शपथ ग्रहण के मुहूर्त से जानिए कैसे होंगे पीएम मोदी के आने वाले 5 साल

लखनऊ। नियति नेता को चुनता है, नेता नियति को नहीं, सारे विपक्षी एक तरफ और 'मोदी एक तरफ' फिर भी मोदी के नेतृत्व में भाजपा को प्रचंड बहुमत हासिल हुआ है। मोदी के आने से भारत के लोकसभा चुनाव आम नहीं खास हो गए क्योंकि जनता अब सांसद नहीं बल्कि सीधे प्रधानमंत्री को चुन रही हैं। मोदी ने अपनी व्यापक तैयारियों से भारत के लोकसभा चुनाव अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जैसा बना दिया, जनता का इस तरह से सारे रिकार्ड तोड़कर चुनाव में ऐतिहासिक मतदान करना सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की निशानी है।

सायं 7 बजे नरेंद्र मोदी लेंगे पीएम पद की शपथ

सायं 7 बजे नरेंद्र मोदी लेंगे पीएम पद की शपथ

आज सायं 7 बजे नरेंद्र मोदी दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री की शपथ लेंगे। इस समय कुंडली के आधार पर चलिए जानने की कोशिश करते है क्या मोदी बन पाएंगे ग्लोबल लीडर, क्या मोदी देश के मुसलमानों का दिल जीत पाएंगे या मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने पर भारत की रक्षा व अर्थ नातियां कैसी होंगी ? क्या मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्रों के श्रेणी में आ पाएगा या नहीं।

मोदी की रणनीति गोपनीय रहेगी लेकिन परिणाम देश हित में होंगे

मोदी की रणनीति गोपनीय रहेगी लेकिन परिणाम देश हित में होंगे

जिस समय मोदी जी दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे उस समय पृथ्वी पर वृश्चिक लग्न होगा। मोदी की कुंडली भी वृश्चिक लग्न की है। वृश्चिक एक स्थिर लग्न है, इस समय किए गये कार्यो में स्थिरता बनी रहेगी और कार्यो में बाधाएं नहीं आएगी, लग्नेश मंगल अष्टम भाव में है। लग्नेश जब अष्टम भाव में होता है तो जातक की रणनीति हमेशा गोपनीय होती है, मतलब मोदी ऐसे कार्य करते रहेंगे जिसकी किसी को भी भनक नहीं लगेगी और परिणाम चौंकाने वाले होगें, इस समय कुंडली में चन्द्रमा पंचम भाव में बैठा है, पंचम भाव दिमाग का कारक होता है, अतः आप अपनी मानसिक शक्ति के बल पर कठोर से कठोर निर्णय लेने में कामयाब होंगे।

क्या मोदी 'ग्लोबर लीडर' बन पाएंगे?

क्या मोदी 'ग्लोबर लीडर' बन पाएंगे?

साख, सहयोग और संतुलन पर विदेशी सम्बन्धों के रिश्तों की बुनियाद टिकी होती है। अमेरिका दुनिया का चौधरी है और भारत विश्व का सांस्कृतिक गुरू, कोई भी चौधरी अपने गुरू की सलाह का अनुसरण न करें ऐसा हो नहीं सकता बर्शेते गुरू में गुरूत्व होना चाहिए। अमेरिका की राशि मेष है और मोदी की राशि वृश्चिक है। दोनों की राशि का मालिक प्रचंड साहसी और अहंकारी मंगल है इसलिए आपसी रिश्ते मधुर बने रहेंगे।

सूर्य सप्तम भाव पर कब्जा किए हुए है

पद, प्रतिष्ठा का कारक भाव दशम होता है। समय कुंडली में दशम भाव में सिंह राशि बैठी है, जिसका मालिक सूर्य सप्तम भाव पर कब्जा किए हुए है। सप्तम भाव व्यापार व यात्रा से संबंधित है। अतः आप विदेशों की और अधिक यात्रा करके व्यापारिक सम्बन्ध मजबूत करेंगे। अतः मोदी अपने कठिन परिश्रम और चुम्बकीय व्यक्तित्व के कारण विश्व में लोकप्रिय तो बने रहेंगे किन्तु 'ग्लोबल लीडर' बनने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

क्या मोदी देश के मुसलमानों का दिल जीत पाएंगे?

क्या मोदी देश के मुसलमानों का दिल जीत पाएंगे?

यह एक व्यवहारिक सवाल है। जब तक क्षेत्रीय पार्टियां सक्रिय रहेगी,तब-तक क्षेत्रवाद व जातिवाद जैसे मुद्दे हावी रहेंगे। मुसलमानों का दिल सिर्फ विकास से जितना संभव नहीं है। हां अगर मुसलमानों के दिल में अपने ही देश के राजनीतिक दल जहर न घोले तो मुसलमानों का दिल जीतने में मोदी कामयाब हो सकते है। कुंडली में आपका सूर्य व मंगलवान दोनों बलवान है। अतः आप-अपने साहस के बल पर समय पर कुछ ऐसे निर्णय लेते रहेंगे जिससे मुस्लिम महिलाओं के दिलों पर मोदी अवश्य राज करेंगे।

रक्षा व अर्थ नातियां कैसी होंगी ?

अर्थ का कारक बुध एवं रक्षा का संकेतक ग्रह मंगल है। मोदी की कुंडली में बुध व मंगल काफी अच्छी स्थिति में है। बुध उच्च का है एवं मंगल अपनी स्वराशि वृश्चिक का होकर और अधिक बलवान है। मोदी नई सरकार की अर्थव्यस्था को पटरी पर लाने के लिए निवेशकों के खोये हुये विश्वास को लौटाने के लिए उचित नीतियां बनाएंगे, मोदी रक्षा बजट पर अधिक व्यय करेंगे और भारत की आर्मी को आधुनिक साजों सामान से लैस करने की भरसक कोशिश करेंगे, मोदी के समय में कुछ ऐसे परीक्षण भी किए जायेंगे, जिससे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की धाक बनें।

 मोदी की अगुवाई में आर्थिक रेस में आगे निकलेगा भारत

मोदी की अगुवाई में आर्थिक रेस में आगे निकलेगा भारत

कोई भी देश विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में तभी आ सकता है, जब वह आर्थिक रूप से अत्यधिक समृद्ध हो। आर्थिक मजबूती का कारक बुध माना जाता है। मोदी की कुण्डली में बुध उच्च का होकर लाभ भाव में बैठा है। बुध के उच्च होने से मोदी भारत के व्यापक बाजार को ब्रान्ड बनाकर ऐसा सजायेंगे जिससे पश्चिमी देश आकृष्ट होकर भारत में निवेश करने के लिए लाइन लगायें लेकिन निवेश भारत की शर्तो पर ही करना होगा। जितना विदेशी निवेश होगा उतनी ही भारत के पास विदेशी मुद्रा का भण्डार होगा। भारत सांस्कृतिक रूप में सबसे आगे है, लेकिन अगामी वर्षो में वह विश्व की आर्थिक रेस में प्रथम स्थान हासिल करने के सपने को साकार करने की जुगत में कटिबद्ध रहेगा।

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