पितृ पक्ष: पितरों का ऋण उतारने के दिन..जानिए क्या करें

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष के पन्द्रह दिन पितृ पक्ष के नाम से प्रचलित है। इन 15 दिनों में लोग अपने पूर्वजों/पितरों को जल देंते है तथा उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करते है। पितरों का ऋण श्राद्धों के द्वारा उतारा जाता है। पितृ पक्ष श्राद्धों के लिए निश्चित पन्द्रह तिथियों का कार्यकाल है। वर्ष के किसी महीना या तिथि में स्वर्गवासी हुए पूर्वजों के लिए कृष्ण पक्ष की उसी तिथि को श्राद्ध किया जाता है। इस बार श्राद्ध पक्ष 28 सितम्बर से 12 अक्टूबर तक रहेगा।

प्रगति के लिए पितृ पक्ष में करें पूर्वजों को प्रसन्न

तर्पण विधि-

पीतल की थाली में विशुद्ध जल भरकर, उसमें थोड़े काले तिल व दूध डालकर अपने समक्ष रख लें एंव उसके आगे दूसरा खाली पात्र रख लें। तर्पण करते समय दोनों हाथ के अंगूठे और तर्जनी के मध्य कुश लेकर अंजली बना लें अर्थात दोनों हाथों को परस्पर मिलाकर उस मृत प्राणी का नाम लेकर तृप्यन्ताम कहते हुये अंजली में भरा हुये जल को दूसरे खाली पात्र में छोड़ दें। एक-2 व्यक्ति के लिए कम से कम तीन-तीन अंजली तर्पण करना उत्तम रहता है।

'ऊॅत्रिपुरायै च विद्महे भैरव्यै च धीमहि, तन्नो देवी प्रचोदयात्'

इस मन्त्र की 2 माला जाप करने के पश्चात पूजन स्थान पर रखें हुये जल के थोड़े भाग को आॅखों में लगायें, थोड़ा जल घर में छिड़क दें और बचे हुये जल को पीपल के पेड़ में अर्पित कर दें। ऐसा करने से घर से नकारात्मक उर्जा निकल जायेगी और घर की लगभग हर प्रकार की समस्या से आप मुक्त हो जायेंगे।

क्या होती है पंचबलि-

पितरों को तृप्त करने के लिए अश्विन मास के कृष्णपक्ष में जिस तिथि को पूर्वजों का देहान्त हुआ हो उस तिथि को तिल, जौ, पुष्प, गंगाजल या शुद्ध जल से तर्पण, पिण्डदान और पूजन करना चाहिए। तत्पश्चात विद्वान ब्राहम्ण को भोजन, वस्त्र, फल व यथा शक्ति दान देना चाहिए। गाय, कौआ, कोयल व श्वान को भी भोजन देना चाहिए। यह कर्म पंचबलि की श्रेणी में आता है।

पितृपक्ष में क्या करें-

  • माता-पिता के प्रतिदिन चरण स्पर्श करके आशीर्वाद प्राप्त करें। उन्हें किसी प्रकार का न कष्ट दें और न अपमान करें।
  • प्रतिदि यदि सम्भव हो तो चिडि़याॅ या दूसरे पक्षियों को दाना और पानी रखें। पितृपक्ष में गाय को प्रतिदिन रोटी अवश्य खिलायें।
  • हर रोज तैयार भोजन मे से तीन भाग गाय, श्वान और कौआ को भोजन देना चाहिए।
  • बने हुये भोजन का कुछ भाग पीपल के पेड़ नीचे रखना चाहिए और जल चढ़ाना चाहिए।
  • इन पूरे पन्द्रह दिनों तक किसी गरीब, वृद्ध या असहाय व्यक्ति को भूखा कतई न रहने दें।
  • जिन लोगों के माता-पिता जीवित नहीं है, उन्हें 15 दिनों तक नित्य पितरों को भोग लगाकर तर्पण करना चाहिए।

पितृपक्ष में पितृदोष निवारण हेतु उपाय-

  • अपने कुल देवता का विधिवत पूजन व अर्चन करें।
  • नाग योनि में पड़े पितरों को मुक्ति देने के लिए पितृपक्ष में ही चाॅदी के बने नाग-नागिन के जोड़े का दान करना चाहिए।
  • इस समय पीपल व बरगद की नियमित पूजा करने से पितृदोष का शमन होता है।
  • सूर्योदय के समय कुश के आसन पर खड़े होकर गायत्री मन्त्र का जाप करते हुये सूर्य का ध्यान करना चाहिए। ऐसा करने से पितृदोष की शान्ति होती है।
  • दत्तात्रेय देवता के चित्र या मूर्ति की प्रतिदिन पूजा करें।
  • इन 15 दिनों में यदि नित्य सूर्य को जल देकर आदित्य ह्रदय स्त्रोत का पाठ करने से भी पितृदोष में न्यूनता आती है।
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