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इस सब्जी की खेती में 15-20 हजार निवेश, लाखों की इनकम, जानिए तरीका

पारंपरिक रबी और खरीफ सीजन की फसलों के अलावा सब्जियों की खेती (vegetable farming) भी मुनाफे का सौदा है जानिए लौकी की खेती (bottle gourd cultivation) का तरीका
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नई दिल्ली, 16 मई : लौकी की खेती खरीफ सीजन में किसान अच्छी तादाद में करते हैं। लौकी को कुछ क्षेत्रों में घीया नाम से भी जाना जाता है। इसकी खेती में कम निवेश और अच्छा रिटर्न है। एक अनुमान के मुताबिक एक एकड़ खेत में लौकी की रोपाई करने पर 15-20 हजार रुपये की लागत आती है। घीया की फसल तैयार होने, मार्केट में अच्छी डिमांड और फसल की गुणवत्ता ठीक रहने पर एक एकड़ में लौकी की फसल से 80 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक कमाए जा सकते हैं। अभी खरीफ सीजन के फसलों की बुआई हो रही है। लौकी लगाने का परफेक्ट समय चल रहा है। लौकी से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के अलावा जानिए, लौकी की खेती में कौन सी बातों का ध्यान रखकर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

कम निवेश में अच्छा मुनाफा

कम निवेश में अच्छा मुनाफा

क्या आपने सुना है कि 15-20 हजार रुपये के निवेश और थोड़ी मेहनत से की गई खेती से एक लाख रुपये की आमदनी हो सकती है ? अगर नहीं तो घीया की खेती आपके लिए शानदार विकल्प है। खरीफ फसल के रूप में बोई जाने वाली लौकी की खेती के लिए जून-जुलाई का समय भी परफेक्ट होता है। एक एकड़ में की गई लौकी की खेती अच्छी मार्केट डिमांड के आधार पर 80 हजार से एक लाख रुपये के बीच आसानी से कमाए जा सकते हैं। बता दें कि दिल्ली, हरियाणा, यूपी, पंजाब के अलावा बिहार और झारखंड के किसान भी बड़े पैमाने पर लौकी की खेती करते हैं।

दो महीने में फसल तैयार

दो महीने में फसल तैयार

खेतों में बीजों की रोपाई के 50-55 दिनों के बाद लौकी फलना शुरू हो जाती है। आम तौर से खरीफ सीजन में लौकी की फसल को सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन बारिश नहीं होने पर पौधों और मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई की जा सकती है। बारिश होने की स्थिति में लौकी की फसल का खास ध्यान रखना पड़ता है। खेतों में पानी निकलने के रास्ते पहले बनाकर रखने चाहिए, जिससे फसल और लौकी की बेल सड़े नहीं।

घरों की छत पर भी उगा सकते हैं

घरों की छत पर भी उगा सकते हैं

लौकी की फसल से अधिक पैदावार के लिए नर्सरी में पौधे तैयार किए जा सकते हैं। सीधे खेत में रोपाई से 20-25 दिन पहले लौकी को नर्सरी में तैयार कर लिया जाता है। नर्सरी तैयार करते समय मिट्टी की मात्रा के अनुपात में 50 प्रतिशत कंपोस्ट खाद मिला लेना चाहिए। खेत की कमी के कारण रूफ टॉप फार्मिंग में भी लौकी की फसल लगाई जा सकती है। मिट्टी के गमलों, प्लास्टिक या फाइबर के ग्लास और गमलों में भी लौकी की रोपाई की जा सकती है।

ऐसी मिट्टी में करें खेती

ऐसी मिट्टी में करें खेती

किसी भी फसल की तरह लौकी की खेती में भी जलवायु और मौसम का ध्यान रखना जरूरी है। लौकी की बुआई या तो गर्मी के समय होती है या बारिश के दिनों में। ऐसे में इसे सर्दियों में पाला लगने की आशंका हो है। लौकी की खेती में 30-40 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान आदर्श माना जाता है। किसी भी मिट्टी में लौकी की खेती की जा सकती है, लेकिन पानी निकलने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। जीवाश्वम युक्त हल्की दोमट मिट्टी लौकी या घीया की खेती के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है।

