वो 5 बड़े घोटाले जिन्होंने देश हिलाकर रख दिया था, आज भी होती है चर्चा
नई दिल्ली, 24 अगस्त। आजादी के बाद से जहां भारत ने विकास के क्षेत्र में तमाम उपलब्धियां हासिल की हैं वहीं इस दौरान तमाम घोटाले भी सामने आए हैं जिनके चलते देश को भारी नुकसान भी पहुंचाया है। इन घोटालों में न केवल देश का धन लूटा गया बल्कि देश की कई राजनीतिक हस्तियों और घोटालेबाजों के गठजोड़ के किस्से भी सामने आए। हम ऐसे ही कुछ बड़े घोटालों की चर्चा करने जा रहे हैं।

शारदा चिटफंट घोटाला
पश्चिम बंगाल की चिटफंड कंपनी शारदा ने लोगों को ठगने के लिए खूब सारे लोकलुभावन ऑफर दिए। इसके तहत कंपनी ने लोगों को अलग-अलग स्कीमें जारी कीं। लोगों को लालच दिया गया कि उन्हें अपनी जमा से 25 गुना तक ज्यादा रिटर्न मिलेगा जिसके लालच में आकर लोगों ने कंपनी ने खूब पैसा जमा किया। लेकिन पैसे पर मुनाफा देने की जगह कंपनी ने लोगों को मूल पैसा भी नहीं दिया जिसके बाद इस पर जांच शुरू हुई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शारदा ने अलग-अलग कंपनियों के जरिए 14 लाख निवेशकों से 1200 करोड़ रुपये जुटाए।

कोयला आवंटन घोटाला
कोयला आवंटन घोटाला देश के सबसे बड़े घोटाले में एक माना जाता है। इसमें 2004 से 2009 के बीच 100 कंपनियों को गलत तरीके से कोयला खदानों के आवंटन का आरोप लगाया गया था जिसमें देश को 1.86 लाख करोड़ का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया। इसमें तत्कालीन मनमोहन सरकार पर सार्वजनिक क्षेत्र और निजी कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बोली का सहारा लिए बिना देश की कोयला जमा राशि के गलत आवंटन का आरोप लगाया गया था।

राष्ट्रमंडल घोटाला
2010 में दिल्ली में हुए राष्ट्रमंडल खेलों ने दुनिया में भारत का नाम ऊंचा किया लेकिन अफसोस इस आयोजन पर घोटाले की ऐसा छाया पड़ी कि अब राष्ट्रमंडल खेलों का नाम सुनते ही सभी को घोटाले की याद आती है। यह घोटाला 2011 में सामने आया था और इसमें सुरेश कलमाड़ी को प्रमुख अभियुक्त बनाया गया था। दिल्ली में आयोजित हुए इस आयोजन में जमकर घपला किया गया। अनुमान के मुताबिक इस दौरान देश को 70,000 करोड़ की चपत लगाई गई।

सत्यम घोटाला
सत्यम कम्प्यूटर्स से जुड़े इस घोटाले को देश के सबसे बड़े ऑडिट फ्रॉड में गिना जाता है। दरअसल कंपनी के फाउंडर रामलिंगा राजू ने कंपनी के खातों में हेरा-फेरी करके कंपनी को मुनाफे को खूब बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया था। जब घोटाले की जांच शुरू हुई तो पता चला कि जब कंपनी में 40,000 कर्मचारी ही काम करते थे लेकिन उन्होंने कंपनी ने कर्मचारियों की संख्या 53,000 बताई थी। इन अतिरिक्त 13 हजार कर्मचारियों के नाम से 20 हजार करोड़ रुपये वेतन के नाम पर निकाल रहे थे।

2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला
यह घोटाला पहली बार 2008 में तब सुर्खियों में आया जब केंद्रीय सतर्कता आयोग ने 2 जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में खामियां पाईं और दूरसंचार मंत्रालय के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की थी। 2009 में सीबीआई ने 2 जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच के लिए मामला दर्ज किया था। इस मामले में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा को इस्तीफा देना पड़ा। बाद में राजा, दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव को गिरफ्तार किया गया। 2017 में सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।












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