कौन हैं रिटायर्ड जस्टिस मंजुला चेल्लूर, जिन्हें मिली बंगाल में चुनाव बाद हिंसा की जांच की कमान?
कोलकाता, 3 सितम्बर। कलकत्ता हाई कोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रहीं जस्टिस मंजुला चेल्लूर एक बार फिर से चर्चा में हैं। जस्टिस चेल्लूर को पश्चिम बंगाल में चुनावों बाद हुई हिंसा की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) की निगरानी के लिए नियुक्त किया गया है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने उनकी नियुक्ति तब की है जब सुप्रीम कोर्ट के जज ने एसआईटी जांच की निगरानी के लिए अनुपलब्धता जाहिर की थी। पूरे देश में सुर्खियों में रहे बंगाल की चुनाव बाद हिंसा की जांच की निगरानी मिलने के बाद जस्टिस मंजुला चेल्लूर का नाम चर्चा में आ गया है।

ईमानदार जज के रूप में रही पहचान
जस्टिस चेल्लुर के बारे में और बताएं उनके बारे में एक घटना का जिक्र जरूरी हो जाता है जिससे वह चर्चा में आई थीं। साल था 2017 और तब वह बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश थीं। उस दौरान महाराष्ट्र में डॉक्टरों पर हिंसा की बढ़ती घटनाओ को लेकर राज्य के डॉक्टर विरोध प्रदर्शन करते हुए हड़ताल पर चले गए थे। इसी मामले में सुनवाई करते हुए उन्होंने कहा था कि वे (डॉक्टर) फैक्ट्री मजदूर नहीं है और अगर वे पिटाई से इतना डरते हैं तो उन्हें इस्तीफा देकर घर चले जाना चाहिए। उस समय जस्टिस मंजुला चेल्लुर की टिप्पणी पर याचिकाकर्ता ने पूछा था कि क्या वे तब भी इसी तरह से प्रतिक्रिया देतीं जब वकीलों और जजों के साथ ऐसा ही व्यवहार किया जाता।
जस्टिस मंजुला चेल्लूर की पहचान एक ईमानदार जज के रूप में है। साथ ही कलकत्ता हाईकोर्ट के हाल के दिनों में सबसे कठोर न्यायाधीशों में गिना जाता है।

पहली महिला वकील से पहली महिला जज का सफर
कलकत्ता हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उनके बारे में जो जानकारी है उसके मुताबिक जस्टिस चेल्लूर का जन्म कर्नाटक के बेल्लारी में हुआ था। उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई बेल्लारी से ही की थी। बेल्लारी के अलम सुमंगलम्मा महिला कॉलेज से बीए करने के बाद उन्होंने कानून की डिग्री के लिए बेंगलुरु के रेणुकाचार्य लॉ कॉलेज में एडमिशन लिया। 1977 में एलएलबी की डिग्री लेने के बाद उन्हें ब्रिटेन के हर्मन स्थित क्राउन कोर्ट में एक साल के लिए सीखने का मौका मिला।
वहां से लौटने के बाद उन्होंने बेल्लारी में प्रैक्टिस शुरू की और वहां पर प्रैक्टिस करने वाली वह पहली महिला वकील बनी। उन्होंने सिविल और क्रिमिनल लॉ में विशेषज्ञता हासिल की औऱ कर्नाटक में ट्रांसजेंडर के लिए कल्याण के लिए भी काम किया। कानून के क्षेत्र में उनके असाधारण काम को देखते हुए कर्नाटक राज्य महिला विश्वविद्यालय, बीजापुर ने 2013 में डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की।
नवम्बर 2011 में केरल उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। सितम्बर 2012 में वह मुख्य न्यायाधीश बनीं जो उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पहली नियुक्ति थी। इसके बाद साल 2014 में उनका तबादला हुआ और उन्हें कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार मिला। कलकत्ता हाईकोर्ट में वह पहली महिला मुख्य न्यायाधीश थीं और इसके पहले कर्नाटक हाईकोर्ट की पहली न्यायाधीश भी रहीं। आखिरी नियुक्ति उनकी बॉम्बे हाईकोर्ट में रही जहां वे मख्य न्यायाधीश के रूप में 2017 में रिटायर हुई।

किन हाई प्रोफाइल मामलों की सुनवाई
जस्टिस मंजुला चेल्लूर ने अपने कार्यकाल में जिन हाई प्रोफाइल मामलों की सुनवाई की उनमें कोलकाता में पोंजी स्कीम घोटाले का मामला भी शामिल है। 2013 में केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी और न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन की पीठ ने राज्य सरकार से राज्यसभा के तत्कालीन सभापति पीजे कुरियन के खिलाफ रेप मामले में एक बयान प्रस्तुत करने को कहा था। यह मामला उस जनहित याचिका की सुनवाई से जुड़ा था जिसमें कुरियन के खिलाफ लगे आरोपों को लेकर राज्य और पुलिस महानिदेशक को जांच के लिए निर्देश देने की मांग की गई है.
2017 में बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी एक टिप्पणी ने भी सुर्खियां बटोरी थी जिसमें उन्होंने एक महिला पत्रकार को अदालत में मर्यादा के अनुरूप ड्रेस न पहनने को लेकर पूछा था किया यह मुंबई की संस्कृति है।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक जस्टिस चेल्लूर ने अपनी टिप्पणी में कहा था "वकीलों और न्यायाधीशों का एक ड्रेस कोड होता है। मैं दूसरों से ड्रेस पहनकर आने की उम्मीद नहीं करती। आप जॉगिंग करने जाते हैं तो शॉर्ट्स पहन लेती हैं लेकिन कॉलेज जाने के लिए नहीं पहनते हैं। आप कोर्ट रूप में भी क्रॉस लेग करके नहीं बैठ सकते हैं। कोर्ट भी न्याय का मंदिर है... आपको शालीन कपड़े पहनने चाहिए।












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