Shani Gochar 2025: शनि की बदली चाल, नौकरी-रिश्ते में आ सकता है संकट, बचकर रहें
Shani Gochar 2025: न्याय का ग्रह शनि आज दोपहर 1 बजकर 53 मिनट से उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण में प्रवेश कर गया है। इस नक्षत्र का स्वामी स्वयं शनि है इसलिए यह गोचर उन लोगों के लिए ठीक रहेगा जिन्हें वर्तमान में शनि की साढ़ेसाती चल रही है।
शनि अपने ही नक्षत्र में जाकर इन राशि वालों को शुभ फल प्रदान करने वाला है। हालांकि कुछ राशियों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण रहेगा, विशेषकर करियर में रुकावटें आएंगी, अचानक बड़े आर्थिक कष्ट आ सकते हैं। स्वास्थ्य भी प्रभावित होगा। वक्री शनि 3 अक्टूबर 2025 तक इसी नक्षत्र में गोचर रहने वाला है।

साढ़ेसाती वालों को राहत (Shani Gochar 2025)
शनि के स्व नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद में रहने के कारण साढ़ेसाती वाले लोग थोड़ी राहत में रहेंगे क्योंकि शनि अपने घर में आकर शुभ फल देंगे, प्रसन्न रहेंगे। इस समय कुंभ, मीन और मेष राशि पर साढ़ेसाती चल रही है। सिंह और धनु राशि पर लघु कल्याणी ढैया चल रहा है। अत: इन पांचों राशि के जातकों को परेशानियों से राहत रहेगी। अटके काम कुछ गति पकड़ेंगे, स्वास्थ्य में सुधार आएगा, आर्थिक संकट जो बना हुआ है उसमें कमी आएगी और धन आने के मार्ग खुलने लगेंगे। सबसे बड़ी बात रिश्तों में सुधार आएगा। शनि सबसे ज्यादा व्यक्ति की मानसिक स्थिति को डांवाडोल करता है, अब अपने ही नक्षत्र में आने के कारण यह मानसिक स्थिरता लाएगा और व्यक्ति की अपने परिवार और मित्रों से तालमेल बनाएगा।
अन्य राशियों पर प्रभाव (Shani Gochar 2025)
अन्य राशियों पर शनि मिलाजुला असर दिखाएगा। व्यक्ति की जन्मकुंडली में यदि शुभ स्थानों में शुभ ग्रहों से युक्त है और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में ही है उनके लिए तो यह गोचर ठीक रहेगा किंतु जिनकी कुंडली में शनि क्रूर ग्रहों के साथ बैठा हुआ है उनके लिए यह नक्षत्र गोचर परेशानी लेकर आएगा। धन अत्यधिक खर्च होगा। नौकरी में परेशानी आ सकती है। उच्चाधिकारियों से टकराव और विवादित स्थिति बनेगी। नौकरी बदलने का मन करेगा। व्यापार में हानि हो सकती है। परिवार से रिश्ते खराब होंगे। स्वास्थ्य खराब हो सकता है।
क्या करें इस गोचर में (Shani Gochar 2025)
शनि के उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में गोचर के दौरान सभी राशि के जातकों को नित्य शनिदेव के दर्शन करना चाहिए। प्रत्येक शनिवार को काले कपड़े में सवा सौ ग्राम कोयला और लोहे की कील बांधकर इस पोटली को काले धागे से बांधकर शनिदेव को चढ़ाएं। पीपल के पेड़ के नीचे नागफनी की सात कीलें शनिवार को गाड़ें इससे शनि की पीड़ा दूर होगी। हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, बजरंग बाण, शनि स्तोत्र आदि का पाठ करें।












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