जानिए उपवास में क्यों नहीं खातें मांस-मछली-चाट-पकौड़े?

बैंगलुरू। अक्सर कहा जाता है कि व्रत में इंसान को तामसी भोजन से दूर रहना चाहिए। तामसी भोजन का मतलब होता है कि इंसान को उपवास के दौरान अन्न, मांस, मछली, अंडा, शराब, चाट-पकौड़े जैसी चीजें नहीं खानी चाहिए।

धार्मिक उपवास आपको देता है हेल्थ भी और वेल्थ भी

बल्कि उसे सिर्फ कुछ सात्विक चीजें फल, दूध, मेवे का ही सेवन करना चाहिए। लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि ऐसा क्यों कहा जाता है, अब इसके तो धार्मिक कई कारण हो सकते हैं लेकिन इसके सीधे तौर पर सिर्फ एक सटिक वैज्ञानिक कारण है जो कि सीधे तौर पर इंसान की सेहत से जुड़ा हुआ है।

आईये आपको बताते हैं कि इन बातों के पीछे का राज, जिसे जानने के लिए नीचे की स्लाइडों पर क्लिक कीजिये...

भगवान का प्रसाद

भगवान का प्रसाद

दूध, घी चीजें भगवान को चढ़ाई जाती हैं इसलिए यह पवित्र मानी गईं हैं इसी कारण लोग इनका सेवन व्रत में करते हैं।

चित्त को शांत

चित्त को शांत

दूध-फल-मेवे जैसी चीजें व्रत में इंसान के चित्त को शांत रखती हैं इसलिए डॉक्टर्स कहते हैं कि इन सारी चीजों को उपवास में खाना चाहिए।

विकार का खात्मा

विकार का खात्मा

दूध-फल-मेवे व्रत के दौरान बॉडी के अंदर पैदा होने वाले विषेली चीजों के विकार को शांत करते हैं।

मांस-मच्छी या शराब

मांस-मच्छी या शराब

मांस-मच्छी या शराब इंसान के अदंर गर्मी भरते हैं जिसके चलते इंसान आक्रामक हो जाता है जो कि उपवास में नहीं होना चाहिए।

जानिए क्यों पूजा करते समय 'घी' का दीपक जलाते हैं?

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