वैशाख स्नान 8 अप्रैल से 7 मई तक, सुख-ऐश्वर्य और मोक्ष प्रदान करेंगे भगवान श्रीहरि

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में प्रत्येक व्रत, त्योहार और पर्व का शास्त्रीय और वैज्ञानिक कारण होता है। अनेक पर्व नदियों से जुड़े रहते हैं, क्योंकि नदियों को पवित्र और देवी का दर्जा प्राप्त है। इन पवित्र नदियों में किसी विशेष पर्वादि में स्नान करने का बड़ा महत्व होता है। ऐसा ही वर्ष का एक अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है वैशाख माह। वैशाख के पूरे माह में पवित्र नदियों में स्नान करके दान-पुण्य और भगवान विष्णु का सतत नाम स्मरण मोक्षदायक माना गया है। वैशाख स्नान चैत्र पूर्णिमा हनुमान जयंती से लेकर वैशाख पूर्णिमा बुद्ध पूर्णिमा तक किया जाता है। इस वर्ष वैशाख स्नान 8 अप्रैल 2020 से 7 मई 2020 तक किया जाएगा। वैशाख मास को माधव मास भी कहा जाता है, क्योंकि इस पूरे माह भगवान श्रीकृष्ण का नाम स्मरण, पूजन, आदि किया जाता है।

अपने घरों में ही गंगाजल डालकर स्नान करें

अपने घरों में ही गंगाजल डालकर स्नान करें

वर्तमान में कोरोना वायरस के कारण देशभर में चल रहे लॉकडाउन के कारण इस बार नदियों में स्नान नहीं कर पाएंगे इसलिए अपने घरों में ही गंगा, यमुना, नर्मदा आदि पवित्र नदियों का जल डालकर स्नान करें। इस संकट के समय में गरीबों और सड़कों पर जीवन बसर करने वालों के लिए किसी सामाजिक संस्था या प्रशासन के माध्यम से भोजन का इंतजाम करवाएं, बड़ा पुण्य मिलेगा।

वैशाख स्नान का महत्व

पुराण कथा के अनुसार महीरथ नामक राजा ने केवल वैशाख स्नान करके ही वैकुंठधाम प्राप्त किया था। इसमें व्रती को प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या कुएं पर जाकर स्नान करना चाहिए। यदि आसपास नदी उपलब्ध ना हो तो घर में ही गंगा आदि पवित्र नदियों का जल डालकर स्नान करना चाहिए। स्नान करते समय भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए तथा वैशाख माह के माहात्म्य की कथा प्रतिदिन सुनना चाहिए। पूरे माह व्रती एक समय ही भोजन करें। सायंकाल श्री हरि का स्मरण करते हुए तुलसी के समीप प्रतिदिन दीपक प्रज्जवलित करें।

वैशाख माह में क्या करें

वैशाख माह में क्या करें

  • वैशाख माह में दान-पुण्य और पितरोें के निमित्त तर्पण करने का बड़ा महत्व बताया गया है।
  • इस माह में प्यासे लोगों के लिए अपने पितरों के नाम पर प्याऊ लगवाएं। पशु-पक्षियों के लिए जल का प्रबंध करें।
  • इस माह में मौसमी फल जरूरतमंदों को अवश्य दान करें।
  • पशुओं के लिए चारा, श्वानों के लिए रोटी, बिस्कीट, पंछियों के लिए दाना-पानी का इंतजाम करें।
  • इस पूरे माह भगवान विष्णु के नाम स्मरण का सबसे ज्यादा महत्व है, इसलिए विष्णु सहस्रनाम का पाठ नित्य करें।
  • मां लक्ष्मी को लाल कमल, लाल गुलाब का पुष्प प्रतिदिन अर्पित करके श्री सूक्त का नियमित पाठ करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है।
  • प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य देने से आपके तेज, आकर्षण प्रभाव में वृद्धि होगी, रोगों से मुक्ति मिलेगी।
  • वैशाख माह भीषण गर्मी का माह होता है, इसलिए इस माह उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर के अलावा देश के अनेक शिव मंदिरों में विशेष गलंतिका बांधी जाती है।
  • गलंतिका मिट्टी के विशेष घड़े होते हैं जो जलाधारी के ऊपर बांधे जाते हैं जिनमें से लगातार जल धारा शिवजी के ऊपर प्रवाहित होती रहती है।
  • यदि पूरे माह व्रत नहीं कर सकते तो, इस माह की दोनों एकादशियों का व्रत अवश्य करें।
वैशाख माह में क्या ना करें

वैशाख माह में क्या ना करें

  • इस माह में तेल का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। तली हुई चीजों का सेवन कम करें।
  • इस पूरे माह सूर्योदय से पूर्व जागना चाहिए। देर तक नहीं सोना चाहिए।
  • यदि आप वैशाख माह का व्रत कर रहे हैं तो संयमित और मर्यादित जीवन जीना चाहिए। ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना आवश्यक है।
  • वैशाख माह में केवल एक बार भोजन करना चाहिए, वह भी सूर्यास्त से पहले। सूर्यास्त होने के बाद भोजन कतई ना करें।
  • वैशाख माह के प्रमुख व्रत-त्योहार
  • 8 अप्रैल: वैशाख पूर्णिमा, हनुमान जयंती
  • 11 अप्रैल: संकट चतुर्थी व्रत
  • 18 अप्रैल: वरूथिनी एकादशी, खरबूजा का फलाहार
  • 20 अप्रैल: सोम प्रदोष व्रत
  • 22 अप्रैल: पितृकार्य अमावस्या
  • 23 अप्रैल: दान-पुण्य की अमावस्या
  • 25 अप्रैल: परशुराम जयंती
  • 27 अप्रैल: विनायक चतुर्थी
  • 28 अप्रैल: आद्य शंकराचार्य जयंती
  • 30 अप्रैल: गंगा जन्मोत्सव, गंगा सप्तमी, गुरु पुष्य
  • 3 मई: मोहिनी एकादशी
  • 5 मई: भौम प्रदोष व्रत
  • 6 मई: नृसिंह जयंती
  • 7 मई: बुद्ध जयंती, पूर्णिमा व्रत

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