वास्तु टिप्स: वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार लगाएं खिड़की-दरवाजे

नई दिल्ली। घर का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है उसके खिड़की और दरवाजे। जब कोई भी बाहरी व्यक्ति आपके घर आता है तो सबसे पहले वह दरवाजों से होकर ही गुजरता है। खिड़की दरवाजों से न केवल घर की गोपनीयता और निजता बनी रहती है बल्कि उस घर में रहने वालों को इससे सुरक्षा भी मिलती है। भारत के प्राचीन विज्ञान वास्तुशास्त्र में खिड़की- दरवाजों की स्थिति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। खिड़की दरवाजे कितने और किस दिशा में हों, उनका आकार कैसा हो, उनमें ग्लास किस तरह के लगाए जाएं, उनका रंग कैसा हो जैसी अनेक बातों को लेकर निर्देशित किया गया है। वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार लगे खिड़की दरवाजे उस घर में रहने वालों को न केवल मानसिक सुख शांति देते हैं, बल्कि अनेक परेशानियों से भी बचाते हैं।

आइए जानते हैं खिड़की दरवाजों को लेकर क्या कहता है वास्तु शास्त्र...

वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र

  • वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में लगने वाले सभी खिड़की और दरवाजों की संख्या सम होना चाहिए। यानी 2, 4, 6, 8 इस प्रकार। जबकि इनमें अपवाद है संख्या 10, यानी खिड़की दरवाजों की संख्या 10 नहीं होना चाहिए।
  • घर के मुख्य दरवाजे पर कोई भी बाधा नहीं होना चाहिए जैसे पौधे, कोई पेड़, सीढि़यां, खंभा आदि।
  • दरवाजे और खिड़कियां

    दरवाजे और खिड़कियां

    • मुख्य दरवाजे को पवित्र चिन्हों जैसे गणेश, ओम, लक्ष्मी, स्वस्तिक से सजाया जा सकता है।
    • दरवाजे और खिड़कियां एक दूसरे के विपरीत दिशा में लगाना चाहिए ताकि पॉजिटिव और नेगेटिव एनर्जी का चक्र पूरा होता रहे। आधुनिक भाषा में इसे क्रॉस वेंटिलेशन कहा जाता है।
    •  दिशा का ध्यान रखना आवश्यक

      दिशा का ध्यान रखना आवश्यक

      • यदि आपके घर में दो मुख्य दरवाजे हों तो इस स्थिति में दिशाओं का सही तालमेल बनाना जरूरी है। इसके लिए पूर्व के साथ उत्तर और पश्चिम, पश्चिम के साथ उत्तर और पूर्व, यह कॉम्बिनेशन रखना चाहिए। दक्षिण के साथ पश्चिम-पूर्व अवॉइड करना चाहिए।
      • इसी तरह खिड़की को लगाते समय भी दिशा का ध्यान रखना आवश्यक है। उत्तरी दीवार पर यदि खिड़की लगा रहे हैं तो उसका झुकाव उत्तर-पूर्व की ओर अधिक होना चाहिए।
      • यदि आप किसी अपार्टमेंट में रह रहे हैं तो ध्यान रहे दो घरों के मुख्य दरवाजे बाहर की ओर खुलने वाले नहीं होना चाहिए।
      • घर की सभी खिड़कियों का आकार-प्रकार और साइज एक जैसा होना चाहिए। आयताकार आकर सबसे उत्तम माना गया है। फेंसी आकार के अनियमित आकार के खिड़की दरवाजे लगाने से बचना चाहिए।
      • दरवाजे खिड़कियां टूटे हुए नहीं होना चाहिए

        दरवाजे खिड़कियां टूटे हुए नहीं होना चाहिए

        • घरों में ऑटोमेटिक खुलने और बंद होने वाले दरवाजे नहीं लगाना चाहिए। ये स्वास्थ्य संबंधी परेशानी पैदा करते हैं।
        • दरवाजे दीवार के बिलकुल मध्य में नहीं लगाना चाहिए और ना ही दीवार के बिलकुल कॉर्नर में।
        • दरवाजे और खिड़कियों के खुलते-बंद होते समय आवाज नहीं आना चाहिए। यदि ऐसा है तो इन्हें तुरंत ठीक करवा लें। इससे परिवार में झगड़े होते हैं।
        • दरवाजे खिड़कियां टूटे हुए नहीं होना चाहिए।

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