ऐसी माला से करेंगे मंत्र जप तो पाएंगे सिद्धि
काम्य जप यानी किसी कामना या मन की इच्छा की पूर्ति के लिए अलग-अलग पदार्थों की माला का उपयोग किया जाता है।
नई दिल्ली। हमारी सनातन संस्कृति के पूजा विधान में माला का बड़ा महत्व बताया गया है। बिना माला के मंत्र जप संभव नहीं है। हम अक्सर साधु-संन्यासियों के गले और हाथ में भी मालाएं बंधी हुई देखते हैं। यह माला रूद्राक्ष, तुलसी, चंदन या रत्नों की हो सकती है।
काम्य जप यानी किसी कामना या मन की इच्छा की पूर्ति के लिए अलग-अलग पदार्थों की माला का उपयोग किया जाता है। कई लोग लाखों मंत्र जप कर लेते हैं लेकिन उन्हें उनकी मनचाही वस्तु का पूरा भाग नहीं मिल पाता और फिर वे मंत्रों की प्रामाणिकता को दोष देते हैं कि हमने इतनी विधि-विधान से पूजा की लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। इसका सबसे बड़ा कारण उचित माला से मंत्र जप का अभाव।
मुंडमाला तंत्र में प्रत्येक प्रकार की पूजा के साथ उसके लिए एक माला निश्चित की गई है। यह माला रूद्राक्ष, शंख, कमल गट्टे, जियापोता, मोती, स्फटिक, मूंगा, मणि, रत्न, स्वर्ण, चांदी, कुशमूल, गुंजा आदि अनेकों प्रकार की होती है।
आइये सबसे पहले जानते हैं किस उद्देश्य के लिए किस प्रकार की माला का उपयोग करना चाहिए-

अश्रु की बूंदों से बना है
रूद्राक्ष की माला: तंत्र शास्त्रों में रूद्राक्ष की माला को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है। रूद्राक्ष स्वयं रूद्र के नेत्रों से गिरे अश्रु की बूंदों से बना है, इसलिए किसी भी उद्देश्य या कामना की पूर्ति के लिए रूद्राक्ष की माला से जप किया जा सकता है। इससे किया हुआ जप कभी निष्फल नहीं होता। रूद्राक्ष की माला को गले, हाथों में ब्रेसलेट के रूप में या किसी भी अन्य रूप में धारण करने से व्यक्ति में उर्जा, साहस, बल में वृद्धि होती है। शत्रु परास्त होते हैं और व्यक्ति को शिवकृपा प्राप्त होती है।
स्फटिक की माला: भौतिक वस्तुओं की प्राप्ति, आकर्षण, सौंदर्य, भोग प्राप्ति के उद्देश्य से मंत्र जप कर रहे हैं तो स्फटिक की माला का उपयोग करना चाहिए। लक्ष्मी मंत्रों का जाप करने में भी स्फटिक की माला प्रयोग में लाई जाना चाहिए। स्फटिक की माला पहनने से व्यक्ति के आकर्षण प्रभाव में वृद्धि होने लगती है और वह शीघ्र ही सभी का प्रिय बन जाता है।

तुलसी की माला का उपयोग
- तुलसी की माला: वैष्णव परंपरा में तुलसी की माला का बड़ा महत्व है। वैष्ण पंथ का अनुसरण करने वाले व्यक्ति मंत्र जप में तुलसी की माला का उपयोग करते हैं। तुलसी भगवान विष्णु की प्रिय है इसलिए इसकी माला से विष्णु, कृष्ण मंत्र का जप शीघ्र फलदायी होता है। तुलसी की माला धारण करने से व्यक्ति सात्विक बनता है। उसके भीतर की अनैतिक प्रवृत्तियों का नाश होता है और वह अध्यात्म में उच्च शिखर छू सकता है।
- चंदन की माला: चंदन की माला दो तरह की होती है। श्वेत चंदन और रक्त चंदन। दोनों ही प्रकार की माला से मंत्र जप किया जा सकता है, लेकिन जिन लोगों को मंगल ग्रह से जनित पीड़ा हो रही हो उन्हें लाल चंदन की माला से मंत्र जप करना चाहिए। भौतिक वस्तुओं की प्राप्ति और मोक्ष के लिए भी रक्त चंदन की माला का उपयोग किया जाता है। चंदन की माला धारण करने से व्यक्ति का मंगल ग्रह मजबूत होता है और उसकी तरक्की होने लगती है।

