38 साल तक प्यून दास अंकल ने बजाई स्कूल की घंटी, आखिरी ‘टन-टन’ ने रुलाया सबको- दिल छू लेगा ये VIDEO

Das Uncle Last Bell Video: बेंगलुरु के बिशप कॉटन गर्ल्स स्कूल में 38 साल तक प्यून के रूप में सेवा देने वाले दास अंकल का आखिरी दिन हर किसी के लिए भावुक कर देने वाला था। उनकी अंतिम घंटी की 'टन-टन' ने स्कूल के बच्चों, शिक्षकों और स्टाफ को रुला दिया।

इस मार्मिक पल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसे 1.5 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है। इंस्टाग्राम पर शेयर इस वीडियो ने दास अंकल की सादगी और समर्पण को अमर कर दिया। आइए, जानते हैं उनकी कहानी और इस भावुक विदाई ने इंटरनेट को कैसे छुआ...

Das Uncle Last Bell

आखिरी घंटी: 38 साल की सेवा का अंत

दास अंकल ने 1986 में बिशप कॉटन गर्ल्स स्कूल में प्यून के रूप में काम शुरू किया था। तब से हर सुबह और दोपहर, उनकी घंटी स्कूल की धड़कन बनी। शनिवार (18 अक्टूबर) को जब उन्होंने आखिरी बार घंटी बजाई, तो स्कूल का माहौल गमगीन हो गया। वीडियो में दास अंकल को घंटी बजाते और बच्चों-शिक्षकों के साथ विदाई लेते देखा गया। बच्चे तालियां बजा रहे थे, लेकिन उनकी आंखें नम थीं। स्कूल स्टाफ ने बताया, 'दास अंकल की मुस्कान और बच्चों से प्यार स्कूल की पहचान थी। वे बच्चों को अपने परिवार की तरह मानते थे।'

वायरल वीडियो: इंटरनेट पर छाई कहानी

इंस्टाग्राम हैंडल @amikutty_ ने वीडियो शेयर किया, जिसे 1.57 करोड़ व्यूज और 27 लाख लाइक्स मिले। कैप्शन में लिखा, '38 साल बाद, दास अंकल ने आखिरी घंटी बजाई। उनकी मुस्कान, समर्पण और शांत उपस्थिति स्कूल की आत्मा थी। आज हम उनकी सेवा का जश्न मना रहे हैं।' वीडियो में दास अंकल को घंटी बजाते और बच्चों के बीच मुस्कुराते देखा गया। एक दृश्य में वे स्कूल के गलियारे में चलते हुए अलविदा कहते दिखे।

दास अंकल: सादगी और समर्पण की मिसाल

दास अंकल (उम्र करीब 60 वर्ष) ने 38 साल तक स्कूल में न सिर्फ घंटी बजाई, बल्कि बच्चों की मदद की, कक्षाएं सजाईं, और स्कूल को परिवार की तरह संभाला। स्टाफ के मुताबिक, उनकी मेहनत और हंसमुख स्वभाव ने सभी को प्रेरित किया। एक शिक्षक ने कहा, 'वे सुबह सबसे पहले आते और आखिरी में जाते। बच्चे उन्हें 'अंकल' कहकर पुकारते थे।'

काम का सम्मान: छोटा-बड़ा नहीं, नीयत मायने रखती है

दास अंकल की कहानी साबित करती है कि काम की कीमत मेहनत और ईमानदारी से तय होती है। उनकी आखिरी घंटी सिर्फ धातु की आवाज नहीं, बल्कि दशकों की लगन और प्रेम का प्रतीक थी। स्कूल प्रबंधन ने उनकी सेवा के लिए सम्मान समारोह आयोजित किया, जिसमें उन्हें शॉल और उपहार दिए गए।

बिशप कॉटन गर्ल्स स्कूल : बेंगलुरु का गौरव

बिशप कॉटन गर्ल्स स्कूल (Bishop Cotton Girls' School) बेंगलुरु का ऐतिहासिक स्कूल है। 1865 में स्थापित, यह भारत के सबसे पुराने बोर्डिंग स्कूलों में से एक है। यहाँ की शिक्षा और अनुशासन की देशभर में चर्चा है। दास अंकल जैसे कर्मचारी इसकी धरोहर का हिस्सा रहे।

दास अंकल की आखिरी घंटी ने न सिर्फ स्कूल, बल्कि इंटरनेट को भी भावुक कर दिया। उनकी कहानी सिखाती है कि समर्पण की कोई कीमत नहीं। यह वीडियो हमें याद दिलाता है कि छोटे काम भी बड़े बदलाव लाते हैं।

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