हर साल महंगी हो रही शिक्षा, स्कूल फीस को लेकर सामने आया चौंकाने वाला सर्वे! 80 फीसदी तक बढ़े शुल्क
School Fee: अगर आप भी हर नए सत्र की शुरुआत में स्कूल की बढ़ती फीस देखकर परेशान हो जाते हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। देशभर के लाखों माता-पिता आज इस चिंता से जूझ रहे हैं कि बच्चों की अच्छी पढ़ाई का सपना अब जेब पर भारी पड़ रहा है। किताबों, यूनिफॉर्म और स्कूल ट्रांसपोर्ट के खर्चों के अलावा अब ट्यूशन फीस में भी हर साल भारी बढ़ोतरी हो रही है।
हाल ही में दिल्ली की संस्था LocalCircles द्वारा किए गए एक बड़े सर्वे में यह सामने आया है कि देश के प्राइवेट स्कूलों ने पिछले कुछ सालों में बेहिसाब फीस बढ़ाई है। इस सर्वे में भाग लेने वाले हजारों अभिभावकों ने खुलकर अपनी राय रखी और बताया कि स्कूल अब शिक्षा से ज्यादा पैसा कमाने का जरिया बनते जा रहे हैं।

फीस बढ़ने से मिडिल क्लास परिवारों पर असर
इस सर्वे में देशभर के 300 से ज्यादा जिलों से 85,000 से अधिक अभिभावकों की राय ली गई। आंकड़ों के अनुसार, कई निजी स्कूल हर साल 10% से 15% तक फीस बढ़ा रहे हैं। पिछले तीन सालों में बहुत से स्कूलों की फीस में 50% से 80% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भारी आर्थिक बोझ बन गई है।
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नई-नई फीस जोड़कर बोझ और बढ़ाया
सिर्फ ट्यूशन फीस ही नहीं, अब स्कूल बिल्डिंग फीस, टेक्नोलॉजी चार्ज, मेंटेनेंस फीस जैसे नामों से भी पैसे वसूल रहे हैं। पहले जो खर्च स्कूल की कुल फीस में शामिल होते थे, अब उन्हें अलग-अलग मदों में जोड़कर अभिभावकों पर डाला जा रहा है।
पढ़ाई में सुधार नहीं, फिर भी फीस बढ़ रही
अभिभावकों का कहना है कि फीस तो हर साल बढ़ रही है, लेकिन पढ़ाई की गुणवत्ता में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आता। स्कूल की सुविधाएं भी जस की तस हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 42% अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चों के स्कूल में फीस 50% से ज्यादा बढ़ी है, जबकि 26% ने बताया कि यह बढ़ोतरी 80% तक पहुंच गई है।
ऑनलाइन पढ़ाई बनी कमाई का जरिया?
कोरोना महामारी के दौरान जब ऑनलाइन क्लासेज जरूरी बन गई थीं, तब अभिभावकों ने उसे मजबूरी में अपनाया। लेकिन अब कई स्कूल इसे भी कमाई का जरिया बना चुके हैं। डिजिटल लर्निंग, ऐप एक्सेस और टेक्नोलॉजी फीस के नाम पर अभिभावकों से अलग से पैसे वसूले जा रहे हैं।
क्या शिक्षा सिर्फ मुनाफे का जरिया बन रही है?
अब सवाल उठता है कि क्या शिक्षा एक सेवा न होकर सिर्फ कारोबार बनती जा रही है? सरकार ने जरूर कुछ नियम बनाए हैं, लेकिन कई राज्यों में बनी फीस नियंत्रण समितियां सिर्फ नाम की हैं। इनका असर जमीन पर दिखना बाकी है।
सरकार से राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग
अभिभावकों का कहना है कि अब वक्त आ गया है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर एक सख्त राष्ट्रीय नीति बनाए। ऐसी नीति जिससे स्कूलों की फीस पर लगाम लग सके और हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और सस्ती शिक्षा मिल सके। शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है, न कि किसी के लिए मुनाफे का सौदा।
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