कविता: ये बलखाती लहराती जुल्फें ,नित घायल मुझे...

स्वर्ग परी सी ये सुन्दरता , मुझको निकट तेरे ले आती है ॥
ये बलखाती लहराती जुल्फें ,नित घायल मुझे बनाती हैं ।
ये रूह की तेरी मोहक खुशबू,तेरा कायल मुझे बनाती है ॥
इन अधरों के मधुर मिलन में, यह दुनिया सारी समाई है ।
इन झुकी हुई पलकों के अन्दर,देखो कितनी गहराई है ॥
इन् नयनों की एक अदा ने , इस पत्थर् को प्रीत सिखा डाली।
जाम ने तेरे इस यौवन के , ये मुझे कैसी रीत सिखा डाली ॥
नाजुक सी गोरी बाहें तेरी ,थाम के चलने को दिल करता है।
श्रृंगार तेरा नख से सिख तक, नित करने को दिल करता है ॥
कोमल कपोलों मे पडी भंवर, है लगता ऋतु अब आयी संवर ।
माथे की सुन्दर सी बेन्दी यह, है लगती फूलों पर मधुकर ॥












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