ज्योतिष से जानिए कितनी दूर होगा कन्या का ससुराल?
पिछले लेख में आपने पढ़ा कि कैसे कन्या की शादी की उम्र ज्योतिष के माध्यम से ज्ञात की जा सकती है? अब हम आपको बतायेंगे कि यह कैसे जान सकते हैं कि कन्या का ससुराल कितनी दूर होगा? सभी माता-पिता अपनी कन्या का विवाह करने के लिए वर की कुंडली का गुण मिलान करते हैं। कन्या के भविष्य के प्रति चिंतित माता-पिता का यह कदम उचित है। किंतु, इसके पूर्व उन्हें यह देखना चाहिए कि लड़की का विवाह किस उम्र में, किस दिशा में तथा कैसे घर में होगा? उसका पति किस वर्ण का, किस सामाजिक स्तर का तथा कितने भाई-बहनों वाला होगा?
खैर हम आपको यहां बतायेंगे कि लड़की का ससुराल कितनी दूर होगा, उसके पति का मकान कहां होगा, शहर में या गांव में। साथ ही आपको बतायेंगे कि पति का अपना मकान होगा या नहीं।
कैसे- ज्योतिष की विधा भृगु संहिता से यह पता लगाया जा सकता है। इसके अनुसार किसी स्त्री की कुंडली का सप्तम भाव विवाह का कारक स्थान माना जाता है। अलग-अलग लग्न के अनुसार इस भाव की राशि और स्वामी भी बदल जाते हैं। अत: यहां जैसी राशि रहती है, व्यक्ति का जीवन साथी भी वैसा ही होता है।
प्रत्येक राशि में 9 अक्षर होते हैं। राशि स्वामी यदि शत्रुक्षेत्री हो, तो प्रथम, द्वितीय अक्षर, सम राशि का हो, तो तृतीय,चतुर्थ अक्षर मित्रक्षेत्री हो, तो पंचम, षष्ठम अक्षर, अपनी ही राशि का हो तो सप्तम, अष्टम अक्षर, उच्च क्षेत्री हो, तो नवम अक्षर प्रसिद्ध नाम होगा।
स्लाइडर में हम आपको बतायेंगे कि जिससे आपकी बहन या बेटी की शादी होने जा रही है उसका मकान कहां और कैसा होगा?

भवन या हवेली में ससुराल
तृतीयेश के शत्रुक्षेत्री होने से जिस राशि में हो उससे चतुर्थ राशि वाले का ससुराल हवेली या भवन में होता है।

गांव में ससुराल
यदि तृतीय से शत्रु राशि में हो और तृतीय भाव में शत्रु राशि में पड़ा हो ,तो दसवीं राशि वाली कन्या का ससुराल गांव में होता है।

नगर में होगा मकान
लड़की की जन्म लग्न कुंडली में उसके लग्न भाव से तृतीय भाव पति का भाग्य स्थान होता है। स्वामी के स्वक्षेत्री या मित्रक्षेत्री होने से पंचम और राशि वृद्धि से या तृतीयेश से पंचम जो राशि होती है उस राशि की कन्या का ससुराल नगर में होता है।

पति का अपना मकान
लड़की की कुंडली में दसवां भाव उसके पति का भाव होता है। दशम भाव अगर शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो, या दशमेश से युक्त या दृष्ट हो, तो पति का अपना मकान होता है।

पति का मकान बहुत विशाल
राहु, केतु, शनि, से भवन बहुत पुराना होगा। मंगल ग्रह में मकान टूटा होगा। सूर्य, चंद्रमा, बुध, गुरु एवं शुक्र से भवन सुंदर, सीमेंट का दो मंजिला होगा। अगर दशम स्थान में शनि बलवान हो, तो मकान बहुत विशाल होगा।

ससुराल की दूरी 90 किमी के अंदर
सप्तम भाव में अगर वृष, सिंह, वृश्चिक या कुंभ राशि स्थित हो, तो लड़की की शादी उसके जन्म स्थान से 90 किलोमीटर के अंदर ही होगी।

200 किमी के अंदर ससुराल
यदि सप्तम भाव में चंद्र, शुक्र तथा गुरु हों,तो लड़की की शादी जन्म स्थान के समीप होगी। यदि सप्तम भाव में चर राशि मेष, कर्क, तुला या मकर हो, तो विवाह उसके जन्म स्थान से 200 किलोमीटर के अंदर होगा।

80 से 100 किमी की दूरी पर ससुराल
अगर सप्तम भाव में द्विस्वभाव राशि मिथुन, कन्या, धनु या मीन राशि स्थित हो, तो विवाह जन्म स्थान से 80 से 100 किलोमीटर की दूरी पर होगा।

विदेश में पति या ससुराल
यदि सप्तमेश सप्तम भाव से द्वादश भाव के मध्य हो,तो विवाह विदेश में होगा या लड़का शादी करके लड़की को अपने साथ लेकर विदेश चला जाएगा।












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