Guru Purnima: बृहस्पति से शुभ फल प्राप्त करने का दिन भी है गुरु पूर्णिमा
नई दिल्ली। नौ ग्रहों में सूर्य के बाद सबसे महत्वपूर्ण स्थान बृहस्पति का आता है। बृहस्पति मनुष्य के जीवन में सुसंस्कारों का विकास करते हैं। समस्त शुभ कार्य बृहस्पति की साक्षी में किए जाते हैं, क्योंकि ये देवताओं के गुरु हैं। किसी व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्ग पर चलाने के लिए बृहस्पति का शुभ होना आवश्यक है। इसीलिए नवग्रहों में बृहस्पति को सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है। जन्मकुंडली में बृहस्पति का शुभ स्थिति में होना अत्यंत आवश्यक है। बृहस्पति की स्थिति यदि कुंडली में खराब है तो जातक का जीवन असंतुलित सा रहता है। जीवन में उसका कोई उद्देश्य नहीं होता और वह यूं ही बिना मार्गदर्शन के यहां-वहां भटकता रहता है। बृहस्पति के कमजोर होने पर व्यक्ति के नैतिक मूल्य और संस्कार दूषित होने लगते हैं। यानी उसका आचरण खराब हो जाता है। वाणी में कटुता और बात-बात पर क्रोधित होने की प्रवृत्ति आ जाती है। जिन लोगों की जन्म कुंडली में बृहस्पति शुभ प्रभाव देने वाला होता है वे व्यक्ति विद्वान और ज्ञानी होते हैं। वे दूसरों का सम्मान करना जानते हैं। उनकी वाणी में मधुरता रहती है और अपने अच्छे व्यवहार के दम पर हर किसी को अपने प्रति आकर्षित कर सकते हैं।

बृहस्पति को प्रसन्न् करने के उपाय
बृहस्पति को प्रसन्न् करने के लिए वैदिक ज्योतिष में कई उपाय बताए गए हैं। गुरुवार का दिन बृहस्पति का दिन होता है इसलिए कई लोग इस दिन व्रत-उपवास और उपाय भी करते हैं, लेकिन जो सबसे उत्तम दिन है वह है गुरु पूर्णिमा का दिन। 16 जुलाई 2019 को आ रही आषाढ़ पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा के दिन बृहस्पति को प्रसन्न् करने, अपने अनुकूल बनाने के उपाय करेंगे तो निश्चित रूप से उनकी कृपा आपको प्राप्त होगी।

बृहस्पति की शुभता के लिए क्या करें...
- गुरुवार के दिन व्रत रखें। इस दिन नमक का सेवन न करें।
- गुरुवार के दिन दत्तात्रेय मंदिर में चने की दाल भेंट करें।
- गुरुवार के दिन गाय को पके हुए केले खिलाएं।
- इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनें।
- घर के पिछले हिस्से में केले का पेड़ लगाएं और रोज प्रात: उसमें जल डालें।
- बृहस्पति के मन्त्रों का जाप करें।
- विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से बृहस्पति प्रसन्न् होते हैं।
- घर के बुजुर्गों का सम्मान करें।
- किसी बगीचे में फलदार वृक्ष लगाएं।
- स्वर्ण का कोई आभूषण धारण करने से बृहस्पति को प्रसन्न् किया जा सकता है।
- गुरु पूर्णिमा से प्रारंभ करके लगातार 41 दिन तक सूर्य को हल्दी मिला जल अर्पित करें। जीवन में तरक्की होने लगेगी।
- गुरु पूर्णिमा के दिन एक स्वर्ण का चौकोर टुकड़ा खरीदकर लाएं और हल्दी से पूजन करके अपने पास हमेशा रखें। लक्ष्मी खिंची चली आएगी।
- गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान करके पीले वस्त्र धारण करके बरगद की जड़ तोड़ लाएं। इसे गंगाजल से धोकर हल्दी से पूजन करके पीले कपड़े में बांधकर हमेश्ाा अपने पास रखें। इसे चांदी के ताबीज में भरकर बांधने से बृहस्पति के शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं। आर्थिक संकट दूर होता है।
- एक पीले कपड़े में सिंदूर से अष्टदल कमल बनाएं। इसकी पूजा केसर और पीले पुष्पों से करें। इस पर बृहस्पति के मंत्र ॐ क्लीं बृहस्पतये नम: की एक माला जाप करें। इससे शीघ्र विवाह का मार्ग खुलता है।













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