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Tere Naam Re-Release: 23 साल बाद जहरीले आशिकों के मसीहा 'राधे भैया' सिनेमाघरों में क्यों लौटे?

Tere Naam Re-Release: आज है साल 2026 और तारीख 27 फरवरी। इस दिन देश की सबसे बडी मल्टीप्लेक्स चेन PVR और INOX ने साल 2003 में आई फिल्म 'तेरे नाम' को री-रिलीज किया है। जिसे 'कल्ट' का दर्जा मिला है। फिल्म कई मायनों में आयकॉनिक है, जैसे इसके गाने। समीर अंजान के लिखे गीत और हिमेश रेशमिया का म्यूजिक आज भी लोगों के दिल में बसता है। फिल्म के हीरो सलमान खान की हेयरस्टाइल भी आयकॉनिक है। जिस जमाने में ये फिल्म रिलीज हुई थी, उसके कई सालों बाद तक लोगों ने 'तेरे नाम' वाली कटिंग कटवाई थी। फरवरी को प्यार का महीना माना जाता है। लेकिन इस प्यार भरे महीने में 'जहरीले आशिक' की कहानी क्यों दिखाई जा रही है?

Tere Naam Re-Release

ऐसा नहीं है कि 'तेरे नाम' के बाद इस तरह की जुनूनियत और एक तरफा आशिकों से भरी फिल्में नहीं बनी। हाल ही के सालों में हुई 'कबीर सिंह' से लेकर 'रांझणा' के कुंदन तक और 'तेरे इश्क में' के शंकर से 'एक दीवाने की दीवानियत' के विक्रमादित्य भी सिनेमाघरों में दिखाई दिए हैं। जिन्हें दर्शकों ने बड़े चाव से देखा। लेकिन इन सभी में 'तेरे नाम' के राधे भैया जहरीले आशिकों की श्रेणी में सबसे ऊपर हैं। उन्हें आदिपुरुष का दर्जा देना भी कम नहीं होगा। ऐसा क्यों है, इसका भी कारण है। कुछ पॉइंट्स में समझिए।

फिल्म में राधे भैया एक कॉलेज में पढ़ते हैं, मतलब जो करते हैं वो आपको पता ही है। वो एक सिंपल सी लड़की निर्जरा (भूमिका चावला) प्यार में (उनके मुताबिक) पड़ जाते हैं। बाद में उनकी आशिकी उसका पीछा करने की मंशा में बदल जाती है। इतना ही नहीं जो भी निर्जरा को पसंद करता राधे उसका अपहरण कर लेते। वह उसे बांधता और धमकाता भी है। जो रियलिस्टिक दुनिया की कहानी से परे है।

लेकिन राधे भैया की दुनिया तो अलग है, उसमें लड़की उसे माफ़ करती है। इतना ही नहीं वो जहरीले आशिक के तथाकथित अच्छे कामों से इंप्रेस भी हो जाती है और प्यार करने लगती है। ऐसा अगर आज के राधे भैया ऐसा करें तो उनकी जेल में सुताई तो पक्का है। इसमें एक और भी ड्रॉबैक है, जो ये भी बताती है कि अगर किसी लड़के या पुरुष के इरादे साफ सुथरे हों तो उसकी जरिए की गई हिंसा या मारपीट भी जायज है? क्योंकि फिल्म में कई सीन है जहां इसे जस्टीफाई किया गया है।

फिल्म अपने महानतम पड़ाव पर तब पहुंचती है, जब सेकेंड हाफ में राधे के साथ ऐसी घटना हो जाती है कि वो अपना मानसिक संतुलन खो देता है। इसके बाद कहानी दूसरा मोड़ लेती और फिल्म राधे की इस हालत को ऐसे दिखाती है कि दर्शकों को उससे एक अलग प्रकार की सहानुभूति हो जाए। अंत में उसे माफ कर दें, फिल्म राधे के कर्मों को निर्दोष दिखाने की भी कोशिश करती है। कुल मिलाकर 'तेरे नाम' एक ऐसी फिल्म है जो GenZ की भाषा में कहें तो 'रेड फ्लैग' लड़कों को एक तरफा आशिकों की श्रेणी में लाकर खड़ा करती है। जो एक तरीके से सही नहीं है। सिर्फ तेरे नाम ही नहीं, ऊपर जिन फिल्मों के नाम लिखे हैं वो भी कुछ ऐसा ही करती हैं।

फिल्म आज रिलीज हुई है ये दिक्कत नहीं है। समस्या 2003 में ही थी, लेकिन तब रोमांस और जुनून के बीच के जहरीलेपन को समझने की लाइन बहुत पतली थी। जिसे लोग देखकर भी अनदेखा कर देते थे। खैर 'तेरे नाम' को नॉस्टैल्जिया मानने वालों ये नई पीढ़ी के युवाओं के लिए 'रेड फ्लैग्स' का कुंजी हो सकती है। उदाहर के तौर पर बीते दिनों बिहार के बक्सर में एक लड़के ने दुल्हन को मंडप में गोली मार दी। बाद में पता चला वो भी ऐसा ही जुनूनी और जहरीला आशिक था।

बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें तो 2003 में बनी इस फिल्म का बजट 12 करोड़ रुपये था और वर्ल्डवाइड इस फिल्म ने 24.55 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया था। देखना अब ये है कि री-रिलीज में लोग इसे पसंद करते हैं या फिर नकार देते हैं। चलते चलते एक बात ये भी कि कई मौकों में सलमान खान भी ये कह चुके हैं कि तेरे नाम जैसी फिल्मों से किसी को कुछ सीखना नहीं चाहिए।

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