Maharashtra सरकार कर्मचारियों का करवा रही HINDI नॉलेज टेस्ट, उद्धव शिवसेना ने हिंदी थोपने का लगाया आरोप
Hindi Imposition On Maharashtra Govt Employees: महाराष्ट्र सरकार द्वारा कर्मचारियों के लिए हिंदी नॉलेज एग्जाम (Hindi language proficiency exams) आयोजित की जा रही है। फडणवीस सरकार की हालिया अधिसूचना ने राज्य में भाषा प्राथमिकताओं को लेकर एक नई राजनीतिक व सांस्कृतिक बहस छेड़ दी है। इसे 'हिंदी थोपने' का प्रयास बताया जा रहा है।
महाराष्ट्र के भाषा विभाग ने मुंबई, पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर के संभागीय केंद्रों पर 28 जून 2026 को राजपत्रित व गैर-राजपत्रित अधिकारियों के लिए हिंदी परीक्षा आयोजित की जाएंगी।

हालांकि ऐसी परीक्षाएं पूर्व में भी हुई हैं, लेकिन इस बार इस निर्णय की राजनीतिक दलों और भाषा कार्यकर्ताओं ने कड़ी आलोचना की है। शिवसेना (यूबीटी) ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया।

उद्धव की शिवसेना ने सरकार को घेरा
शिवसेना (यूबीटी) ने पूछा, "राज्य कर्मचारियों पर हिंदी थोपने की कोशिश से आखिर किसके हितों की पूर्ति हो रही है?" पार्टी ने मराठी की आधिकारिक भाषा वाले राज्य में हिंदी को बढ़ावा देने पर सवाल उठाए।
पार्टी का तर्क है कि मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के बावजूद सरकारी कर्मचारियों पर हिंदी थोपना विरोधाभासी है। उनका कहना है कि महाराष्ट्र की पहचान मराठी भाषा और संस्कृति में गहराई से निहित है।श्[
कर्मचारियों की हिंदी दक्षता जांचने का क्या औचित्य है?
मराठी अभ्यास केंद्र के अध्यक्ष डॉ. दीपक पवार ने भी आलोचना की। उन्होंने कहा, जब प्रशासनिक संवाद पहले से ही मराठी में होता है, तो कर्मचारियों की हिंदी दक्षता जांचने का क्या औचित्य है?
परीक्षाएं तत्काल रद्द करने की मांग, प्रदर्शन की दी चेतावनी
डॉ. पवार ने जोर दिया कि हिंदी न महाराष्ट्र की आधिकारिक भाषा है और न ही दैनिक प्रशासन के लिए आवश्यक। उन्होंने गैर-हिंदी भाषी राज्यों जैसे तमिलनाडु, कर्नाटक या गुजरात में ऐसे इम्तिहानों पर भी सवाल उठाया। इस कदम को अनावश्यक बताते हुए डॉ. पवार ने आरोप लगाया कि यह मराठी को कमजोर करता है और प्रशासनिक संसाधनों की बर्बादी है। उन्होंने सरकार से प्रस्तावित परीक्षाएं तत्काल रद्द करने और फैसले पर पुनर्विचार न होने पर विरोध-प्रदर्शनों की चेतावनी दी।
साेशल मीडिया पर घिरे सीएम और डिप्टी सीएम
यह विवाद तेजी से सोशल मीडिया पर फैला है, जहां मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित कई राजनीतिक नेताओं को स्पष्टीकरण की मांग वाले पोस्ट में टैग किया गया है। राज्य सरकार ने अभी तक इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। आने वाले दिनों में इस बढ़ते भाषाई विवाद पर उसके रुख पर करीब से नजर रखी जाएगी।













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