Karva Chauth 2017: ये खास श्रृंगार महिलाओं को बनाए रखेंगे सदा सुहागन
भारतीय साहित्य में सोलह श्रृंगार (षोडश श्रृंगार) की प्राचीन परंपरा रही हैं। आदिकाल से ही स्त्री और पुरुष दोनों श्रृंगार करते आए हैं।
भारतीय संस्कृति में वैवाहिक स्त्रियों के लिए 16 श्रृंगार बहुत अहम माने जाते थे किन्तु आज फैशन के दौर में 16 में से 5 श्रृंगार भी कोई अपना ले तो बड़ी बात है। फैशन के इस दौर में 16 श्रंगारों का रूप बदल चुका है।

वर्तमान समय में प्राचीन परंपराओं को कम ही माना जाता है और यदि कोई मान्यता देता भी है तो उसे अपनी सहूलियत के हिसाब से बदल देता है। ऑफिस या अन्य जगहों पर कार्यरत महिलाओं को 16 श्रृंगारों के नाम तक भी नहीं मालूम होंगे। यह बड़ा ही चिन्ता का विषय है।
पति के स्वास्थ्य व आयु वृद्धि की कामना के लिए रखा जाने वाला करवाचैथ व्रत हर सुहागन स्त्री के लिए खास होता है। इस व्रत में महिलाएं सज-धज कर पूजन करती है। इसलिए 16 श्रृंगारों के बारें में चर्चा करना आवश्यक है।
भारतीय साहित्य में सोलह श्रृंगार (षोडश श्रंगार) की प्राचीन परंपरा रही हैं। आदिकाल से ही स्त्री और पुरुष दोनों श्रृंगार करते आए हैं और इस कला का यहाँ इतना व्यापक प्रचार था कि प्रसाधक और प्रसाधिकाओं का एक अलग वर्ग ही बन गया था। शास्त्रों में कुछ इस प्रकार से 16 श्रंगारों के बारे में बतलाया गया है-
अंगशुची, मंजन, वसन, माँग, महावर, केश।
तिलक भाल, तिल चिबुक में, भूषण मेंहदी वेश।।
मिस्सी काजल अरगजा, वीरी और सुगंध।
अर्थात् अंगों में उबटन लगाना, स्नान करना, स्वच्छ वस्त्र धारण करना, माँग भरना, महावर लगाना, बाल सँवारना, तिलक लगाना, ठोढी पर तिल बनाना, आभूषण धारण करना, मेंहदी रचाना, दाँतों में मिस्सी, आँखों में काजल लगाना, सुगांधित द्रव्यों का प्रयोग, पान खाना, माला पहनना, नीला कमल धारण करना।
कहीं-कहीं पर 16 श्रृंगारों के नाम इस प्रकार भी बताये गये हैं।
1- सिंदूर। 2- चूड़ियाँ। 3- बिछुए। 4- पाजेब। 5- नेलपेंट। 6- बाजूबंद। 7- लिपस्टिक। 8- आँखों में अंजन। 9- कमर में तगड़ी। 10- नाक में नथनी। 11- कानों में झुमके। 12- बालों में चूड़ा मणि। 13- गले में नौलखा हार। 14- हाथों की अंगुलियों में अंगुठियाँ। 15- मस्तक की शोभा बढ़ाता माँग टीका। 16- बालों के गुच्छों में चम्पा के फूलों की माला।
करवाचैथ वाले दिन क्या करें महिलाएं जो बनी रहें सदा-सुहागन-
करवाचौथ में प्रत्येक सुहागिन स्त्री अपनी यथा शक्ति के अनुसार श्रृंगार करके चन्द्र देव का अघ्र्य देकर पूजन करती है और फिर अपने पति के हाथों से जल पीकर अपना व्रत खोलती है। आईए अब बात करते है कि कौन से ऐसे 7 श्रृंगार करवाचौथ वाले दिन महिलाएं करें जिससे वो हमेशा सुहागन बनी रहें।
1- यह व्रत 12 से 16 वर्ष तक लगातार रखा जाता है। यदि उसके बाद संभव न हो तो उद्यापन करके व्रत छोड़ सकती है।
2- सुहागन महिलाएं व्रत के एक दिन पहले सिर धोकर स्नान करने के बाद हाथों में मेंहदी और पैरों में माहुर लगाती है।
3- चतुर्थी को सुबह 4 बजे महिलाएं सूर्योदय से पूर्व भोजन करती है, इसमें दूध, फल, मिठाईयां आदि व्यंजन शामिल होते है। सूर्योदय से पूर्व किया भोजन सरगही या सरगी कहलाता है।
4- व्रत करने के बाद सोलह श्रृंगार कर चन्द्रोदय होने पर चलनी से चन्द्रमा को अध्र्य देती है। फिर का पति चेहरा देखने की रस्म होती है, इसके बाद पति अपनी पत्नी को जल पिलाकर व्रत खुलवाता है।
5- सोलह श्रृंगारों मे ये सात श्रंगार महिलाएं अवश्य करें-
1- अंगों मे उबटन लगायें। 2- मांग भरना। 3- महावर लगायें। 4- आंखों में अजंन लगायें। 5- मांग टीका पहने। 6- बालों के गुच्छों में चम्पा की माला पहने। 7- पान खाएं और नीलकमल की माला पहनें। जो स्त्रियां करवाचैथ वाले दिन ये 7 श्रृंगार करके चन्द्र देव की विधिवत पूजा करेंगे वो हमेशा सुहागन बनी रहेंगी।












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