Amarnath Yatra: बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए बदले नियम! यात्रा से पहले चेक करें सुरक्षा से लेकर खर्च के डिटेल
Amarnath Yatra 2025: हर साल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह का प्रतीक बन चुकी पवित्र अमरनाथ यात्रा 2025 की भव्य शुरुआत हो गई है। बर्फ से ढकी पहाड़ियों और कठिन रास्तों के बीच बसे अमरनाथ गुफा मंदिर की यात्रा का पहला जत्था 2 जुलाई को जम्मू से रवाना हुआ। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने खुद इस पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
करीब 5,880 श्रद्धालुओं के साथ इस यात्रा की शुरुआत उस श्रद्धा की मिसाल है जो हर साल हजारों किलोमीटर दूर से आए लोगों को हिमालय की ऊंचाइयों तक ले जाती है। इस बार यात्रा को लेकर कई बड़े बदलाव किए गए हैं - हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद हैं, सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैकिंग सिस्टम पहले से मजबूत किया गया है, और यात्रियों के स्वास्थ्य व सुविधा को लेकर कई खास इंतजाम किए गए हैं।

38 दिन तक चलेगी यात्रा, दो रास्तों से पहुंचेगी गुफा तक
इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 38 दिनों तक चलेगी। श्रद्धालु अमरनाथ गुफा, जो समुद्र तल से 3,880 मीटर की ऊंचाई पर है, दो रास्तों से पहुंच सकते हैं:
- नुनवान-पहलगाम मार्ग (अनंतनाग जिला): यह पारंपरिक और सुंदर 48 किलोमीटर लंबा रास्ता है, जो थोड़ा लंबा जरूर है लेकिन चढ़ाई आसान होती है।
- बालटाल मार्ग (गांदरबल जिला): यह 14 किलोमीटर का छोटा लेकिन कठिन और सीधा रास्ता है, जो कम समय में पहुंचने वालों की पसंद होता है।
दोनों रास्तों को अब 6 फीट से बढ़ाकर 12 फीट चौड़ा कर दिया गया है ताकि अधिक श्रद्धालु यात्रा कर सकें और सुरक्षा बनी रहे।
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पंजीकरण जरूरी, हेल्थ सर्टिफिकेट भी मांगा जाएगा
अब तक 3.31 लाख से ज्यादा लोग पंजीकरण करवा चुके हैं। रोजाना 15,000 श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति होगी। सभी को पंजीकरण कराना जरूरी है, जिसमें स्वास्थ्य प्रमाणपत्र भी शामिल है। पंजीकरण शुल्क ₹220 प्रति व्यक्ति है।
इस बार हेलीकॉप्टर सेवा नहीं मिलेगी
सरकार ने 1 जुलाई से 10 अगस्त तक पूरे यात्रा मार्ग को 'नो फ्लाइंग ज़ोन' घोषित कर दिया है। यानी इस बार यात्रियों को हेलीकॉप्टर सुविधा नहीं मिलेगी। उन्हें पैदल यात्रा करनी होगी या घोड़े, पालकी आदि का सहारा लेना होगा।
यात्रियों के लिए जरूरी सलाह
श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (SASB) ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा मार्ग को स्वच्छ रखें, कूड़ा ना फैलाएं और प्लास्टिक का उपयोग न करें। पिछले साल पहले 20 दिनों में ही 200 टन कचरा जमा हुआ था।
- शराब, कैफीन वाले पेय और धूम्रपान से बचें।
- खाली पेट यात्रा शुरू न करें और जरूरत से ज्यादा मेहनत न करें।
- खाने में कार्बोहाइड्रेट से भरपूर चीजें खाएं, लंगर में मुफ्त भोजन उपलब्ध है।
- महिलाएं यात्रा के दौरान साड़ी की जगह सलवार-कमीज, ट्रैकसूट या पैंट-शर्ट पहनें।
- मजबूत ट्रैकिंग शूज पहनें क्योंकि रास्ता काफी ऊंचा-नीचा है।
चप्पे-चप्पे पर निगरानी और सुरक्षा
- यात्रा की निगरानी के लिए राजभवन में एकीकृत कंट्रोल रूम और पुलिस कंट्रोल रूम से हर पल नजर रखी जा रही है।
- हर श्रद्धालु को ट्रैक करने के लिए RFID ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है।
- ड्रोन और किसी भी प्रकार के उड़ने वाले उपकरण बिना इजाजत पूरी तरह बैन हैं।
स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर की गईं
- ONGC ने चंदनवाड़ी और बालटाल में 100-बेड वाले अस्पताल बनाए हैं।
- मोबाइल मेडिकल टीमें, ऑक्सीजन बूथ और इमरजेंसी सेवाएं हर मार्ग पर मौजूद हैं।
यात्रियों को ऊंचाई की बीमारी से बचाव के लिए पर्याप्त समय तक रुककर वातावरण के अनुसार खुद को ढालने की सलाह दी गई है।
सुविधाओं में हुआ बड़ा सुधार
- श्रीनगर में नया यात्री निवास और अमरनाथ श्राइन बोर्ड कार्यालय शुरू किया गया है, जहां से पंजीकरण और आवास की मदद मिलेगी।
- यात्रा मार्गों पर आश्रय स्थल, पेयजल केंद्र, मोबाइल टॉयलेट जैसी सुविधाओं को अपग्रेड किया गया है।
अमरनाथ कैसे पहुंचे?
- हवाई मार्ग: नजदीकी एयरपोर्ट श्रीनगर है। वहां से पहलगाम (90 किमी) या बालटाल (100 किमी) सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है।
- रेल मार्ग: जम्मू तवी सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जहां से बस या टैक्सी के जरिए श्रीनगर, पहलगाम या बालटाल पहुंच सकते हैं।
- सड़क मार्ग: जम्मू, श्रीनगर, पहलगाम और बालटाल सड़क से अच्छी तरह जुड़े हुए हैं।
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