Astro-Tips: इन उपायों से दूर करें दांपत्य जीवन की परेशानी

नई दिल्ली। विवाह से पूर्व भावी वर-वधू की जन्मकुंडली मिलाने की प्रथा हिंदू समाज में सदियों से चली आ रही है। इसका उद्देश्य होता है जिन दो अनजान लोगों का विवाह हो रहा है, उनके जुड़ने से न केवल वे दोनों सुखी जीवन बिता सके, बल्कि उनका विवाह उन दोनों के परिवार वालों के लिए भी सुखद रहे। लेकिन अक्सर ऐसे मामले में भी बहुतायत में देखने को मिलते हैं, जिनमें कुंडली अच्छी मिलने के बाद भी दंपती के बीच लड़ाई-झगड़े, मनमुटाव, विवाद, परिवार से विवाद जैसे मामले सामने आते हैं। कई बार तो विवाह विच्छेद तक की नौबत भी आ जाती है।

कुंडली के प्रत्येक ग्रह का अच्छे मिलान होना चाहिए

कुंडली के प्रत्येक ग्रह का अच्छे मिलान होना चाहिए

इस स्थिति का कारण होता है कि या तो उनकी कुंडली के प्रत्येक ग्रह का अच्छे से विश्लेषण करके मिलान नहीं किया गया, या फिर उनके प्रारब्ध ही ऐसे होते हैं जो उन्हें वैवाहिक सुख नहीं दे पाते। बहरहाल कारण चाहे जो भी हो वैदिक ज्योतिष में हर समस्या का समाधान मिल जाएगा।

आइए जानते हैं जन्म लग्न के आधार पर विवाह में आ रही परेशानियों से कैसे निजात पाई जाए..

  • मेष लग्न : पति या पत्नी में से जिसका भी मेष लग्न हो उनके दांपत्य सुख का कारक ग्रह शुक्र होता है। शुक्र प्रसन्न् और सकारात्मक रहेगा तो वैवाहिक जीवन में कोई दिक्कत नहीं आएगी। इसके लिए नियमित रूप से गाय व पक्षियों को चावल खिलाएं। स्त्रियां मां पार्वती को समर्पित सिंदूर अपनी मांग में लगाएं। इससे दांपत्य जीवन सुखमय बनेगा।
  • वृषभ लग्न : इस लग्न के स्त्री-पुरुषों के लिए दांपत्य सुख का कारक ग्रह मंगल होता है। इसलिए दांपत्य जीवन में सुख-शांति और आपसी सामंजस्य के लिए वृषभ लग्न के स्त्री पुरुष लाल कपड़े में सौंफ बांधकर अपने बेडरूम में रखें और इसे हर सप्ताह मंगलवार को बदलते रहें। पुरानी सौंफ जल में प्रवाहित कर दें।
  • मिथुन लग्न : मिथुन लग्न के जातकों के लिए दांपत्य सुख का कारक ग्रह होता है बृहस्पति। यदि इनके दांपत्य जीवन में परेशानियां चल रही हैं तो गुरुवार का व्रत करें और इस दिन एक समय भोजन करें। इस दिन शिवलिंग पर चने की दाल अर्पित करने से संकट टल जाते हैं।
वैवाहिक जीवन

वैवाहिक जीवन

  • कर्क लग्न : कर्क लग्न की कुंडली वालों के दांपत्य सुख का कारक ग्रह शनि होता है। कर्क लग्न वालों के वैवाहिक जीवन में अक्सर परेशानियां आती हैं। इसलिए शनिवार और मंगलवार की शाम दंपती साथ में हनुमानजी के दर्शन करने जाएं। साथ ही पति हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • सिंह लग्न : जिन लोगों की कुंडली सिंह लग्न की है, उनके भी वैवाहिक सुख का कारक ग्रह शनि होता है। यदि आपका वैवाहिक जीवन संकटपूर्ण है और लड़ाई-झगड़े होते रहते हैं तो शनि-पुष्य नक्षत्र में नाव की कील से बना छल्ला मध्यमा अंगुली में धारण करें। पति या पत्नी में से जिसका सिंह लग्न हो, वही इसे धारण करे।
  • कन्या लग्न : कन्या लग्न वालों के दांपत्य सुख का कारक ग्रह होता है बृहस्पति। इस लग्न के जातक पारिवारिक सुख के लिए भगवान लक्ष्मीनारायण की आराधना करें। हर गुरुवार को केले के पौधे में जल अर्पित करें। एकादशी का व्रत नियमित रूप से करें।
  • तुला लग्न : इस लग्न के जातक दांपत्य सुख के लिए मंगल ग्रह को प्रसन्न् करें। इसके लिए मंगलवार का व्रत नियमित रूप से करें। प्रत्येक मंगलवार को दिन में एक समय भोजन करें और भोजन में कोई मीठा व्यंजन अवश्य शामिल करें। इस दिन शिवलिंग पर लाल चंदन के पाउडर का लेप करके लाल पुष्प अर्पित करें।
  • पूजन के बाद गाय को हरी घास खिलाएं

    पूजन के बाद गाय को हरी घास खिलाएं

    • वृश्चिक लग्न : वृश्चिक लग्न की कुंडली में दांपत्य सुख का कारक ग्रह शुक्र है। अत: शुक्र को प्रसन्न करने के लिए किसी ऐसे स्थान पर जाएं, जहां मछलियां हों और वहां मछलियों को मिश्रीयुक्त उबले चावल खिलाएं।
    • धनु लग्न : धनु लग्न के दंपतियों के जीवन में भी अक्सर कई तरह की परेशानियां आती रहती हैं। धनु लग्न के लिए दांपत्य सुख का कारक ग्रह बुध होता है। इसलिए बुधवार के दिन गणेशजी को दूर्वा अर्पित करें। बेसन की मिठाई का भोग गणेशजी को लगाएं।
    • मकर लग्न : मकर लग्न के जातकों के लिए दांपत्य सुख का कारक ग्रह चंद्रमा होता है। यदि आपके दांपत्य जीवन में परेशानी चल रही है तो गौरीशंकर रूद्राक्ष धारण करें। चांदी का चंद्र यंत्र बनवाकर घर के पूजा स्थान में रखें और प्रत्येक पूर्णिमा पर गंगाजल से इसका अभिषेक करें।
    • कुंभ लग्न : कुंभ लग्न के लिए दांपत्य सुख का कारक ग्रह सूर्य होता है सूर्य को प्रसन्न् करके सुखी जीवन जिया जा सकता है। इसके लिए प्रतिदिन उगते सूर्य को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें।
    • मीन लग्न : मीन लग्न के स्त्री-पुरुषों के दांपत्य सुख का कारक ग्रह बुध होता है। इन लोगों को हर बुधवार भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए। पूजन के बाद गाय को हरी घास खिलाएं।

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