Rahu Ketu Gochar: राहु-केतु की बदली राशि, अब देश दुनिया में होंगे बड़े बदलाव, तैयार रहें
Rahu Ketu Gochar: बृहस्पति के राशि बदलने के बाद अब दो बड़े ग्रह राहु और केतु ने भी अपनी राशि बदल दी है। राहु 18 साल के बाद पुन: कुंभ राशि में प्रवेश कर गए हैं तो वहीं केतु भी 18 साल बाद सिंह राशि में गोचर कर गए हैं।
राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है लेकिन जन्मकुंडली पर इनका बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है। राहु और केतु प्रत्येक राशि में 18 महीने रहते हैं। इस प्रकार 12 राशियों का एक चक्र पूरा करने में इन दोनों ग्रहों को 18 साल का समय लग जाता है।

आज राहु सायं 5 बजकर 21 मिनट पर कुंभ राशि और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण में प्रवेश किए हैं, जबकि केतु इसी समय सिंह राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में गोचर प्रारंभ किए हैं। ये दोनों ग्रह 5 दिसंबर 2026 तक इन्हीं राशियों में रहेंगे।
राहु शनि की राशि में प्रवेश करके और उग्र हो जाएगा
राहु और केतु के राशि परिवर्तन से देश दुनिया में बड़े बदलाव होंगे। राहु अपने मित्र शनि की राशि में प्रवेश करके और उग्र हो जाएगा और यह लोगों की, राजनेताओं की मति भ्रम करेगा। जल्दबाजी में बड़े और निर्णायक फैसले लिए जाएंगे। प्रकृति, पर्यावरण में बड़े बदलाव होंगे।
प्राकृतिक आपदाएं, भूकंप, भूगर्भीय हलचल होंगी। वहीं केतु का सूर्य की राशि में गोचर होना लोगों के मान-सम्मान और पद प्रतिष्ठा में हानि करवाएगा। हालांकि इस दौरान लोगों की आध्यात्मिक उन्नति होगी, जो लोग आध्यात्मिकता से दूर हो गए हैं वे पुन: इस ओर लौटेंगे।
राहु के कुंभ में प्रवेश का फल
राहु अपने मित्र ग्रह शनि की राशि कुंभ में प्रवेश कर रहा है। राहु का सबसे ज्यादा प्रभाव मनुष्य के मस्तिष्क और उसकी निर्णय क्षमता पर होता है। राहु मनुष्यों के निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करके भ्रमित करके कुछ अनचाहे निर्णय भी करवा सकता है। जल्दबाजी में अनेक निर्णय गलत हो जाते हैं।
राहु का तकनीकी क्षेत्रों पर भी असर होता है। तकनीक के कारण लोग तनाव में आएंगे। तकनीक ही रिश्तों के टूटने के लिए जिम्मेदार होगी। इस दौरान लोगों को वाहन मशीनरी का प्रयोग करते समय सतर्क रहना होगा।
केतु के सिंह में प्रवेश का फल
केतु सूर्य की राशि सिंह में प्रवेश करने वाला है। सिंह उच्च पद और प्रतिष्ठा दिलाने वाला ग्रह है और केतु आध्यामिकता और संयम देने वाला ग्रह है। लेकिन सूर्य के साथ मिलकर यह अहंकार भी देता है। लोगों को अपने धन का, अपनी प्रतिष्ठा का, अपनी सफलता का अहंकार होगा और वे अहंकार के कारण दूसरों को कुछ नहीं समझेंगे।












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