जानिये नींव पूजन की सम्पूर्ण विधि और महत्व को
जब नींव की खुदाई पूर्ण हो जाये तथा जमीन समतल होकर चुनाई के लिए तैयार हो जाये तो नींव-पूजन एंव शिलान्यास करना चाहिए।
लखनऊ। शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात व्यक्ति नौकरी की तलाश में रहता है, नौकरी मिलने के बाद धन का संग्रह करके मनुष्य सर्वप्रथम अपने लिए एक आशियाना बनाना चाहता है।
भवन के निर्माण में बहुत सी चीजों का ध्यान रखा जाता है किन्तु सबसे पहले आईये जानते है कि नींव पूजन कैसे करनी चाहिए...

- जब नींव की खुदाई पूर्ण हो जाये तथा जमीन समतल होकर चुनाई के लिए तैयार हो जाये तो नींव-पूजन एंव शिलान्यास करना चाहिए।
- सर्वप्रथम शिलान्यास के स्थान पर चौक पूर कर गौरी, गणेश, कलश, नवग्रह आदि को पूजा हेतु स्थापित करें। तत्पश्चात भूखण्ड-स्वामी स्नानादि करके शुद्ध व सफेद वस्त्र धारण करके पूर्व की ओर मुख करके कुशा से अपने उपर एंव पूजन सामग्री पर जल छिड़क कर पवित्र करें।
- फिर स्वास्ति वाचन एंव गणपति भगवान का स्मरण करके गृहारम्भ का संकल्प करें। उसके बाद गणेश, गौरी, कलश, नवग्रह वास्तु एंव अन्य पीठ देवताओं का षोःडशोपचार पूजन करके पुष्पांजलि से प्रार्थना करें।
- तत्पश्चात चार पान के पत्तो में एक वास्तु चिन्ह रूप में थोड़ा चावल, दसरे पान पर स्वर्ण या चॉदी का नाग, तीसरे पान पर कछुआ तथा चौथे पान पर पंचरत्न रखकर क्रम से वास्तोष्पति कच्छप अथवा कछुआ वाराह का आवाहन प्रतिष्ठा एंव पूजन आदि करके तॉबे के लोटे में डाल दें।

- लोटे में लाया दूध, दूब भी डाल दें। फिर स्तुति करने के पश्चात पॉच शिलायें अथवा इॅटें पानी से धोकर सामने अलग-अलग रखकर पंचामृत से स्नान कराकर उस पर स्वास्तिक बना लें एंव कुंकुम, चन्दन आदि लगाकर वस्त्र एंव कलावे से ढक दें एंव नन्दा, भद्रा, जया रिक्ता तथा पूर्णा के नाम से अवाहन व पूजन करके शिलाओं के उपर अक्षत छिड़क कर पॉचों शिलाओं में क्रमशः ब्रहा, विष्णु, महेश का अवाहन कर ऊॅ ब्रम्हणे नमः, ऊॅ विष्णवे नमः, ऊॅ ईश्वराय नमः, ऊॅ सदाशिवाय नमः इन मन्त्रों का उच्चारण करते हुये षोःडशोपचार पूजन एंव जल से अभिषेक करें।
- उसके पश्चात अक्षत लेकर भूमि का आवाहन एंव पूजन करें। एक खैर की खॅूटीं के सामने पूजन करके बीचोंबीच प्लाट में गाड़ दें। खॅूटी के उपर तॉबे के उस लोटे को ढक्कन सहित उठाकर रख दें। कलश के उपर दीपक भी जलता रहे। चूना, सीमेंट आदि से उसे ढककर उसी के ऊपर एंव चारों ओर पॉचों ईटों या शिलाओं की चुनाई कर दें। आवश्कतानुसार इॅटें या शिलायें लेकर जुड़ाई करके ऊपर सीमेन्ट लगाकर चौकोर चबूतरा बनाकर ऊपर से स्वास्तिक बना दें।

- तत्पश्चात स्वास्तिक पर विश्वकर्मा जी का पूजन करके अक्षत-फूल लेकर प्रार्थना करें। अन्त में आरती करके, देव-विसर्जन एंव तिलक लगाकर आशीर्वाद ग्रहण करें। फिर ब्राहम्ण को भोजन कराकर यथाशक्ति वस्त्र व दक्षिण देकर विदा करें। नींव पूजन के दिन कम से कम पॉच ब्रहाम्णों को भोजन अवश्य करायें।












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