक्टर के अनुसार कोरोना टीकाकरण के बाद रोगियों में हृदय संबंधी समस्याओं के कुछ मामले सामने आए हैं। अमृता अस्पताल में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में प्रोफेसर और एचओडी डॉ विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि भले ही कोरोना काल में टीका लगवा चुके वाले लोगों में हार्ट से जुड़ी बीमारियों की रिपोर्ट हुई है लेकिन हृदय रोग कोरोना टीके से ही हुआ है, इसे साबित करने के लिए कोई निर्णायक सबूत नहीं है।

कोरोना वैक्सीन और हार्ट डिजिज
डॉ विवेक चतुर्वेदी बताते हैं कि कोरोना टीका और हार्ट डिजिज का संबंध बहुत गंभीर सवाल है क्योंकि हम अक्सर दिल के दौरे की खबरें और मरीजों को देखते हैं। उन्होंने कहा, न केवल हार्ट अटैक, कभी-कभी दिल के चारों ओर तरल पदार्थ, कभी-कभी टीकाकरण के बाद दिल की असामान्य धड़कन (Arrhythmias) यानी एरिथमिया के मामले भी सामने आए हैं।

टीके के दुष्प्रभाव पर क्या बोले डॉक्टर
डॉ विवेक ने कहा कि COVID का हृदय पर प्रभाव पड़ सकता है। COVID से संक्रमित होने वाले व्यक्ति को हृदय संबंधी बीमारी भी हो सकती है। हालांकि, इसकी पुष्टि करना बहुत मुश्किल है क्योंकि ऐसी बीमारियां और परेशानी अतीत में भी हो रही थीं। टीके के दुष्प्रभाव पर उन्होंने कहा कि इसके भी प्रमाण बहुत ठोस नहीं हैं।

हालात बिगड़ सकते हैं
कोरोना काल में हृदय रोग के बारे में डॉ विवेक ने कहा, "कोविड कई तरह से हृदय को प्रभावित कर सकता है। सबसे आम समस्या जो पाई गई है वह यह कि जिन लोगों को पहले हृदय रोग हो चुका है, उनके हृदय रोग कोरोना संक्रमण के कारण गंभीर हो सकते हैं। हालात बिगड़ सकते हैं। ऐसे लोगों को दिल का दौरा पड़ सकता है। हार्ट फेल्योर के मामले भी सामने आ सकते हैं। हार्ट बीट नॉर्मल न होना यानी दिल की धड़कन का असामान्य होना एरिथमिया (Arrhythmias) जैसी परेशानी भी सामने आ सकती है।

कोरोना काल में हार्ट की कैसी परेशानियां
उन्होंने कहा, जिन लोगों को हृदय रोग नहीं हुआ है, लेकिन मधुमेह से पीड़ित हैं, रक्तचाप की समस्या है। ऐसे लोगों को दिल का दौरा पड़ सकता है। अमृता अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ विवेक के मुताबिक ऐसे कई मामले सामने आए हैं जो COVID-19 के कारण उपजी हैं। उन्होंने कहा, भले ही कोविड गंभीर होने के बावजूद मरीज को दिल का दौरा न पड़े, लेकिन इसके कारण हृदय की शिथिलता (heart dysfunctions), हृदय की धमनियों में रुकावट और हार्ट बीट तेज होने यानी एरिथमिया (Arrhythmias) जैसी परेशानियां हो सकती है।

हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ा है
महामारी की शुरुआत के बाद से दिल से संबंधित बीमारियों के कारण होने वाली मौतों की संख्या बढ़ने के बारे में पूछे जाने पर डॉ विवेक ने कहा, "हां, यह एक बड़ा विवाद रहा है क्योंकि घर पर बहुत सारी मौतें हो रही थीं। इस समय कोविड-19 संक्रमण अपने चरम पर था। लोग बाहर जाने से डरते थे। बकौल डॉ विवेक, कुछ देशों में डेटा का सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया गया है। इससे पता चला है कि कोविड-19 संक्रमण के कारण निश्चित रूप से हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ा है।

रिकवरी के चरणों का ध्यान
फोर्टिस अस्पताल गुरुग्राम में नॉन-इनवेसिव कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के निदेशक डॉ विनायक अग्रवाल ने बताया, COVID-19 संक्रमण के बाद किसी मरीज के ठीक होने का रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं। जिन लोगों को फेफड़ों की गंभीर बीमारी जैसी कुछ अन्य समस्याओं के साथ आईसीयू में भर्ती कराने की जरूरत पड़ती है, ऐसे लोगों में संक्रमण ठीक होने में रिकवरी के चरणों का ध्यान रखना अहम है।

हर मरीज अपने तरीकों से ठीक होता है
डॉ विनायक अग्रवाल ने बताया, कोविड संक्रमण के बाद मरीज का ठीक होना और रिहैबिलिटेशन का प्रोसेस हर मरीज के लिए अलग-अलग है। कोई ऐसा व्यक्ति जिसे COVID के दौरान फेफड़े या हृदय के साथ-साथ दूसरे ऑर्गन में परेशानी हुई और आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। ऐसे मरीजों को स्पष्ट रूप से अधिक देखभाल की जरूरत होती है। लंबे समय तक इनकी रिहैबिलिटेशन पर नजर रखनी होती है।

डॉक्टर की एडवाइस पर जांच
हल्के लक्षणों वाले कोरोना पीड़ित या Asymptomatic कोरोना केस के कई मामलों में दिल की बीमारी रिपोर्ट की गई है। ऐसे में अगर आपको थकान / कमजोरी का अनुभव हो, आराम के समय या चलने के दौरान सांस फूलना, चलने या चक्कर आने पर सीने में परेशानी होने पर विशेषज्ञ से परामर्श लें। आगे की जांच के लिए ब्लड टेस्ट कराएं। इनमें ट्रोपोनिन लेवल, NT proBNP (बायोमार्कर), ईसीजी, 24 घंटे ईसीजी (Holter), इकोकार्डियोग्राम या कार्डिएक एमआरआई जैसे मेडिकल टेस्ट डॉक्टर की एडवाइस के आधार पर कराए जा सकते हैं। विशेषज्ञों ने रिकवरी के दौर से गुजर रहे कोरोना पीड़ितों को शुरुआत में लगभग छह सप्ताह तक मध्यम से जोरदार ताकत लगने वाले व्यायाम या जिम न करने की सलाह दी।
क्या है अंतिम फैसला

COVID-19 के बूस्टर डोज पर फाइनल जजमेंट
कोरोना वैक्सीन से साइड इफेक्ट पर मंथन के बीच दूसरी बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कई सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा, परेशानी होने पर मरीजों को धीमी गति से चलना चाहिए। उच्च स्तर की शारीरिक क्षमता वाले खेल या शारीरिक फिटनेस की डिमांड वाले ऐसे काम जिनसे दिल पर अधिक बोझ पड़ता हो, 3-6 महीने तक इनसे बचना चाहिए। पूर्ण आराम करना चाहिए। कुछ हफ्तों के बाद भी कोरोना के लक्षणों का अनुभव होता रहे तो लंबे कोविड सिंड्रोम से बचने के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श लें। अंत में बस इतना कि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हृदय रोग और COVID-19 के बूस्टर डोज के बीच अभी तक कोई निश्चित संबंध नहीं देखा गया है।

Fact Check
दावा
क्या COVID-19 के बूस्टर टीकों और भारत में हृदय रोग के बीच कोई संबंध है ?
नतीजा
हृदय रोग और COVID-19 के बूस्टर डोज के बीच अभी तक कोई निश्चित संबंध नहीं देखा गया है।












Click it and Unblock the Notifications