जन्माष्टमी 2017: जानिए आस्था के मानक इस्कान मंदिर के बारे में...
नई दिल्ली। इस्कान मंदिर के दर्शन के लिए केवल भारतीय ही नहीं बल्कि विदेशी ललायित रहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का ये मंदिर पूरी दुनिया में काफी लोकप्रिय है।

आखिर क्या है इस बेशकीमती मंदिर की विशेषता, आइए जानते हैं इस विशाल मंदिर के बारे में विस्तार से...
- ISKCON का पूरा नाम International Society for Krishna Consciousness है जिसे हिंदी में अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ या इस्कान कहते हैं।
- इस्कान मंदिर की स्थापना श्रीमूर्ति श्री अभयचरणारविन्द भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपादजी ने सन् 1966 में न्यूयॉर्क सिटी में की थी।
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- स्वामी प्रभुपादजी नें पूरे विश्व में भगवान कृष्ण के संदेश को पहुंचाने के लिए इस मंदिर की स्थापना की थी।
- मात्र 55 बरस की उम्र में संन्यास लेकर पूरे विश्व में स्वामी जी ने हरे रामा हरे कृष्णा का प्रचार किया।
- जिसके कारण मात्र दस वर्ष के अल्प समय में ही समूचे विश्व में 108 मंदिरों का निर्माण हो चुका था।
- इस समय पूरे विश्व में करीब 400 इस्कान मंदिर हैं।
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- मंदिर के चार नियम -उन्हें तामसिक भोजन त्यागना होगा (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा से दूर), अनैतिक आचरण से दूर रहना (इसके तहत जुआ, पब, वेश्यालय जैसे स्थानों पर जाना वर्जित है), एक घंटा शास्त्राध्ययन (इसमें गीता और भारतीय धर्म-इतिहास से जुड़े शास्त्रों का अध्ययन करना होता है)
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- इस्कॉन के अनुयायी विश्व में गीता एवं हिन्दू धर्म एवं संस्कृति का प्रचार-प्रसार करते हैं।
- यहां के अनुयायी चार चीजों को धर्म मानते हैं- दया, तपस्या, सत्य और शुद्दता।
- बैंगलोर का इस्कान मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा इस्कान मंदिर हैं।












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