11 अक्टूबर 2020 : कुछ खास है अधिकमास में बन रहा रवि पुष्य संयोग

नई दिल्ली। इन दिनों भगवान विष्णु का सबसे प्रिय माह अधिकमास चल रहा है। इस अधिकमास में 11 अक्टूबर को बन रहा है रवि पुष्य नक्षत्र का अत्यंत दुर्लभ शुभ संयोग। अधिकमास में आने वाला पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिदायक होता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा करने से समस्त प्रकार के कार्य सिद्ध किए जा सकते हैं। पुष्य नक्षत्र 11 अक्टूबर को पूरे दिन और मध्य रात्रि के बाद तक रहेगा। इस दिन कुछ विशेष प्रयोग करके आप अपने जीवन की सारी समस्याओं को दूर कर सकते हैं।

रवि पुष्य में सूर्य को ऐसे करें मजबूत

रवि पुष्य में सूर्य को ऐसे करें मजबूत

जन्मकुंडली में सूर्य ग्रह का मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है। सूर्य कमजोर होने से व्यक्ति को पिता का सुख नहीं मिलता, नेत्र आैर मस्तिष्क रोग होते हैं तथा जीवन मान-सम्मान का अभाव रहता है। रवि पुष्य में सूर्य को मजबूत करने के ये उपाय करना चाहिए।

सूर्यदेव की पूजा

सूर्यदेव की पूजा

  • रवि पुष्य नक्षत्र में सूर्यदेव की पूजा से मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा सबकुछ प्राप्त होता है। इस दिन भगवान सूर्य का विधिवत पूजन करें। सूर्योदय के समय जल का अ‌र्घ्य दें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
  • रवि पुष्य नक्षत्र के दिन रामायण के बालकांड का पाठ करने से सूर्य ग्रह मजबूत होता है।
  • रवि पुष्य नक्षत्र के दिन किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह लेकर माणिक रत्न सोने या तांबे की अंगूठी में बनवाकर अनामिका अंगुली में धारण करने से सूर्य शुभ प्रभाव देता है।
  • रवि पुष्य नक्षत्र में तांबे की अंगूठी की विधिवत पूजा करके अनामिका अंगुली में धारण करें।
  • जिन लोगों की कुंडली में सूर्य नीच का हो उन्हें रवि पुष्य नक्षत्र में किसी ब्राह्मण को गेहूं का दान करना चाहिए।
अधिकमास के रवि पुष्य में ये करें

अधिकमास के रवि पुष्य में ये करें

  • धन लाभ के लिए रवि पुष्य नक्षत्र में भगवान गणेश आैर मां लक्ष्मी का अभिषेक केसर मिले दूध से करें।
  • रवि पुष्य नक्षत्र प्रारंभ होने के बाद 11 लघु नारियल की पूजा करके उन्हें लाल कपड़े में बांधकर धन स्थान में रखने से धन कोष में वृद्धि होती है।
  • रवि पुष्य नक्षत्र मे शंखपुष्पी की जड़ को प्राप्त करके चांदी की डिब्बी में डालकर उसे घर में स्थित तिजोरी में रखने से कभी धन की कमी नहीं होती।
  • रवि पुष्य योग में मोती शंख में जल भरकर लक्ष्मी माता की मूर्ति या चित्र के साथ रखने से लक्ष्मी प्रसन्न होती है।
  • रवि पुष्य संयोग में मोती शंख को घर में स्थापित कर प्रतिदिन श्री महालक्ष्मै नम: मंत्र को 11 बार बोलकर 1.1 चावल का दाना शंख में भरते रहें। इस प्रकार 11 दिन तक करें। यह प्रयोग करने से आÆथक तंगी समाप्त हो जाती है।
  • रवि पुष्य नक्षत्र के दिन चांदी या सोने के आभूषण खरीदना अत्यंत शुभ होता है। इससे सुख.समृद्धि में उत्तरोत्तर बढ़ोतरी होती है।


नक्षत्र समय

  • पुष्य नक्षत्र प्रारंभ 10 अक्टूबर मध्य रात्रि बाद 1.16 बजे से
  • पुष्य नक्षत्र समाप्त 11 अक्टूबर मध्य रात्रि बाद 1.17 बजे तक

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