हेल्थ, वेल्थ, लव, लाइफ..सब कुछ बताती हैं हाथों की रेखाएं...

ह्रदय रेखा- जो मस्तिष्क रेखा के सामान्तर ही उॅगलियों के मूल स्थान के नीचे से तर्जनी उॅगली तक पहुंचती है, उसे ह्रदय रेखा कहते है।

लखनऊ। हस्तरेखायें हाथ में पूरी तरह से स्पष्ट होनी चाहिए। न अधिक चौड़ी, न अधिक मोटी और न ही उनका रंग पीलापन लिये हो इसके साथ ही न तो उनमें टूट-फूट होनी चाहिए, न द्वीप के चिन्ह और न ही किसी प्रकार की अनियमिततायें होनी चाहिए। पीले रंग की रेखायें इस बात का संकेत देती है कि व्यक्ति के उत्तम स्वास्थ्य में कमी है, न व्यक्ति में स्फूर्ति है और न ही निर्णय लेने की शक्ति है।

हेल्थ, वेल्थ, लव, लाइफ..सब कुछ बताती हैं हाथों की रेखाएं...

ऐसे व्यक्ति का लीवर कमजोर होता

पीले रंग की रेखायें व्यक्ति की पित्त प्रकृति की द्योतक होती है। ऐसे व्यक्ति का लीवर कमजोर होता है। यदि रेखायें गहरे रंग की या काली सी हों तो व्यक्ति के गम्भीर एंव एकान्तप्रिय होने की सूचक होती है। ऐसा व्यक्ति आमतौर प्रतिरोधी वृत्ति का, क्षमा की भावना से हीन तथा हठधर्मी होता है। आप लोग हाथ की रेखाओं के बारे में थोड़ा-थोड़ा जरूर जानते होंगे। पर क्या जानते है कि हाथ में कितनी रेखायें होती है और कहॉ-कहॉ होती है।


आइये हम बताते है आपको हाथ में कितनी और कहॉ-2 रेखायें होती है। हाथ में सात रेखायें होती है और सात ही गौण रेखायें यानि कुल 14 रेखायें होती है।

  • जीवन रेखा-जो रेखा शुक्र पर्वत को घेर लेती है, उसे जीवन रेखा कहते है।
  • मस्तिष्क रेखा-जो रेखा हाथ के बाच में एक सिरे से दूसरे सिरे तक फैली रहती है, उसे मस्तिष्क रेखा कहते है।
  • ह्रदय रेखा- जो मस्तिष्क रेखा के सामान्तर ही उॅगलियों के मूल स्थान के नीचे से तर्जनी उॅगली तक पहुंचती है, उसे ह्रदय रेखा कहते है।
  • शुक्र मुद्रिका-जो मूलतः ह्रदय रेखा से उपर सूर्य व शनि पर्वत के क्षेत्र को घेरे हूये होती है, वह शुक्र मुद्रिका कहलाती है।
  • स्वास्थ्य रेखा-जो बुध पर्वत से आरम्भ होकर हाथ में नीचे की ओर जाती है, वह स्वास्थ्य रेखा होती है।
  • सूर्य रेखा-जो मंगल पर्वत क्षेत्र से उपर उठती हुई हाथों के बीचों-बीच सूर्य पर्वत व अनामिका अॅगुली तक पहुॅचती है, उसे सूर्य रेखा कहते है।
  • भाग्य रेखा-जो मणिबन्ध अर्थात कलाई से आरम्भ होकर हथेली के बीचों-बीच होती हुई शनि पर्वत तक जाती है, वह भाग्य रेखा कहलाती है।

हाथ की सात गौड़ रेखायें-

  • मंगल रेखा-जो मंगल पर्वत से आरम्भ होकर जीवन रेखा की ओर जाती है।
  • वासना रेखा-हाथ में जो रेखा स्वास्थ्य रेखा के सामान्तर चले। उसे वासना रेख कहते है।
  • अन्तर्ज्ञान रेखा-जो बुध पर्वत से आरम्भ चन्द्र पर्वत की ओर अर्द्धवृत्ताकार रूप में होती है।
  • विवाह रेखा-जो बुध पर्वत व सबसे छोटी अॅगुली के नीचे आड़ी रेखा के रूप में स्थित होती है, उसे विवाह रेखा कहते है।
  • तीन मणिबन्ध रेखायें-कलाई पर पाई जानी वाली तीन रेखाओं को मणिबन्ध रेखायेंक हते है।
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