ये व्रत खोल देंगे भाग्य के बंद दरवाजे
जब व्यक्ति के जीवन में दुख आने लगता है तो वह उससे बचने के लिए, उसका निराकरण करने के लिए ज्योतिषियों की सलाह लेता है।
नई दिल्ली। सुख-दुख प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में आते-जाते रहते हैं। कई लोग दुखों से लड़ते-लड़ते हार मान बैठते हैं और निराश हो जाते हैं, लेकिन ध्यान रहे जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं होता, चाहे वह सुख हो या दुख। इसलिए न सुख में अधिक खुश होना चाहिए और न दुख में अधिक दुखी। सुख के बाद दुख और दुख के बाद सुख का आना उसी तरह निश्चित है जैसे रात के बाद दिन और दिन के बाद रात।
जब व्यक्ति के जीवन में दुख आने लगता है तो वह उससे बचने के लिए, उसका निराकरण करने के लिए ज्योतिषियों की सलाह लेता है। ज्योतिषी उसकी कुंडली का अध्ययन करके बताता है कि फलां ग्रह के कारण दुख है या फलां ग्रह परेशानी दे रहा है तो वह उसी के अनुसार पूजा-पाठ आदि बताता है। अपने पाठकों के लिए मैं यहां ग्रहों के कुछ ऐसे साधारण किंतु चमत्कारिक व्रत बता रहा हूं जिनके बारे में सामान्य लोगों को अधिक जानकारी नहीं है। वे इन व्रतों का लाभ लेकर अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं।

सूर्य का व्रत
यदि किसी जातक को स्वयं या उसके परिवार में कोई बहुत रोग ग्रस्त हो, परिवार में कोई न कोई सदस्य हमेशा बीमार चलता रहता हो और बीमारियों पर खर्च हो रहा हो तो सूर्य का व्रत करना चाहिए। सूर्य का व्रत एक वर्ष या 30 रविवार करना चाहिए। व्रत के दिन लाल रंग के कपड़े पहनना चाहिए। ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः, इस मंत्र का 12 या 5 माला जप करें। जप के बाद शुद्ध जल, लाल चंदन, अक्षत, लाल पुष्प और दूर्वा से सूर्य को अर्घ्य दें। एक वक्त भोजन करें। भोजन में गेहूं की रोटी, दलिया, दूध, दही, घी और चीनी खाएं। नमक बिलकुल न खाएं। व्रत के प्रभाव से न सिर्फ रोग दूर होते हैं बल्कि व्यक्ति के जीवन में तरक्की होने लगती है।

चंद्र का व्रत
54 सोमवारों तक चंद्रमा का व्रत करने का विधान है। व्रत के दिन श्वेत कपड़े ही पहनें। ओम श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः मंत्र का 11 या 5 माला जाप करें। भोजन में बिना नमक का दही, दूध, चावल, चीनी और घी से बनी चीजें ही खाएं। भोजन एक समय ही करना है। इस व्रत को करने से व्यापार में लाभ होता है। मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होने लगती है। किसी विशेष कामना की पूर्ति के उद्देश्य से चंद्रमा व्रत किया जाए तो मनोकामना पूरी होती है।

मंगल का व्रत
मंगल का व्रत 45 या 21 मंगलवार तक किया जाता है। व्रत के दिन लाल वस्त्र धारण करें। ओम क्रां क्रीं क्रौं संः भौमाय नमः मंत्र की 7 या 5 माला जाप करें। भोजन में गुड़ से बना हलवा या लड्डू खाएं। नमक नहीं खाना है। इस व्रत को करने से कर्ज से शीघ्र छुटकारा मिलता है। जिन दंपती की संतान नहीं होती है उन्हें यह व्रत करना चाहिए। इससे संतान सुख की प्राप्ति होती है। मंगल जनित रोगों से मुक्ति मिलती है। धन संचय होने लगता है।

बुध का व्रत
45 या 17 बुधवार तक बुध का व्रत किया जाता है। व्रत के दिन हरे रंग के कपड़े पहनें ओम ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः मंत्र की 17 या 5 माला जाप करें। भोजन में नमक रहित मूंग से बनी चीजें खाएं। भोजन से पहले तुलसी के पत्ते चरणामृत या गंगाजल के साथ खाएं। इस व्रत के करने से विद्या और धन लाभ होता है। विद्यार्थियों को परीक्षाओं में शीघ्र सफलता मिलने लगती है। व्यापारियों की उन्नति होती है।

गुरु का व्रत
यह व्रत 3 वर्ष, 1 वर्ष या 16 गुरुवार को करना चाहिए। पीले वस्त्र धारण कर ओम ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः मंत्र की 16 या 5 माला जपें। व्रत के दिन भोजन में चने, बेसन, घी और चीनी से बनी मिठाई लड्डू ही खाएं। यह व्रत विद्यार्थियों के लिए बुद्धि और विद्या प्रदान करने वाला है। धन संचय बढ़ता है। इस व्रत को करने वाला व्यक्ति सम्मानित और पूजनीय होता है। प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है और अनेक संपत्तियों का मालिक बनता है। अविवाहितों को शीघ्र विवाह सुख प्रदान करता है।

शुक्र का व्रत
शुक्र का व्रत 31 या 21 शुक्रवारों तक किया जाता है। व्रत के दिन सफेद कपड़े पहनें ओम द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः मंत्र की 21 या 11 माला जाप करें। भोजन में चावल, चीनी, दूध, दही या घी से बने पदार्थ ही लें। इस व्रत को करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। व्यक्ति को भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्त होती है। वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। प्रेम संबंधों में सफलता मिलती है।

शनि का व्रत
51 या 21 शनिवारों तक शनि का व्रत किया जाता है। व्रत के दिन काले वस्त्र पहनें। ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः मंत्र की 19 या 11 माला जाप करें। जप करते समय एक पात्र में शुद्ध जल, काला तिल, दूध, चीनी और गंगाजल अपने पास रखें। जप के बाद इसे पीपल के वृक्ष की जड़ में पश्चिम मुखी होकर डाल दें। भोजन में काले उड़द के आटे से बनी चीजें खाएं। तेल में तली वस्तु जरूर खाएं। फल में केला खाएं। इस व्रत के प्रभाव से सभी सांसारिक परेशानियां दूर होती हैं। मुकदमों में विजय मिलती है। लौह व्यापार करने वालों को विशेष लाभ होता है।

व्रत की खास बातें
प्रत्येक ग्रह का व्रत उसी के निश्चित वार को ही करना चाहिए।
प्रत्येक ग्रह का व्रत शुक्लपक्ष में ही प्रारंभ करें।
सभी व्रत के दिन प्रातः स्नान आदि करके सूर्य को अर्घ्य अवश्य दें।
यदि कोई गुरु बना रखा है तो व्रत प्रारंभ करने वाले दिन पहले गुरु मंत्र का एक माला जाप करें।
व्रत के दिन केवल एक बार भोजन करना चाहिए।
व्रत के दिन जो चीजें खाएं उन्हें यथाशक्ति दान भी करना चहिए।












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