Inspirational Story: ईश्वर करते हैं संकट में स्वयं मदद

नई दिल्ली। ईश्वर पर विश्वास और श्रद्धा भारतीय जनमानस के जीवन का एक हिस्सा है। हमारे यहां धर्म को सिद्धांत या जीवन मंत्र की तरह नहीं, बल्कि सांसों के समान स्वयं में समाहित माना जाता है। हम भारतीय धर्म को जीते हैं, पर कई बार ऐसा भी होता है कि जीवन के किसी मुश्किल समय में मन कमजोर पड़ जाता है और ईश्वर पर हमारा विश्वास डगमगाने लगता है।

Inspirational Story: ईश्वर करते हैं संकट में स्वयं मदद

हमें लगता है कि हम तो ईश्वर को अपना रक्षक मान कर चल रहे हैं, सर्वस्व अर्पण कर रहे हैं, किंतु कठिन समय पर वह हमें भूल गया है। वास्तव में ऐसा नहीं है। हम सब ईश्वर की संंतानें हैं और वे हमसे उतना ही प्रेम करते हैं, जितना हम अपने बच्चों से करते हैं। वे हमारी उसी तरह हर कदम पर रक्षा करते हैं, जैसे हम अपने बच्चों को हर संकट से बचाकर चलते हैं।

आज एक ऐसे ही प्रसंग का आनंद लेते हैं-

एक बार की बात है। समुद्र किनारे एक केकड़ा रहता था। उसे लहरों में तैरना और रेत पर अपने पैरों के निशान बनाकर देखते जाना बहुत पसंद था। वह लहरों को अपना मित्र मानता था और समुद्र की लहरें भी उसे बहुत चाहती थीं। दोनों साथ में जी भर कर खेला करते थे। एक दिन ऐसे ही केकड़ा अपनी धुन में रेत पर पैरों के निशान बनाता जा रहा था और पलटकर देखता जाता था। वह यह खेल घंटों खेला करता था, पर उस दिन बात बिगड़ गई। अचानक ही एक बड़ी - सी लहर आई और उसके पैरों के निशान बहाती हुई ले गई। केकड़ा बहुत दुखी हुआ और लहर से लड़ने लगा। उसने लहर को बुरा- भला कहते हुए कहा- ओ री लहर! मैं तो तुझे अपना दोस्त, अपना हितैषी मानता था, पर आज तूने मेरा दिल तोड़ दिया। मैं कितने जतन से पैरों के निशान बना रहा था और तूने मेरा सब मजा खराब कर दिया। तू मेरी दोस्त नहीं है। इस पर लहर बोली- ओ रे केकड़े! जानता है, आज मछुआरे केकड़े पकड़ने निकले हैं। वे पैरों के निशान का पीछा करते- करते कितने ही केकड़े पकड़ते जा रहे हैं। अगर मैं तेरे पैरों के निशान ना मिटाती, तो अब तक वो तुझे भी पकड़ लेते। मैंने केवल तेरी रक्षा के लिए तेरा खेल बिगाड़ा। मैं तेरी सच्ची हितैषी हूं रे! केकड़े को अब समझ आया कि असल में लहर ने उसका खेल नहीं बिगाड़ा, बल्कि उसकी जान बचाई है। उसने लहर से क्षमा मांगी और वे वापस से दोस्त बन गए।

ईश्वर बुरे वक्त में हमारी रक्षा के लिए उद्यत होते हैं

दोस्तों, यही घटना हमारे जीवन में घटती है, तो हम मान लेते हैं कि भगवान हमसे नाराज हैं या दैव प्रतिकूल हो गए हैं। जबकि सच्चाई यह होती है कि ईश्वर बुरे वक्त में हमारी रक्षा के लिए उद्यत होते हैं। हम अपने अज्ञान में इसे भगवान की नाराजगी मान लेते हैं, जबकि यह थोड़ी- सी कठोरता हमारे भले के लिए ही होती है। इसीलिए जब भी जीवन में बुरा वक्त आए, तो घबराएं नहीं। ईश्वर पर विश्वास बनाए रखें। यह मानकर चलें कि आज का बुरा वक्त कल की सुनहरी कहानी लिखने के लिए आया है क्योंकि ईश्वर सदैव हमारे भले की ही सोचते हैं।

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