Papmochani Ekadashi 2018: भगवान विष्णु की इस दिन पूजा करने से सारे पाप हो जाते हैं नष्ट

नई दिल्ली। हिंदू व्रत परंपरा में एकादशी को सबसे बड़ा व्रत बताया गया है। यह भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय व्रत है और समस्त सुखों को प्रदान करने वाला है। प्रत्येक माह में दो एकादशी आती है। इस प्रकार वर्ष में कुल 24 एकादशी आती हैं। पापमोचिनी एकादशी हिंदू संवत्सर की अंतिम एकादशी होती है। इसके बाद नवसंवत्सर प्रारंभ हो जाता है। इस एकादशी को पापमोचिनी एकादशी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस व्रत के प्रभाव से जाने-अनजाने में वर्षभर किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन व्रत करने से पापों का प्रायश्चित किया जा सकता है। इसलिए इस एकादशी का सर्वाधिक महत्व है।

व्रत की विधि

व्रत की विधि

पापमोचिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु के नाम से ही किया जाता है। इस एकादशी के व्रत को विधिपूर्वक, संयम से करना चाहिए। व्रत का परायण करने से पूर्व पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा सुननी चाहिए। एकादशी के दिन प्रात:काल श्रीविष्णु की पूजा करे और घी का दीपक जलाए। भगवान विष्णु के समक्ष हाथ जोड़कर जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हुए ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। हरि का स्मरण करते हुए रात्रि जागरण करें। अगले दिन व्रत कथा सुनने के बाद व्रत का परायण करें।

 पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा

पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा

चित्ररथ नामक वन में मेधावी ऋषि कठोर तप में लीन थे। उनके तप से देवराज इंद्र चिंतित हो गए और उन्होंने ऋषि की तपस्या भंग करने के लिए मंजुघोषा नामक अप्सरा को पृथ्वी पर भेजा। तप में लीन मेधावी ऋषि ने जब अप्सरा को देखा तो वे उस पर मंत्रमुग्ध हो गए और अपनी तपस्या छोड़ कर मंजुघोषा के साथ वैवाहिक जीवन व्यतीत करने लगे। कुछ वर्षों के बाद मंजुघोषा ने ऋषि से वापस स्वर्ग जाने की बात कही। तब ऋषि को यह बोध हुआ कि वे शिव भक्ति के मार्ग से हट गए हैं।

ऋषि से शाप मुक्ति के लिए प्रार्थना की

ऋषि से शाप मुक्ति के लिए प्रार्थना की

सत्यता का भान होने पर उन्हें स्वयं से ग्लानि होने लगी। क्रोधवश मेधावी ऋषि ने मंजुघोषा को पिशाचिनी होने का श्राप दे दिया। इस बात से मंजुघोषा को बहुत दु:ख हुआ और उसने ऋषि से शाप मुक्ति के लिए प्रार्थना की। चूंकि मेधावी ऋषि ने भी शिव भक्ति को बीच राह में छोड़कर पाप कर दिया था। इसलिए उन्होंने भी अप्सरा के साथ पापमोचिनी एकादशी व्रत को विधि-विधान से किया और अपने पाप से मुक्त हुए।

व्रत का फल

व्रत का फल

  • पूर्ण विधि-विधान और श्रद्धा से पापमोचिनी एकादशी का व्रत करने से पापों से क्षमा मिलती है।
  • व्रत के प्रभाव से व्यक्ति का खोया सम्मान पुन: प्राप्त हो जाता है।
  • एकादशी के व्रत से व्यक्ति के घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।
  • व्रत के फल से समस्त सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है।
  • दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहती है।

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