Chandra Grahan 2025 Photos: रक्तिम रंग में नहाया चांद! मुंबई से हैदराबाद तक कहां-कहां दिखा ‘ब्लड मून’?
Chandra Grahan 2025 Photos: 7 सितंबर 2025 की रात आसमान में एक खगोलीय दृश्य देखने को मिला, जब पूर्ण चंद्र ग्रहण ने चांद को लाल रंग में रंग दिया। इस 'ब्लड मून' का दीदार करने के लिए मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, और पूरे भारत में लोग उत्साहित नजर आए। ग्रहण रात 9:58 बजे शुरू हुआ और 1:26 बजे तक चला, जिसमें 82 मिनट तक चांद रक्तिम लाल रंग में चमका।
कोलकाता में सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के पीछे लाल चांद और दिल्ली में अशोक स्तंभ के साथ इसका नजारा देखते ही बनता था। आइए, इस खगोलीय ड्रामे को समझते हैं...

Blood Moon Photos: 'ब्लड मून' का तमाशा: क्या हुआ?
7 सितंबर 2025 को रात 9:58 बजे से शुरू हुआ पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में साफ दिखाई दिया। ग्रहण की चरम अवस्था रात 11 बजे शुरू हुई, जब चांद पूरी तरह पृथ्वी की छाया (umbra) में डूब गया। इस दौरान चांद लाल-नारंगी रंग में चमक उठा, जिसे 'ब्लड मून' कहते हैं। ये नजारा 12:22 बजे तक रहा और कुल 82 मिनट तक चांद रक्तिम रंग में नहाया रहा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक सुमित श्रीवास्तव ने बताया, 'चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी टेलीस्कोप की जरूरत नहीं। ये नंगी आंखों से देखा जाने वाला खूबसूरत खगोलीय नजारा है।'
भारत के अलावा, एशिया, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, और अफ्रीका में भी लाखों लोगों ने इस 'ब्लड मून' का दीदार किया। चांद इस बार उपभू (Perigee) के करीब था, यानी पृथ्वी से सिर्फ 2.7 दिन दूर, जिससे ये सुपरमून की तरह थोड़ा बड़ा और चमकीला दिखा।

Moon Look Red: क्यों लाल दिखता है चांद?
'ब्लड मून' का जादू पृथ्वी के वायुमंडल का कमाल है। जब चांद पृथ्वी की छाया में डूबता है, तो सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से होकर चांद तक पहुंचती हैं। इस दौरान नीले और बैंगनी रंग बिखर जाते हैं, जबकि लाल और नारंगी रंग चांद तक पहुंचते हैं। पृथ्वी के वायुमंडल में धूल या बादल जितने ज्यादा हों, चांद उतना ही गहरा लाल दिखता है। यही वजह है कि ग्रहण के दौरान चांद खून जैसा लाल हो जाता है।

Blood Moon In India: भारत में कहां-कहां 'ब्लड मून'?
भारत में चंद्र ग्रहण की शुरुआत हो चुकी है। कुछ ही पलों में लाल रंग की लालिमा से चांद पूरी तरह ढक जाएगा। इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, और दिल्ली में लोग आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। कोलकाता में बिड़ला औद्योगिक एवं प्रौद्योगिकी संग्रहालय में लोग दूरबीनों से ग्रहण देखने उमड़े। दिल्ली में अशोक स्तंभ के साथ चंद्र ग्रहण की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छा गईं। हैदराबाद के हुसैन सागर झील और मुंबई के मरीन ड्राइव पर लोग देर रात इस नजारे का लुत्फ उठाते नजर आ रहे हैं।

चंद्र ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ का महत्व
भारत में चंद्र ग्रहण को सिर्फ खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अवसर भी माना जाता है। मान्यता है कि ग्रहण के दौरान मंत्र जाप से दोगुना फल मिलता है। ज्योतिषाचार्य पं. रमेश शर्मा ने बताया, 'ग्रहण के समय हनुमान चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र, या शिव तांडव स्तोत्र का जप करना शुभ होता है।' हालांकि, सूतक काल (ग्रहण से 9 घंटे पहले) में मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं।

चंद्र ग्रहण के प्रकार-
चंद्र ग्रहण तीन तरह के होते हैं:-
- पूर्ण चंद्र ग्रहण: चांद पूरी तरह पृथ्वी की छाया (umbra) में डूब जाता है, जैसे 7 सितंबर का ग्रहण।
- आंशिक चंद्र ग्रहण: चांद का कुछ हिस्सा ही छाया में आता है।
- उपछाया ग्रहण: चांद पृथ्वी की हल्की छाया (penumbra) से गुजरता है, जिससे वो थोड़ा धुंधला दिखता है।
आगामी चंद्र ग्रहण
- 3 मार्च 2026: पूर्ण चंद्र ग्रहण, जो पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत, और अमेरिका में दिखेगा।
- 28 अगस्त 2026: आंशिक चंद्र ग्रहण, जो पूर्वी प्रशांत, अमेरिका, यूरोप, और अफ्रीका में दिखाई देगा।

7 सितंबर 2025 का पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, और दिल्ली समेत पूरे देश में एक यादगार खगोलीय नजारा बन गया। सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा और अशोक स्तंभ के साथ चंद्र ग्रहण की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छा गईं।
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