दुर्गम हिमाचल में करोड़ों कमा रहे बागवान विक्रम रावत, वीराने में हरियाली और मिठास घोलने का पुरुषार्थ

बैंकर से बागवान बने विक्रम रावत कलासन नर्सरी फार्म के तहत नवाचार और फलों की खेती में कामयाबी की मिसाल बन चुके हैं। Vikram Rawat Apple Farming Kalasan Nursery Farm Himachal Pradesh

शिमला, 04 अक्टूबर : एक बैंकर जब खेती करने का फैसला करे तो चौंकाने वाला लगता है। हालांकि, हिमाचल प्रदेश के वीराने में 20 साल पहले सेब की खेती शुरू करने वाले विक्रम रावत आज सफल किसान के अलावा सफल गाइड के रूप में भी पहचान बना चुके हैं। करोड़ों रुपये कमा रहे विक्रम सैकड़ों लोगों को सेब के पौधे बांटते हैं। साथ ही लोगों को सेब की खेती से जुड़े टिप्स भी दिए जाते हैं। खास बात ये की विक्रम ने अपनी यात्रा खुद बयां की है। कलासन फार्म यूट्यूब पर उन्होंने विस्तार से बताया है कि कैसे उन्होंने सेब की खेती में कामयाबी के झंडे गाड़े। जानिए, सुदूर हिमाचल की ये प्रेरक सक्सेस स्टोरी- (सभी फोटो सौजन्य- फेसबुक @KalasanNurseryFarm)

हजारों किसानों से जुड़े विक्रम

हजारों किसानों से जुड़े विक्रम

हिमाचल प्रदेश के एक रिटायर्ड बैंक ने नौकरी से मुक्त होने के बाद खेतों में अपना जौहर दिखाया। विक्रम रावत नाम के सफल किसान ने 42 बीघा जमीन पर मॉडल फॉर्म तैयार किया है विक्रम बताते हैं कि 20 साल पहले शुरू हुआ उनका यह सफर अब हजारों किसानों से जुड़ चुका है। विक्रम रावत खुद बागवानी के अलावा लाखों किसानों को सेब के पौधे बांटते भी हैं।

Kalasan Nursery Farm

Kalasan Nursery Farm

बैंक की नौकरी के बाद बागवानी करने का यह फैसला कैसे हुआ ? इस बारे में विक्रम बजाते हैं कि बैंक में मोटी तनख्वाह वाली नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने जब सेब की खेती का फैसला लिया तो आसान नहीं था, लेकिन उन्हें कुछ अलग करने की चाह ने खेती के लिए इंस्पायर किया। विक्रम की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे Kalasan Nursery Farm नाम की संस्था चलाते हैं। एडवांस्ड गार्डनिंग ट्रेनिंग देते हैं। 11000 से अधिक किसानों को ट्रेनिंग के साथ-साथ विक्रम रावत पांच लाख से अधिक पौधे भी बांट चुके हैं।

आधुनिक सेब की बागवानी के जनक

आधुनिक सेब की बागवानी के जनक

हिमाचल की राजधानी शिमला से करीब 110 किलोमीटर दूर छोटे से गांव कलासन में कामयाबी की कहानी लिख रहे विक्रम रावत की इस सफलता में उनका परिवार भी साथ है। फार्म मैनेज करने में बेटी हाथ बंटाती है। कलासन फार्म के आधिकारिक फेसबुक पेज पर अलग-अलग तस्वीरों में विक्रम रावत के पुरुषार्थ की कहानी देखी जा सकती है। हिमाचल में सेब की खेती करने वाले परंपरागत किसान विक्रम रावत को आधुनिक सेब की खेती की शुरुआत का श्रेय देते हैं। उन्हें आधुनिक सेब बागवानी का जनक बताते हैं।

