पोखराज किसे पहनना चाहिए और किसे नहीं?

जिन जातकों की कुण्डली में गुरू ग्रह पीडि़त होकर अशुभ फल दे रहा हो, उन्हें पोखराज धारण करने को सलाह दी जाती है।

लखनऊ। देवताओं के गुरू बृहस्पति का रत्न पोखराज वैसे तो पोखराज कई रंगों में आते है लेकिन मुख्य पोखराज का रंग पलाश के फूलों जैसा होता है।

यह रत्न बृहस्पति ग्रह से सम्बन्धित होता है, बृहस्पति ग्रह की दो राशियॉ होती है धनु और मीन। जिन जातकों की कुण्डली में गुरू ग्रह पीडि़त होकर अशुभ फल दे रहा हो, उन्हें पोखराज धारण करने को सलाह दी जाती है।

आईये पोखराज पर विस्तृत चर्चा करते है कि किसे धारण करना चाहिए और किसे नहीं...

 पोखराज धारण करने के फायदे

पोखराज धारण करने के फायदे

  • पोखराज रत्न धारण करने से मान-सम्मान व कीर्ति में वृद्धि होती है।
  • इसे पहनने से शिक्षा व करियर के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।
  • इस रत्न को पहनने से व्यक्ति में धर्म-कर्म के प्रति रूचि बढ़ती है।
  • अगर किसी के विवाह में बाधायें आ रही है तो उन लोगों को पोखराज रत्न पहनने से लाभ मिलता है।
  • प्रशासनिक अधिकारियों, वकीलों, न्यायधीशों, शिक्षकों व राजनेताओं को पोखराज धारण करने से विशेष लाभ मिलता है।
  • 6-जिन लोगों की मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु व मीन लग्न वालों लोगों को पुखराज पहनने से सन्तान, विद्या, धन, यश आदि में सफलता मिलती है।
  •  किन रत्नों के साथ पोखराज न पहनें

    किन रत्नों के साथ पोखराज न पहनें

    • पोखराज के साथ पन्ना, नीलम, हीरा, गोमेद व लहसुनियॉ नहीं पहनना चाहिए अन्यथा लाभ की जगह हानि होती है।
    • वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर व कुम्भ लग्न वाले जातकों पोखराज नहीं पहना चाहिए।
    • इन लग्नों में बृहस्पति ग्रह अकारक होता है, इसलिए पोखराज पहनने से हानि होती है। अगर छठें, आठवें व 12वें भाव का स्वामी है तो पुखराज कदापि धारण करें वरना नुकसान के लपेटे में आ सकते है।
    • स्वास्थ्य में पोखराज के लाभ

      स्वास्थ्य में पोखराज के लाभ

      • यदि आप का लीवर ठीक से काम नहीं कर रहा है और आप हेपेटाइटिस जैसे रोग से ग्रस्त है तो सोने की अॅगूठी में पोखराज अवश्य पहने।
      • अल्सर, गठिया, पेचिंस, नपुंसकता, ह्रदय आदि रोगों में पोखराज पहनने से फायदा होता है।
      • ज्वर, पीलिया, तिल्ली का बढ़ जाना, वीर्य वृद्धि, वातरोग नाशक, बवाशीर नाशक व गैस आदि रोगों में पोखराज लाभ करता है।
      • पुखराज के उपरत्न सुनैहला, केरू, घीया, केसरी, पीला हकीक व टोपाज आदि।
      • पोखराज धारण करने की विधि

        पोखराज धारण करने की विधि

        • बुधवार के दिन प्रातःकाल स्नान-ध्यान करके पन्ने को गंगाजल में दूध मिलाकर डाल दें ।
        • फिर दूसरे दिन गुरूवार को स्नान-ध्यान करके ‘‘ऊॅ बृं बृहस्पते नमः'' की कम से कम एक माला का जाप करने के बाद पोखराज को तर्जनी उॅगुली में शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरूवार को धारण करें।
        • सूर्योदय से लेकर सबुह 10 बजे तक पोखराज धारण कर लें।
        • बुधवार, गुरूवार और शुक्रवार को इन तीन दिन तक नानवेज एंव धूम्रपान कदापि न करें अन्यथा पोखराज पहने से विशेष लाभ नहीं होगा।
        • नोट

          नोट

          पुखराज रत्न किसी क्वालीफाईड ज्योतिषीय को कुण्डली दिखाये बिना नहीं पहनना चाहिए और ध्यान रहे कि किसी झोला छाप ज्योतिषी या पण्डित की सलाह पर कोई भी रत्न नहीं पहनना चाहिए, क्योंकि रत्न एक विज्ञान है, जिसमें पूरे विधान का उल्लेख है कि रत्न कितने रत्ती का और किसे धारण करना चाहिए। अगर आवश्यकता से अधिक कैरेट का पहनेगें तो नुकसान होगा एंव कम कैरेट का पहनेंगे तो लाभ नहीं होगा।

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