धन, वैभव, ऐश्वर्य, भोग-विलास
- कमल गट्टे की माला: लक्ष्मी को प्रिय है कमल गट्टे की माला। धन, वैभव, ऐश्वर्य, भोग-विलास की प्राप्ति के लिए कमल गट्टे की माला से मंत्र जप किया जाना चाहिए। शत्रुओं के नाश के लिए भी कमल गट्टे की माला का उपयोग किया जाता है। तंत्र शास्त्रों के अनुसार कमल गट्टे की माला को धारण नहीं करना चाहिए। मंत्र जप के बाद इसे पूजा स्थान में ही रखें। या घर में श्रीयंत्र हो तो उस पर लगाकर रखें।
- जियापोता की माला: जो दंपती संतान पाने के इच्छुक हैं, उन्हें जियापोता की माला से मंत्र जप करना चाहिए। चांदी के तार गूंथी हुई जियापोता की माला समस्त सुखों को प्रदान करने वाली है। इससे अनचाही इच्छा की पूर्ति की जा सकती है।

काले रंग का छोटे आकार का बीज
- गूंजा की माला: गूंजा एक वृक्ष का फल होता है, जो लाल और काले रंग का छोटे आकार का बीज होता है। इसकी माला से व्यक्ति में जबर्दस्त आकर्षण, सम्मोहन पैदा होता है। जो व्यक्ति अपने आकर्षण प्रभाव में वृद्धि करना चाहता है या किसी का वशीकरण करना चाहता है उसे गूंजा माला से जप करना चाहिए।
- गजदंत माला: भगवान श्री गणेश की कृपा पाने के लिए गजदंत की माला से गणेश मंत्रों का जाप किया जाता है। इससे व्यक्ति में ज्ञान की वृद्धि होती है। उसकी बौद्धिक क्षमता बढ़ती है और वह सिद्धि-बुद्धि प्राप्त करने में सफल होता है। गणेश शाबर मंत्रों का जाप गजदंत की माला से किया जाए तो सात रात्रि में सिद्ध हो जाता है।
- इनके अलावा भी अलग-अलग कार्यों की सिद्धि के लिए विभिन्न मणियों, रत्नों, बीजों, स्वर्ण, रजत, शंख आदि की माला से जप करने का विधान है।
- जिस माला से आप जप करें, उसे जप संख्या पूरी होने तक धारण न करें। यदि आपने जप प्रारंभ करने से पहले मंत्र संख्या सवा लाख करने का संकल्प लिया है तो जब तक सवा लाख मंत्र पूरे न हो जाएं उस माला को धारण न करें।
- माला देव स्थान, पूजा घर में किसी साफ वस्त्र में लपेटकर रखें। जप से पहले प्रत्येक दिन उस पर धूप-दीप, पुष्प से पूजन करें।
- अर्थ साधना के लिए 27 मणियों की माला, मारण कार्यों में 15 मणियों की, काम सिद्धि के लिए 54 मणियों का तथा समस्त कामनाओं की पूर्ति के लिए 108 मणियों की माला का प्रयोग करें।
- शांति, पुष्टि, स्तंभन, वशीकरण आदि कार्यों के लिए अंगूठे के अग्रभाग से माला चलाएं। आकर्षण के लिए अंगूठे व अनामिका के सहयोग से माला फेरें। विद्वेषण में अंगूठे व तर्जनी तथा मारण कार्यों में अंगूठे व कनिष्ठिका अंगुली से जप करें।

इन बातों का रखें ध्यान
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