CM Yogi Inauguration Rajpal Tyagi Statue: उत्तर प्रदेश की राजनीति के बेताज बादशाह राजपाल त्यागी की पुण्यतिथि से एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद के मुरादनगर का दौरा किया। इस दौरान राजपाल त्यागी के मुरादनगर को ₹868 करोड़ से अधिक की 90 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। इतना ही नहीं, स्थानीय स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेवी राजपाल त्यागी की प्रतिमा का अनावरण भी किया। साथ ही CM योगी ने इस मौके पर राजपाल त्यागी के योगदान को भी याद किया।
खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चल रही योगी सरकार की यह पहल मुरादनगर और मोदी नगर विधानसभा क्षेत्रों को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इन परियोजनाओं में सड़क, पेयजल, सीवरेज, शिक्षा, स्वास्थ्य, शहरी विकास तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े अनेक कार्य शामिल हैं, जो क्षेत्र की विकास यात्रा को नई गति देंगे। इसके साथ-साथ लाखों नागरिकों के भविष्य को अधिक सुविधाजनक व बेहतर बनाएंगे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को लैपटॉप, चेक, आवास की चाबियां और प्रशस्ति पत्र भी बांटे गए। एक झलक मुरादनगर के बादशाह पर...
मालूम हो कि राजपाल त्यागी का निधन 18 जुलाई 2025 को हुआ था। बागपत के मुखारी गांव से निकलकर राजपाल त्यागी ने सियासी जीवन की शुरुआत की। पहले उन्होंने, कानूनी ज्ञान हासिल करने के लिए LLB की पढ़ाई की। इसके बाद, गाजियाबाद में वकालत भी की। धीरे-धीरे बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के पद तक पहुंचे। सियासत में पूरी तरह से कांग्रेस के सहारे पंजा रखा। करीब 8 सात तक गाजियाबाद का जिला कांग्रेस अध्यक्ष उन्हें बनाया गया। बाद में, विधानसभा चुनावों की ओर रूख किया। मुरादनगर क्षेत्र से ही 6 बार विधायक बने। दो बार केंद्रीय मंत्री बने और एक बार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे। आपको बता दें कि, यह कार्यक्रम प्रदेश सरकार की उस कार्यसंस्कृति का प्रतीक है, जिसमें विकास का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिक्षा, रोजगार, आवास और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार की योजनाएं समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाने का कार्य कर रही हैं।Who Was Rajpal Tyagi: कौन थे राजपाल त्यागी?
विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक
17 जुलाई को राजपाल त्यागी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे CM योगी, क्यों कहते इन्हें UP राजनीति का बेताज बादशाह?