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    कलाई पर क्यों बांधा जाता है रक्षा सूत्र, क्या है इसका महत्व?

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    नई दिल्ली। भारतीय धर्म और पुराणों में हर चीज का अर्थ बताया गया है, बेवजह यहां कोई भी चीज नहीं होती है, ऐसी ही एक चीज है 'रक्षा सूत्र' जिसे कि 'कलेवा' या 'मौली' के नाम से जाना जाता है। अक्सर पूजा के बाद पंडित जी तरह-तरह के मंत्रों को पढ़ते हुए लोगों के कलाई पर इसे बांधते हैं, आम तौर पर ये महिलाओं की बाईं कलाई पर और पुरूषों की दाईं कलाई पर बांधा जाता है लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि ये क्यों और किसलिए बांधा जाता है, क्या ये छोटा सा धागा आपकी रक्षा कर सकता है, तो साथियों ये भरोसे की बात है, अक्सर इस धागे को बहुत से विश्वासों के साथ कलाई पर बांधा जाता है, जिसके कारण ये अमूल्य शक्ति का पर्याय बन जाता है। 

    इतिहास

    इतिहास

    माना जाता है कि यज्ञ में जो यज्ञसूत्र बांधा जाता था उसे आगे चलकर रक्षासूत्र कहा जाने लगा। कुछ पौराणिक कथाओं में इसका जिक्र है जिसके अनुसार भगवान विष्णु के वामनावतार ने भी राजा बलि के रक्षासूत्र बांधा था और उसके बाद ही उन्हें पाताल जाने का आदेश दिया था।

    रक्षासूत्र बांधते समय एक मंत्र बोला जाता है

    रक्षासूत्र बांधते समय एक मंत्र बोला जाता है

    आज भी रक्षासूत्र बांधते समय एक मंत्र बोला जाता है उसमें इसी घटना का जिक्र होता है। भारत में सभी पूज्य और आदरणीय लोगों को रक्षासूत्र बांधने की परंपरा रही है। वृक्षों की रक्षा के लिए वृक्षों को रक्षासूत्र और परिवार की रक्षा के लिए मां को रक्षासूत्र बांधने के दृष्टांत भी इतिहास में मिलते हैं।

     मंत्र

    मंत्र

    येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।

    तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

    इस मंत्र का सामान्यत: यह अर्थ लिया जाता है कि दानवों के महाबली राजा बलि जिससे बांधे गए थे, उसी से तुम्हें बांधता हूं। हे रक्षे!(रक्षासूत्र) तुम चलायमान न हो, चलायमान न हो।

    धर्मशास्त्र

    धर्मशास्त्र

    धर्मशास्त्र के विद्वानों के अनुसार इसका अर्थ यह है कि रक्षा सूत्र बांधते समय ब्राह्मण या पुरोहत अपने यजमान को कहता है कि जिस रक्षासूत्र से दानवों के महापराक्रमी राजा बलि धर्म के बंधन में बांधे गए थे अर्थात् धर्म में प्रयुक्त किए गये थे, उसी सूत्र से मैं तुम्हें बांधता हूं, यानी धर्म के लिए प्रतिबद्ध करता हूं। इसके बाद पुरोहित रक्षा सूत्र से कहता है कि हे रक्षे तुम स्थिर रहना, स्थिर रहना। इस प्रकार रक्षा सूत्र का उद्देश्य ब्राह्मणों द्वारा अपने यजमानों को धर्म के लिए प्रेरित एवं प्रयुक्त करना है।

    कुछ खास टिप्स

    कुछ खास टिप्स

    • वाहन, कलम, बही खाते, चाबी के छल्ले, तिजोरी पर पवित्र मौली बांधने से लाभ होता है।
    • कलश, कंडा, अलमारी, चाबी के छल्ले, पूजा घर में मौली बांधने से घर में खुशियां आती हैं।
    • नौकरी पेशा लोग कार्य करने की टेबल एवं दराज में पवित्र मौली रखें या हाथ में मौली बांधेंगे तो लाभ प्राप्ति की संभावना बढ़ती है।

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    English summary
    A red thread known as Mauli or Kalawa is a sacred thread tied on wrist before the beginning of any Hindu holy ceremony. Mauli is used for a number of religious purposes and it signifies the showering of holy blessings.
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