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Astro Tips: 'नागकेसर' से पाइए इन रोगों में लाभ

By Pt. Anuj K Shukla
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लखनऊ। 'नागकेसर' हिमालय के पूर्वी भाग, पूर्वी बंगाल, आसाम, वर्मा, दक्षिण भारत आदि में इसके पेड़ अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। 'नागकेसर' के सूखे फूल औषधि, मसाले और रंग बनाने के काम में आते हैं। इनके रंग से प्रायः रेशम रँगा जाता है। श्रीलंका में बीजों से गाढा, पीला तेल निकालते हैं, जो दीपक जलाने और दवाईयों के काम में आता है। इसकी लकड़ी से अनेक प्रकार के सामान बनते हैं। लकड़ी ऐसी अच्छी होती है कि केवल हाथ से रँगने से ही उसमें वारनिश की सी चमक आ जाती है। आयुर्वेद में नागकेसर कसेली, गरम, रुखी, हलकी तथा ज्वर, खुजली, दुर्गंध, कोढ, विष, प्यास, मतली और पसीने को दूर करनेवाली मानी जाती है। खूनी बवासीर में भी वैद्य लोग इसे देते हैं। इसे 'नागचंपा' भी कहते हैं।

'नागकेसर' से पाइए इन रोगों में लाभ

'नागकेसर' से पाइए इन रोगों में लाभ

  • कार्य में सफलता पाने के लिए-रविपुष्य योग में या किसी भी शुभ मुहूर्त में नाग केशर, चमेली के फूल, कूट, तगर, कुमकुम, गाय का घी इन सभी चीजों में मिलकार रख लें। फिर जब किसी विशेष कार्य से कहीं जाना हो तो इस तिलक को लगा लें। ऐसा करने से कार्य में अवश्य सफलता मिलती है।
  • हिचकी में लाभ-नागकेसर में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो हिचकी की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं।
  • आप सबसे पहले चार ग्राम पिली नागकेसर को दस ग्राम मक्खन और मिश्री के साथ मिलाकर दिन में दो बार सुबह और शाम को सेवन करें इससे आपको हिचकी आनी बंद हो जाएंगी।
  • आप सबसे पहले एक कप में गन्ने का रस लें। अब इस रस में एक चम्मच की मात्रा में नागकेसर के फूलों का चूर्ण मिलाकर सेवन करें इससे आपको हिचकियाँ आनी बंद हो जाएंगी।
  • गर्भपात में लाभ- जिन महिलाओं को गर्भपात की समस्या है। वह नागकेसर के थोड़े से चूर्ण को मिश्री में मिलाकर दूध के साथ पीने से गर्भपात की संभावना को दूर किया जा सकता है। दूसरा उपाय पहले नागकेसर के फूल, वंशलोचन, मिश्री को एक समान मात्रा में लेकर चूर्ण तैयार कर लें।
  • अब आप इस चूर्ण में से एक चम्मच की मात्रा में चूर्ण लेकर दिन में दो बार सुबह-शाम इसका सेवन करें इससे आपको बहुत फायदा होगा।

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मासिक धर्म में फायदेमंद

मासिक धर्म में फायदेमंद

जिन महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान परेशानी होती है। वह स्त्रियां ये उपाय करें ?

  • आप सबसे पहले नागकेसर, सफेद चंदन, पठानी लोध्र, अशोक वृक्ष की छाल को एक समान मात्रा में लें। अब इसमें से एक चम्मच की मात्रा में चूर्ण लेकर उसे एक एक चम्मच की मात्रा के पानी के साथ सेवन करें इससे आपकी मासिक धर्म के समय होने वाली समस्याओं को दूर किया जा सकता है।
  • नागकेसर के फूलों का चूर्ण और मिश्री को समान मात्रा में लेकर अच्छी तरह से मिला लें। अब इस चूर्ण की एक चम्मच की मात्रा को पानी के साथ सुबह-शाम लेने से मासिक धर्म आने से पहले होने वाली समस्याओं को दूर किया जा सकता है।
चोट में लाभकारी
  • नागकेसर में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल, एंटी-सेप्टिक और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो घाव में पकने से रोककर उसमें होने वाले संक्रमण को दूर करते हैं इसके लिए आप नागकेसर का तेल लें और उसे अपने शरीर के पीड़ा वाले या प्रभावित भाग पर लगायें इससे आपको बहुत आराम होगा और घाव भी जल्दी भर जाएगा।
  • पेट रोग में फायदेमंद- नागकेसर में एंटी-बैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो गैस्ट्रिक की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं इसके लिए आप नागकेसर की जड़ और छाल को समान मात्रा में लेकर काढ़ा तैयार कर लें और इस काढ़े का दिन में दो या तीन बार सेवन करने से आपको आमाशय की जलन या गैस्ट्रिक की समस्या को दूर किया जा सकता है।

नाक रोग में फायदेमंद

नाक रोग में फायदेमंद

  • आप सबसे पहले नागकेसर की कुछ पत्तियां लेकर लेप तैयार कर लें। लेप तैयार होने के बाद आप इसे अपने सिर पर लगायें इससे आपकी जुकाम की समस्या बिलकुल ठीक हो जाएगी।
  • आप सबसे पहले सिंघाड़े और नागकेसर के फूलों को समान भागों में पीसकर चूर्ण तैयार कर लें। अब इस चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में दिन में दो या तीन बार लें इससे आपकी नाक से खून आने की समस्या ठीक हो जाएगी।
  • गठिया रोग में असरकारी

    • आप सबसे पहले नागकेसर का तेल लें और उसे अपने शरीर के जोड़ों के उस भाग पर लगाएं जिस भाग के जोड़ों में दर्द हो रहा है इसके अतिरिक्त अगर आप चाहें तो आप इस तेल से अपने जोड़ों पर मालिश भी कर सकते हैं इससे भी आपको बहुत लाभ होगा।
    • आप नागकेसर के बीजों का तेल लेकर उसकी अपने जोड़ों पर मालिश करें इससे जोड़ों में दर्द होने की समस्या के साथ-साथ गठिया रोग को भी कम किया जा सकता है।

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English summary
Nagkesar is a slow growing tree which grows up to 1500 meters which is known for its heaviness and hardness of its timber.
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