Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर घोटाले में Tinnu Yadav समेत 8 अरेस्ट में कौन-कौन? Champat Rai का इस्तीफा

Ram Mandir Donation Scam FIR: उत्तर प्रदेश पुलिस ने राम मंदिर में चढ़ावे (दान) की कथित हेराफेरी के मामले में बड़ा एक्शन लिया है। शुक्रवार (26 जून) को अयोध्या पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज FIR के आधार पर नामजद आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सभी आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और उन्हें आज कोर्ट में पेश किया जाएगा।

वहीं, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। आपको बता दें कि 25 जून की रात FIR दर्ज की गई थी। इसमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम शामिल था। SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में मजबूत सिफारिशों के आधार पर कार्रवाई हुई।

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कौन-कौन गिरफ्तार? FIR में किसके नाम ?

SIT की जांच और शिकायत के आधार पर मुख्य नाम इस प्रकार हैं:

  • 1. टिन्नू यादव (राम शंकर यादव): सबसे चर्चित नाम। ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के करीबी माने जाते हैं। पूर्व में ऑटो ड्राइवर रहे, बाद में चढ़ावा प्रबंधन और दर्शन व्यवस्था से जुड़े।
  • 2. लवकुश मिश्रा
  • 3. अनुकल्प मिश्रा
  • 4. अविनाश शुक्ला
  • 5. मनीष यादव
  • 6. रामाशंकर मिश्रा
  • 7. सुभाष चंद्र श्रीवास्तव
  • 8. करुणेश पांडेय

SIT रिपोर्ट में और 2-3 नाम शामिल बताए जा रहे हैं, जांच आगे बढ़ने पर अतिरिक्त नाम सामने आ सकते हैं। कुल मिलाकर SIT ने 17 लोगों को संदिग्ध माना था, जिनमें उच्च पदाधिकारी भी शामिल थे।

टिन्नू यादव मुख्य आरोपी क्यों?

टिन्नू यादव पर सबसे ज्यादा उंगलियां उठ रही हैं। जांच के दौरान उनके पास दानपात्रों की चाबियां मिलने की खबरें आईं। उनके घर से करोड़ों रुपये मूल्य के सोने-नकदी की बरामदगी और अचानक बढ़ी संपत्ति के आरोप लगे हैं। टिन्नू ने इन आरोपों से इनकार किया है और अपनी संपत्ति को पुरानी बता कर सफाई दी है।

आरोप क्या हैं? चढ़ावे में कितना गबन?

राम मंदिर में रोजाना लाखों रुपये नकद, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य दान आता है। आरोप है कि 50 करोड़ से 200 करोड़ रुपये तक की हेराफेरी हुई। मुख्य आरोप:

  • दानपात्रों से निकले पैसे का सही हिसाब-किताब नहीं रखा गया।
  • सोने-चांदी के आभूषणों का उचित रिकॉर्ड और सुरक्षा नहीं की गई।
  • कुछ रकम बेनामी खातों या व्यक्तिगत उपयोग में चली गई।
  • चढ़ावा गिनने, रखरखाव और जमा करने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही और संदिग्ध भूमिकाएं।
  • कुछ कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में 22 जनवरी 2024 (प्राण प्रतिष्ठा) के बाद अचानक सुधार।

SIT ने लगभग 150 सेवादारों और कर्मचारियों की आर्थिक पृष्ठभूमि की जांच की।

केस किन धाराओं में दर्ज? सजा का प्रावधान

FIR में मुख्यतः निम्नलिखित धाराएं लगाई गई हैं (Bharatiya Nyaya Sanhita के तहत):

धारा कब लगती है अधिकतम सजा का प्रावधान
धारा 306 BNS कर्मचारी/सेवक द्वारा चोरी 7 साल तक की जेल और जुर्माना
धारा 316(5) BNS गंभीर विश्वासघात (सौंपी गई संपत्ति का गलत इस्तेमाल) उम्रकैद या 10 साल तक की जेल और जुर्माना
धारा 317(4) BNS चोरी की संपत्ति को बार-बार रखना या उसका कारोबार करना उम्रकैद या 10 साल तक की जेल और जुर्माना
धारा 317(5) BNS चोरी की संपत्ति छिपाने या ठिकाने लगाने में मदद करना 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों
धारा 61 BNS आपराधिक साजिश साजिश में शामिल अपराध के अनुसार सजा तय होती है
धारा 3(5) BNS संयुक्त जिम्मेदारी (कई लोगों द्वारा मिलकर अपराध करना) सभी आरोपियों पर समान रूप से जिम्मेदारी और सजा लागू होती है

ये धाराएं गंभीर आर्थिक अपराधों को कवर करती हैं और सजा कठोर हो सकती है।

FIR में Champat Rai और उच्च पदाधिकारियों का नाम गायब?