किस सवाल से शुरू हुई सेब की खेती

किस सवाल से शुरू हुई सेब की खेती

विक्रम अपने बागवानी के सफर के बारे में कलासन फार्म के यूट्यूब चैनल पर विस्तार से बताते हैं। उन्होंने वीडियो संदेश में बताया है कि उनकी बागबानी की शुरुआत बिना किसी योजना से हुई। इसका दिलचस्प किस्सा है कि बैंकिंग सेवा में उन्हें जिन इलाकों में भी पोस्ट मिली वहां सेब की खेती भरपूर मात्रा में होती थी। वहां बागवानों से उनकी दोस्ती हो गई। जब सीजन के दौरान उनसे सेब खिलाने को कहते तो जवाब मिलता कि इस साल तो पैदा ही नहीं हुए। कई सालों तक दोस्तों ने इसी तरह टालमटोल किया तो दिमाग में यह बात आई कि ऐसा हो क्यों रहा है ? इसी सवाल का जवाब है Kalasan Nursery Farm

विदेश के सेब और हिमचल में अंतर !

विदेश के सेब और हिमचल में अंतर !

विक्रम बताते हैं कि उन्होंने सेब की पैदावार के बारे में जानने की कोशिश की। बकौल विक्रम रावत, वे अपने दोस्तों के सेब के बाग में भी गए लेकिन वहां भी उन्हें इसकी जानकारी नहीं मिली। इसके बाद इंटरनेट पर रिसर्च की। विदेश में अपनाए जाने वाले सेब की खेती के तरीकों को देखा। जानने की कोशिश की कि विदेश में सेब की खेती और हिमाचल के सेब की खेती में क्या अंतर है ? लगातार रिसर्च के बाद बागवानी में रुचि बढ़ी और आधुनिक एप्पल फार्मिंग शुरू करने का फैसला लिया।

शुरुआत में सेब के पौधे बांटे, लेकिन...

शुरुआत में सेब के पौधे बांटे, लेकिन...

बकौल विक्रम, इंटरनेट से जुटाई गई जानकारी को उन्होंने सेब की बागवानी कर रहे लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की। अपने पैसे से उन्हें एडवांस वैरायटी के सेब के पौधे खरीद के भी दिए, लेकिन किसी ने भी इन पौधों में रुचि नहीं दिखाई। विक्रम बताते हैं कि लोगों की उदासीनता देखने के बाद खुद खेती का फैसला लिया और 2002 में अपनी पूंजी से 42 बीघा जमीन खरीदी। अमेरिका से एडवांस पौधे मंगवाए और इसे तैयार किए गए बाग में लगाया। शुरुआत में कई विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों और बागवानी विशेषज्ञों को अपने बाग में लाए। उनसे इस बारे में परामर्श लिया, लेकिन अधिकांश लोगों ने कहा कि ऐसे सेब की वैरायटी की बागवानी शिमला या कलासन में संभव नहीं है।

सफलता में परिवार का योगदान

सफलता में परिवार का योगदान

विशेषज्ञों ने कहा, सेब की खेती संभव नहीं, लेकिन विक्रम ने तो सफलता हासिल करने का संकल्प ले रखा था। एडवांस्ड फॉर्म तैयार करने में उन्हें लगभग 8 साल का समय लगा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। विक्रम बताते हैं कि वह हर साल अपने बाग में नए-नए पौधे लगाते रहे। 8 साल के बाद उन्हें शानदार नतीजे मिले।
विक्रम रावत की सफलता के पीछे उनके परिवार का भी उल्लेखनीय योगदान है।

देश-विदेश के लोग आते हैं Kalasan Nursery Farm

देश-विदेश के लोग आते हैं Kalasan Nursery Farm

विक्रम की पत्नी रजनी रावत बताती हैं कि एडवांस मॉडल फार्म तैयार करने में बहुत चुनौतियां सामने आई। हालांकि, उन्होंने ठान रखा था कि बाकी की जरूरतों में कटौती क्यों न करनी पड़े, एडवांस्ड फार्म के उपकरणों में कोई समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने एप्पल फार्म के लिए उपकरण जुटाए और आज नतीजा है कि देश-विदेश के लोग उनके Kalasan Nursery Farm देखने आते हैं।

