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NEET PG 2025 में बड़ा बदलाव, दो नहीं एक शिफ्ट में होगी परीक्षा, स्टूडेंट्स की परफोर्मेंस पर होगा क्या असर?

NEET PG 2025: नीट पीजी परीक्षा देने की तैयारी कर रहे लाखों मेडिकल छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। अब यह बहुप्रतीक्षित परीक्षा 15 जून को नहीं बल्कि 3 अगस्त 2025 को आयोजित की जाएगी। यह बदलाव सिर्फ तारीख तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा का पूरा फॉर्मेट बदल गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब परीक्षा दो शिफ्ट के बजाय एक ही शिफ्ट में होगी। इससे पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ने की उम्मीद है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने कोर्ट से और समय मांगा था ताकि पूरे देश में एक साथ परीक्षा आयोजित करने की बेहतर तैयारी की जा सके।

NEET PG 2025

परीक्षा शेड्यूल में आए इस बड़े बदलाव से छात्रों को जहां अतिरिक्त समय का फायदा मिलेगा। वहीं परीक्षा केंद्रों और व्यवस्थाओं को लेकर कुछ नई चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने NBEMS को दी राहत

शुक्रवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने NBEMS की उस अपील को स्वीकार कर लिया, जिसमें परीक्षा एक ही शिफ्ट में कराने के लिए समय मांगा गया था। कोर्ट के आदेश के बाद अब परीक्षा की नई तारीख तय कर दी गई है।

एक शिफ्ट का फैसला क्यों लिया गया?

NBEMS के अनुसार, एक शिफ्ट में परीक्षा कराने से सभी कैंडिडेट्स को एक जैसा प्रश्नपत्र मिलेगा। इससे नॉर्मलाइजेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी और निष्पक्षता बनी रहेगी। दो शिफ्ट में पेपर की कठिनाई अलग हो सकती थी, जिससे कुछ छात्रों को नुकसान हो सकता था।

तैयारी के लिए ज्यादा समय

परीक्षा की तारीख आगे बढ़ने से कैंडिडेट्स को करीब डेढ़ महीने का एक्स्ट्रा समय मिल गया है। इससे उन छात्रों को राहत मिलेगी जो अब तक पूरी तरह तैयार नहीं थे। वे अब अपने कमजोर विषयों पर फोकस कर सकेंगे।

मानसिक दबाव बढ़ने की भी आशंका

जहां कुछ छात्रों को अतिरिक्त समय का फायदा मिलेगा, वहीं कुछ कैंडिडेट्स को लंबे इंतजार से मानसिक तनाव हो सकता है। खासकर वे छात्र जो जून की परीक्षा को ध्यान में रखकर तैयारी कर चुके थे, उन्हें अपने शेड्यूल में बदलाव करना पड़ेगा।

सेंटर और संसाधन जुटाना बड़ी चुनौती

एक ही शिफ्ट में लाखों छात्रों की परीक्षा कराना आसान नहीं होगा। इसके लिए देशभर में करीब 1000 से ज्यादा परीक्षा केंद्रों की जरूरत होगी। अगर तैयारी में कोई कमी रही तो सेंटरों पर भीड़, देरी या तकनीकी दिक्कतें हो सकती हैं।

सिंगल शिफ्ट से किसे होगा फायदा?

1. नॉर्मलाइजेशन से परेशान छात्र

जिन कैंडिडेट्स को नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया से दिक्कत होती थी, उन्हें अब एक ही पेपर मिलने से राहत मिलेगी। अब मेहनत और योग्यता के आधार पर रैंकिंग तय होगी।

2. कमजोर तैयारी वाले छात्र

जिनकी तैयारी अभी अधूरी थी, उन्हें अब अतिरिक्त समय मिल गया है। वे अपने कमजोर टॉपिक्स पर काम कर सकते हैं और बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

3. पहली बार परिक्षा देने वाले छात्र

जो छात्र पहली बार नीट पीजी की परीक्षा दे रहे हैं, उनके लिए यह सिस्टम आसान होगा। तय समय और एक ही पेपर से उन्हें तैयारी में मदद मिलेगी।

4. ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र

अगर NBEMS देशभर के 250 शहरों में पर्याप्त सेंटर बना पाता है, तो ग्रामीण या दूरदराज के छात्रों को यात्रा में आसानी होगी। हालांकि, यह पूरी तरह से व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

नीट पीजी 2025 की परीक्षा का नया शेड्यूल और एक शिफ्ट में कराने का फैसला छात्रों के लिए कई मायनों में अहम है। जहां इससे निष्पक्षता और पारदर्शिता बढ़ेगी, वहीं तैयारी और परीक्षा संचालन से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आएंगी।
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