शुरुआती सूत्रों में SIT रिपोर्ट में चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा, निर्माण प्रभारी गोपाल राव समेत वरिष्ठ लोगों का जिक्र था। हालांकि, दर्ज FIR में मुख्य रूप से निचले स्तर के कर्मी और मध्य स्तर के लोग नामजद हैं। विपक्ष इसे 'बड़ी मछलियों को बचाने' की कोशिश बता रहा है, जबकि सरकार और ट्रस्ट इसे निष्पक्ष जांच का हिस्सा मानते हैं।

Who Is Krishna Mohan: शिकायतकर्ता कृष्ण मोहन कौन हैं?

कृष्ण मोहन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य हैं। कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद 9 सितंबर 2025 को उन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया। कृष्ण मोहन, हरदोई जिले के शाहाबाद के रहने वाले हैं। भारतीय वन सेवा (IFS) के महाराष्ट्र कैडर के अधिकारी रह चुके। लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी किया। उसके बाद 1978 में IFS में चयन, नागपुर में तैनाती के दौरान RSS से जुड़ाव। संघ में विभिन्न स्तरों (नगर, जिला, प्रांत, क्षेत्रीय) पर जिम्मेदारियां संभाली। 2012 में सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक कार्य। उनकी शिकायत को ट्रस्ट की आंतरिक सफाई की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

'भाजपा राज में नाइंसाफी की झांकी', अखिलेश यादव का तंज

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर दान घोटाले मामले में दर्ज हुई एफआईआर को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि भाजपा राज में 'नाइंसाफी की झांकी' देखने को मिल रही है, जहां 'फुनगी को फांसी और शाखाओं को माफी' दी जा रही है।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पहले विशेष जांच दल (SIT) के नाम पर सबूतों को खत्म किया गया होगा और यह तय कर लिया गया होगा कि किन लोगों को बचाना है और किन्हें फंसाना है। उन्होंने कहा कि जनता के बीच यह धारणा बन रही है कि एफआईआर दर्ज होने से पहले ही पूरी जांच की दिशा तय कर दी गई थी।

सपा प्रमुख ने सवाल उठाया कि क्या एसआईटी को पहले से रिपोर्ट तैयार कर दी गई थी और उसी के आधार पर जांच की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच का निष्कर्ष पहले ही निकाल लिया गया और बाद में कार्रवाई की औपचारिकता पूरी की गई।

ट्रस्ट की भूमिका और बचाव

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर का प्रबंधन संभालता है। महासचिव चंपत राय ने आरोपों से इनकार किया है और इसे राजनीतिक साजिश बताया। ट्रस्ट का दावा है कि चढ़ावा पारदर्शी तरीके से संभाला जाता है, लेकिन SIT रिपोर्ट और FIR ने सिस्टमिक लापरवाहियों को उजागर किया है। ट्रस्ट ने खुद SIT गठन की सिफारिश की थी।

बड़े सवाल और आगे क्या?

  • मंदिर ट्रस्ट जैसी संस्था में वित्तीय लेखा-जोखा और ऑडिट की व्यवस्था कितनी मजबूत है?
  • उच्च पदाधिकारियों की भूमिका क्या थी? क्या केवल निचले स्तर के कर्मियों को बलि का बकरा बनाया जाएगा?
  • भक्तों का विश्वास टूटने से राम मंदिर आंदोलन की गरिमा पर असर पड़ेगा।
  • SIT रिपोर्ट सार्वजनिक होनी चाहिए। बड़े नामों की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए।

ट्रस्ट ने वित्तीय विवरण देने से इनकार किया है, SIT जांच का हवाला देते हुए। Supreme Court में भी याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं, CBI-SIT की मांग की जा रही है। यह मामला सिर्फ एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि आस्था, प्रशासन और राजनीति का मिश्रण है। लाखों-करोड़ों भक्तों ने राम मंदिर के निर्माण में योगदान दिया है। उनकी आस्था का हर पैसा पवित्र है। जांच की अंतिम रिपोर्ट, आरोपियों की गिरफ्तारी और दोषियों को सजा ही इस विवाद को शांत कर सकती है।

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