एकमुखी रूद्राक्ष से कभी दूर नहीं जाती है लक्ष्मी
नई दिल्ली। एकमुखी रूद्राक्ष के बारे में कहा जाता है कि यह जहां भी जिसके भी पास होता है, उससे लक्ष्मी कभी दूर नहीं जाती है। लेकिन असली एकमुखी रूद्राक्ष मिलना अत्यंत दुर्लभ है। इसकी अत्यधिक मांग होने और मुंह मांगा पैसा मिलने के कारण आजकल बाजार में नकली एकमुखी रूद्राक्ष बहुतायत में पाए जाते हैं, लेकिन ध्यान रहे एकमुखी रूद्राक्ष बेहद दुर्लभ होता है और करोड़ों में एक पाया जाता है। एकमुखी रूद्राक्ष का आकार ओंकार की तरह होता है। यह कुछ-कुछ अर्धचंद्र के समान दिखाई देता है। इसमें साक्षात शिव बसते हैं क्योंकि कहा जाता है कि भगवान शिव के नेत्र से गिरी अश्रु की पहली बूंद ही एकमुखी रूद्राक्ष बनी। इसे धारण करने से शिव की शक्तियां प्राप्त होती हैं और व्यक्ति के पास किसी भी वस्तु का अभाव नहीं रह जाता है।

एकमुखी रूद्राक्ष के लाभ
- एकमुखी रूद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति शिव के समान ज्ञानी बन जाता है। उसे शिव की समस्त शक्तियां प्राप्त हो जाती है।
- जो व्यक्ति अध्यात्म की राह पर चलना चाहता है, यदि वह एकमुखी रूद्राक्ष धारण करे और उस पर शिव का ध्यान करें तो वह अनंत शक्तियों का स्वामी बन जाता है। उसके संकल्प मात्र से बातें साकार होने लगती हैं।
- एकमुखी रूद्राक्ष के प्रभाव से मनुष्य में अपनी इंद्रियों को वश में करने की क्षमता आ जाती है। वह ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति की ओर अग्रसर होता है।
- जिस मनुष्य के पास एकमुखी रूद्राक्ष होता है उसके पास कभी धन का अभाव नहीं होता। वह अतुलनीय संपदा का स्वामी बनता है।
- राजनीति से जुड़े लोगों को यह देश के उच्च पद पर आसीन करने की ताकत रखता है।
- गुरु की आज्ञा से एकमुखी रूद्राक्ष पर त्राटक किया जाए तो तीसरा नेत्र शीघ्र जागृत हो जाता है। व्यक्ति के सामने भूत, भविष्य और वर्तमान साकार हो उठता है। तीनों काल उसे दिखाई देने लगते हैं।
- एकमुख रूद्राक्ष से बुरी शक्तियां, भूत प्रेत आदि दूर रहते हैं।
- यह रूद्राक्ष अनेक रोगों को पल भर में दूर कर देता है। हाई ब्लड प्रेशर और मानसिक रोगों में चमत्कारिक रूप से असर दिखाता है।
- यह रूद्राक्ष समस्त कार्यों में विजय दिलाता है। शत्रुओं से सर्वत्र रक्षा करता है।

कैसे धारण करें एकमुखी रूद्राक्ष
एकमुखी रूद्राक्ष को धारण करने के लिए सबसे उत्तम दिन महाशिवरात्रि, प्रदोष और सोमवार का दिन होता है। इनमें से किसी भी दिन शुभ मुहूर्त देखकर रूद्राक्ष को गंगाजल और गाय के कच्चे दूध से स्नान करवाएं। स्नान करवाते समय ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। रूद्राक्ष पर चंदन लगाकर बिल्व पत्र, आक का फूल और धतूरा चढ़ाएं। रूद्राक्ष की माला से ऊं नम: शिवाय मंत्र की 21 माला जाप करें और लाल धागे या चांदी की चेन में धारण कर लें। इसके बाद प्रतिदिन स्नान पूजा के बाद पांच माला ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करना है।

क्या सावधानियां रखें
एकमुखी रूद्राक्ष अत्यंत जागृत होता है और इसमें अत्यधिक पॉवर होता है इसलिए गर्भवती स्त्रियों और बच्चों को इसे धारण नहीं करना चाहिए।
इसे केवल वे ही पुरुष धारण करें जो सात्विकता का पालन कर सकते हों।
मांसाहार, शराब का सेवन करने वाले और परस्त्री का गमन करने वाले पुरुष इसे धारण ना करें।












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