Surya Grahan 2025: क्या गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक है सूर्य ग्रहण? सच में पैदा होते हैं कटे-फटे बच्चे?
Surya Grahan 2025 effect on Pregnant Women: साल 2025 का आखिरी सूर्य ग्रहण आज रात 10 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर 22 सितंबर सुबह 3 बजकर 29 मिनट तक रहेगा लेकिन भारत में नजर नहीं आएगा इसलिए इसका सूतक काल नहीं लगेगा लेकिन वैदिक धर्म के मुताबिक सूर्य ग्रहण के दौरान राशियों में परिवर्तन होता है, जिसका असर लोगों के जीवन पर पड़ता है इसलिए सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ खास बातों का ख्याल रखना बहुत जरूरी है।
ग्रहण को लेकर गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा भयभीत रहती हैं, कहते हैं कि ग्रहण से गर्भ में पल रहे बच्चे को खतरा होता है। इसी वजह से बड़े बुजुर्ग इस दौरान गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर निकलने से रोकते हैं।

माना जाता है कि अगर प्रेग्नेंट महिलाएं उस दौरान चाकू-कैंची का प्रयोग करें तो होने वाले बच्चे के कान और नाक कट जाते हैं, हालांकि आज तक ऐसा कोई उदाहरण सामने नहीं आया है। चलिए विस्तार से जानते हैं कि सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्रियों को किन बातों का ख्याल रखना जरूरी है और उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं?
गर्भवती महिलाएं Surya Grahan 2025 में क्या करें ?
- सूर्य ग्रहण की अवधि में बाहर न निकलें, दरअसल ग्रहण काल में नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय हो जाती है, जिसका असर सीधे गर्भस्थ शिशु पर पड़ सकता है।
- 'ॐ नमः शिवाय' या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करें। इससे बच्चे का मानसिक स्वास्थ्य सही रहता है।
- भोजन और पानी में तुलसी का पत्ता डालकर रखें, इससे भोजन खराब नहीं होता है। ग्रहणकाल में खाने-पीने की मनाही होती है लेकिन गर्भवती महिलाएं लंबे वक्त तक भूखी नहीं रह सकती हैं इसलिए उन्हें ग्रहणकाल में हल्का भोजन कर लेना चाहिए।
धार्मिक ग्रंथ पढ़ें या भजन सुनें ( Surya Grahan 2025)
- सकारात्मक माहौल बनाए रखने के लिए धार्मिक ग्रंथ पढ़ें या भजन सुनें, खुद को थकाने वाला काम या कैंची और चाकू वाले काम ना करें।
- तेज रोशनी या ग्रहण की छाया को देखने से परहेज करें और ग्रहण खत्म होने के बाद नहा-धोकर साफ कपड़े पहनें।
- ग्रहणकाल में गणेश जी और कान्हा जी का स्मरण करें, इससे मेंटल हेल्थ अच्छी रहती है।
गणेश मंत्र ( Surya Grahan 2025 AND lord Ganesha Mantra)
- ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥
- ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥
- ऊँ गं गणपतये नमो नमः
- ॐ गं गणपतये नमः
- "ॐ वक्रतुंडाय हुम्"
- ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।
- ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।
Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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