परिवार की नजरों में विक्रम रावत

परिवार की नजरों में विक्रम रावत

रजनी रावत के अनुसार लोग उनके फार्म पर आकर सेब की खेती सीखते हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें पौधे लगाने से जुड़े मटेरियल दिए जाते हैं। वे अपने अनुभव हमारे साथ शेयर करते हैं तो उन्हें बहुत खुशी मिलती है। एप्पल फार्म को एडवांस बनाने के लिए विक्रम रावत अब तक जर्मनी और नीदरलैंड्स जैसे देशों की यात्रा भी कर चुके हैं।

20 हजार पौधे विक्रम रावत के बाग में

20 हजार पौधे विक्रम रावत के बाग में

इजरायल और अमेरिका जैसे देशों में भी विक्रम रावत खेती की अत्याधुनिक तकनीक देखने और सीखने जा चुके हैं। इन देशों के दौरे के बाद विक्रम रावत ने किसानों को सबसे ज्यादा उत्पादन वाले फसल की किस्में मुहैया कराने के लिए उन्होंने इन देशों का दौरा किया। एडवांस किस्म के फलों को भारत में लगाने की शुरुआत की। नतीजा यह है कि एडवांस किस्म की 20 वेराइटी वाले 20 हजार पौधे विक्रम रावत के बाग में देखे जा सकते हैं।

नीचे देखिए विक्रम रावत की वीडियो---

इजराइल की तकनीक से सेब की खेती

विक्रम बताते हैं कि उनकी बेटी भी फार्म को संभालने में उनकी मदद करती हैं। वे श्रमिकों की संख्या घटाने के लिए यानी अत्याधुनिक तकनीक से अधिक प्रभावी खेती की दिशा में कदम बढ़ाते हुए बाग को ऑटोमेशन में बदलने की शुरुआत कर चुके हैं। बकौल विक्रम, सेब के बाग ऑटोमेशन में डालने के लिए उन्होंने इजरायल की तकनीक का इस्तेमाल किया है। सेब के पौधों में सेंसर लगाए जाएंगे सेंसर को कंप्यूटर के जरिए रीड किया जाएगा, जिससे पौधों को पानी व जरूरी पोषक तत्व एक बटन क्लिक दिए जा सकेंगे इससे टाइम भी बचेगा और संसाधनों की लागत भी कम होगी।

दूसरे किसानों की मदद कैसे करते हैं

दूसरे किसानों की मदद कैसे करते हैं

कलासन फार्म से आधुनिक खेती के तरीके सीखने वाले बागवान खुद की इनकम में इजाफा की बात भी स्वीकार करते हैं। उन्होंने बताया कि हर साल लाखों का नुकसान होता था, लेकिन अत्याधुनिक खेती के तरीकों की मदद से नुकसान घटाने में काफी मदद मिली है। विक्रम रावत बागवानों को राय देने के अलावा उनके फार्म में जाकर उनकी खेती के तरीके भी देखा करते हैं। दूसरे अखबारों के परिस्थितियां जानने समझने के बाद उनके बाग में लगे सेब की वैरायटी के बारे में पूरी राय देते हैं।

खुद विक्रम की जुबानी सुनें उनकी सफलता की कहानी--

2019 में बैंक की नौकरी छोड़ी

विक्रम ने तीन साल पहले 2019 में बैंक की नौकरी छोड़ दी। अब पूरा समय सेब की खेती में देते हैं। उनकी सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड सरकार ने उन्हें बागवानी सलाहकार बनाया है। उत्तराखंड में कई आधुनिक सेब के बाग लगा चुके विक्रम रावत कलासन फार्म में ट्रेनिंग देने के अलावा फार्म स्टे की सुविधा भी मुहैया कराते हैं। यहां लोग प्राकृतिक माहौल में रहने का आनंद लेने के अलावा फलों से लदे बागों में क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सकते हैं।

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