नई दिल्ली, 7 सितम्बर। दिल्ली की एक अदालत ने उत्तरी पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की जांच में ढुलमुल रवैये को लेकर दिल्ली पुलिस की खिंचाई की है। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली पुलिस के उदासीन रवैये के चलते वह दंगों के मामले की सुनवाई सुचारू नहीं हो पा रही है।
दिल्ली हिंसा: 'उदासीन रवैये के चलते मामले की सुनवाई करने में असमर्थ', कोर्ट ने की दिल्ली पुलिस की खिंचाई
चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अरुण कुमार गर्ग ने इसके साथ ही पुलिस कमिश्नर को मामले की उचित और शीघ्र जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
पहले भी लगाई थी अदालत ने क्लास
इसके पहले अदालत ने एक सितम्बर को भी सुनवाई के दौरान दंगों के मामलों में जांच के निष्कर्ष को सुनिश्चित किए बिना एक के बाद एक पूरक चार्जशीट दाखिल करने को लेकर दिल्ली पुलिस की क्लास लगाई थी। जिसके चलते अदालत मामले का ट्रायल करने में खुद को असफल पा रही थी।
तब न्यायालय ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया था कि वह ऐसे मामलों में जांच का निष्कर्ष समयबद्ध तरीके से एक महीने के भीतर सुनिश्चित। ताकि ऐसे मुकदमे जो जांच एजेंसी की निष्क्रियता के चलते लंबे समय से लंबित हैं उन्हें तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
क्या है मामला?
कोर्ट गोकुलपरी पुलिस स्टेशन में दर्ज आईपीसी की धारा 147,148 और 149 के तहत एक मुकदमे की सुनवाई कर रही थी। जिसमें दंगों के दौरान एक घर को लूटने और नुकसान पहंचाने का आरोप लगाया गया था। एसपीपी ने अदालत को बताया कि वह सीसीटीवी फुटेज पर अपनी जांच कर रहा था जिसे जब्त किया गया था। फुटेज को फॉरेंसिक लैब में भेजा गया है जिसे पूरक चार्जशीट के साथ दाखिल किया जाएगा।\
हाल ही में एक सत्र अदालत ने उत्तरी पूर्वी दिल्ली से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान आधू-अधूरी चार्जशीट दाखिल करने और जांच अधिकारी के कोर्ट के सामने न आने पर दिल्ली पुलिस की खिंचाई की थी। वहीं कुछ दिन पहले ही हाईकोर्ट ने एक ही मामले में 5 अलग अलग केस दर्ज करने पर दिल्ली पुलिस पर सख्त टिप्पणी की थी। इसके साथ ही कोर्ट ने सुनवाई के बाद पहले दर्ज एक मामले के अलावा चार अन्य मामलों को रद्द कर दिया था।