UPSC CSE New Rules: नए नियमों ने सरकारी अफसरों की बढ़ाई टेंशन, परीक्षा देने के लिए छोड़नी होगी नौकरी
UPSC CSE New Rules 2025: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) की शुचिता और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए इस वर्ष कई क्रांतिकारी बदलावों की घोषणा की है। ये नए नियम न केवल परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को सख्त बनाते हैं, बल्कि पहले से सेवाओं में कार्यरत अधिकारियों के लिए दोबारा परीक्षा में बैठने के अवसरों को भी सीमित करते हैं।
केंद्र सरकार और आयोग का मुख्य उद्देश्य 'फर्जीवाड़े' को रोकना और सेवाओं के आवंटन को अधिक न्यायसंगत बनाना है। विशेष रूप से IAS और IFS अधिकारियों के लिए अब दोबारा परीक्षा देना लगभग असंभव होगा, जब तक कि वे अपने पद से इस्तीफा न दे दें। ये बदलाव 2025 की परीक्षा से ही प्रभावी माने जाएंगे, जिसका सीधा असर उन हजारों उम्मीदवारों पर पड़ेगा जो अपनी वर्तमान सर्विस में सुधार (Service Allocation Improvement) की उम्मीद कर रहे थे।

परीक्षा केंद्र पर हाई-टेक सुरक्षा, फेस ऑथेंटिकेशन
भविष्य में किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े या छद्म रूप (Impersonation) को रोकने के लिए UPSC ने अब परीक्षा केंद्रों पर फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया है। अब उम्मीदवारों का प्रवेश केवल एडमिट कार्ड के आधार पर नहीं होगा, बल्कि तकनीक के जरिए उनके चेहरे का मिलान किया जाएगा। यह कदम परीक्षा की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
मार्कशीट और आंसर-की प्रक्रिया में बदलाव
UPSC ने अपनी मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक त्वरित और संक्षिप्त बनाया है:
प्रीलिम्स की मार्कशीट नहीं: अब प्रीलिम्स परीक्षा के बाद उम्मीदवारों को अंक नहीं बताए जाएंगे। आयोग ने मार्कशीट जारी न करने का फैसला लिया है।
त्वरित आंसर-की: प्रीलिम्स परीक्षा संपन्न होने के केवल तीन दिन के भीतर आधिकारिक आंसर-की जारी कर दी जाएगी।
आपत्ति दर्ज करने का समय: उम्मीदवारों के पास सवालों या उत्तरों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए परीक्षा के बाद केवल पांच दिन का समय होगा।
सेवारत अधिकारियों के लिए कड़े प्रतिबंध
इस साल के सबसे बड़े बदलाव उन उम्मीदवारों के लिए हैं जो पहले से किसी सेवा (Service) में तैनात हैं:
IAS और IFS अधिकारियों पर रोक: यदि कोई उम्मीदवार वर्तमान में IAS या IFS पद पर कार्यरत है, तो वह सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेगा। न तो वह प्रीलिम्स दे पाएगा और न ही उसका परिणाम जारी किया जाएगा। दोबारा परीक्षा देने का एकमात्र रास्ता इस्तीफा देना होगा।
IPS के लिए कैडर सुधार बंद: जो अधिकारी IPS में हैं, उन्हें अब IPS सेवा के भीतर कैडर सुधार (Cadre Improvement) या दोबारा आवंटन के लिए परीक्षा देने का मौका नहीं मिलेगा।
बाकी सेवाओं के लिए 'वन टाइम चांस': IPS को छोड़कर अन्य सेवाओं के उम्मीदवारों को सेवा सुधारने के लिए सिर्फ एक मौका दिया जाएगा।
दो साल की समय सीमा
UPSC ने 'सर्विस इम्प्रूवमेंट' के लिए एक सख्त डेडलाइन तय की है:
- सेवा सुधार का यह एकलौता मौका भी केवल अगले दो साल के भीतर ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके बाद परीक्षा देने के लिए इस्तीफा अनिवार्य होगा।
- ये सभी नियम CSE 2025 से ही लागू होंगे। वर्तमान में इंटरव्यू दे रहे उम्मीदवार भी इन बदलावों के दायरे में आ सकते हैं।
ग्रुप-बी सेवाओं और कानूनी जटिलताएं
CSE 2025 या उससे पहले ग्रुप-बी सेवाओं (जैसे DANICS, DANIPS, PONDICS) में चयनित अधिकारियों को भी सुधार का एक ही मौका मिलेगा। हालांकि, CSE 2026 के बाद आने वाले बैच पर यह नियम लागू नहीं होगा। विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि नियमों में सभी सेवाओं के लिए एकरूपता नहीं रखी गई, तो इन प्रावधानों को आने वाले समय में अदालत में चुनौती दी जा सकती है।












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