लौकी का कीड़ों से बचाव, उन्नत किस्मों की खेती

लौकी का कीड़ों से बचाव, उन्नत किस्मों की खेती

लौकी की बेल में किसी तरह का कीड़ा लगने पर कीटनाशकों और केमिकल का इस्तेमाल किया जा सकता है। जड़ों और बाकी हिस्सों में भी कीड़ों का अटैक देखा गया है। इनसे बचाव के लिए किसान भाई कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर कीटनाशक और केमिकल वाले खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने लौकी की कई हाइब्रिड किस्में भी विकसित की हैं। इनमें पूसा हाइब्रिड तीन, अर्का गंगा जैसी हाइब्रिड लौकी की खेती करने पर 50-55 दिनों में लौकी की फसल तैयार हो जाती है। अनुमान के मुताबिक एक हेक्टेयर में हाइब्रिड लौकी की रोपाई के बाद 30-60 टन फसल तैयार होती है। हाइब्रिड से इतर अच्छी पैदावार के लिए लौकी की दूसरी लोकप्रिय किस्मों में पूसा नवीन, पूसा संतुष्टि, काशी कुंडल, काशी गंगा, पूसा संदेश भी शामिल हैं।

सेहत का खजाना लौकी

सेहत का खजाना लौकी

आम तौर पर लौकी की सब्जी खाना लोगों को पसंद नहीं होता, लेकिन ये सब्जी सेहत का खजाना है। पोषक तत्वों से भरपूर लौकी के सेवन से कई बीमारियों से बचाव होता है। लौकी में विटामिन ए और सी के अलावा कैल्शियम, आयरन और जिंक भी पाए जाते हैं। लौकी का सेवन वजन कम करने में भी कारगर होता है। इसके अलावा भी लौकी के कई लाभ हैं। एक नजर :

  • नींद न आने की समस्या से निजात।
  • लौकी खाने से तनाव कम होता है।
  • हृदय की सेहत ठीक रखने में लौकी बेहद लाभकारी।
  • पाचन तंत्र को ठीक रखती है लौकी।
  • बालों को सफेद होने से रोकती है लौकी।
  • घीया या लौकी खाना स्किन के लिए भी फायदेमंद।
  • शरीर में पानी की कमी नहीं होने देती लौकी।
खरीफ सीजन के अलावा लौकी की खेती कब ?

खरीफ सीजन के अलावा लौकी की खेती कब ?

कद्दूवर्गीय फसल के रूप में मशहूर लौकी की खेती साल में तीन बार की जाती है। खरीफ सीजन की लौकी के अलावा रबी और जायद में भी लौकी की बुआई होती है। रबी सीजन में लौकी की खेती सितंबर अंत से अक्टूबर के पहले सप्ताह के दौरान होती है। इसके अलावा जायद सीजन के लौकी में जनवरी मध्य तक बुआई कर लेनी होती है।

लौकी के लिए खाद

लौकी के लिए खाद

किसानों के लिए उर्वरक का इस्तेमाल भी अहम सवाल है। किसी भी फसल की खेती की तरह लौकी की रोपाई और बाद में खाद या कीटनाशकों का इस्तेमाल विशेषज्ञों की सलाह पर ही करें। उर्वरकों में 200-250 क्विंटल पुरानी गोबर की खाद डालने से लौकी की पैदावार बढ़ती है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर लौकी की फसल में 50 किलोग्राम नाइट्रोजन, 35 किलो फास्फोरस, 30 किलो पोटाश का इस्तेमाल किया जा सकता है। 25 किलो नाइट्रोजन लौकी के लिए खेत तैयार करते समय मिट्टी में मिला देनी चाहिए। इसके बाद 25 किलो का इस्तेमाल दो हिस्सों में करें। पहला 12.5 किलो नाइट्रोजन लौकी की फसल में 4-5 पत्तियों के लगने पर, जबकि दूसरी बार फूल लगने के बचे हुए 12.5 नाइट्रोजन डाले जा सकते हैं।

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English summary
learn kharif season vegetable farming. cultivation of bottle gourd alias lauki or ghiya is profitable in low cost.
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