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Kundali Bhagya: सप्तम भाव के ग्रहों से जाने भावी पत्नी का व्यवहार

Written By: पं. गजेंद्र शर्मा
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    नई दिल्ली। विवाह के बाद अक्सर पति की शिकायत रहती है कि पत्नी उसकी बात नहीं सुनती, परिवार को साथ लेकर नहीं चलती, विवाह के पहले उसका व्यवहार अलग था और अब अलग हो गया है... ऐसी तमाम बातें होती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है। इसका कारण कुंडली देखकर पता लगाया जा सकता है। कुंडली देखकर भावी पत्नी के स्वभाव के बारे में काफी कुछ जानकारी हासिल की जा सकती है। जन्म कुंडली में सप्तम भाव जीवनसाथी का भाव होता है। इससे होने वाले पति या पत्नी के स्वभाव के बारे में पता लगता है। इस भाव में उपस्थित ग्रहों के अनुसार स्वभाव तय होता है। किसी स्त्री के बारे में जानकारी हासिल करना हो तो इस भाव के ग्रहों का अध्ययन करना चाहिए। आइये देखते हैं स्त्री की कुंडली के सप्तम भाव में कौन से ग्रह के होने का क्या प्रभाव पड़ता है।

    सूर्य-चंद्रमा

    सूर्य-चंद्रमा

    • सूर्य : स्त्री की कुंडली के सप्तम भाव में यदि सूर्य हो तो वह दुष्ट स्वभाव की होती है। उसका स्वर कर्कश होता है और हमेशा लड़ने के लिए तैयार रहती है। इस स्वभाव के कारण स्त्री पति के प्रेम से वंचित रह जाती है।
    • चंद्रमा: सप्तम भाव में चंद्रमा हो तो स्त्री का स्वभाव मधुर होता है। उसमें लाज-शर्म होती है। यदि सप्तम भाव का चंद्रमा वृषभ राशि में हो तो स्त्री को वस्त्र, आभूषण पहनने का शौक होता है और वह रूपवान होती है।
    मंगल

    मंगल

    सप्तम का मंगल स्त्री को सौभाग्यहीन बनाता है। ऐसी स्त्री बुरे लोगों की संगत में रहती है और बुरे कर्म करती है। सप्तम स्थान में कर्क या सिंह राशि हो तथा मंगल के साथ शनि भी हो तो स्त्री के कई पुरुषों के साथ संबंध होते हैं। हालांकि इसके पास धन प्रचुर मात्रा में होता है।

    बुध

    बुध

    स्त्री की कुंडली में सप्तम स्थान में बुध हो तो उसके पास बड़ी मात्रा में आभूषण होते हैं। बोलचाल की भाषा मधुर होती है। मिलनसार होती है और पति की प्यारी होती है। इस स्थान में बुध यदि उच्च राशि का हो तो स्त्री लेखिका, धनी और अनेक प्रकार के ऐश्वर्य भोगने वाली होती है।

    गुरु-शुक्र

    गुरु-शुक्र

    • गुरु: बृहस्पति के कारण स्त्री पतिव्रता, धनवान, गुणवान और सुखी होती है। सप्तम स्थान में गुरु हो और चंद्रमा कर्क राशि में हो तो नारी सौंदर्य से भरपूर होती है। पुरुष इनके आकर्षण में बंधा रहता है।
    • शुक्र: सप्तम स्थान में शुक्र हो तो स्त्री को श्रेष्ठ गुणों वाला सुंदर, धनवान और कामकला में निपुण पति मिलता है। ऐसी स्त्री भी स्वयं सुंदरता की मिसाल होती है। इसके बाल लंबे, गौर वर्ण और नेत्र तीखे होते हैं।
    शनि, राहु-केतु

    शनि, राहु-केतु

    • शनि: सप्तम स्थान का शनि स्त्री की कुंडली में हो तो उसका पति रोगी, दरिद्र, व्यसनी, निर्बल होता है। यदि शनि तुला राशि में हो तो वह उच्च का होता है। उच्च का शनि पति धनवान, गुणवान, शीलवान होता है।
    • राहु या केतु: कुंडली के सप्तम भाव में राहु या केतु हो तो ऐसी स्त्री अपने कुल पर दोष लगाने वाली होती है। सदा दुखी रहती है तथा पति के सुख से वंचित होती है। ऐसी स्त्री का स्वभाव कड़ा होता है। किसी से उसकी ठीक से नहीं बनती।

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    English summary
    For this, the astrologer has to study the 7th House of the horoscope. Let's discuss what marriage may bring to the various natives born under the 12 Zodiac Signs.

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