उत्तराखंड चुनाव: खफा हुए हरीश रावत को प्रियंका गांधी ने मनाया, जानिए कैसे बनीं संकट मोचन

उत्तराखंड चुनाव: खफा हुए हरीश रावत को प्रियंका गांधी ने मनाया, जानिए कैसे बनीं संकट मोचन

देहरादून, 24 दिसंबर: उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों से पहले पूर्व सीएम हरीश रावत के तल्‍ख तेवरों के बाद कांग्रेस हाईकमान डैमेज कंट्रोल में जुट गया। बगावती हुए हरीश रावत के अचानक सुर बदल गए। इसके पीछे प्रियंका गांधी का हाथ बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि बिगड़ते हालात में प्रियंका गांधी ने कमान संभाली, हरीश रावत से बात की और उन्हें मना लिया। इस तरह प्रियंका गांधी एक बार फिर से कांग्रेस के लिए संकट मोचन बनीं। पूर्व सीएम हरीश रावत ने बुधवार को तीन कड़े ट्वीट किए। 'समुद्र में तैरना है, हाथ बंध गए हैं, सोच रहा हूं कि समुद्र में उतरूं कि नहीं, विश्राम करूं'। एक तरह से बेबसी व्यक्त करने वाले इन ट्वीट से साफ जाहिर हुआ कि रावत के सम्मान को ठेस लगी है।

harish rawat and priyanka gandhi

प्रियंका गांधी ने की बात

कांग्रेस पार्टी के दिग्गज और उत्तराखंड अभियान समिति के प्रमुख हरीश रावत को फ्री हैंड नहीं देने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधने के एक दिन बाद, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को उनसे बात की। हरीश रावत के करीबी कह रहे हैं कि उन्हें पंजाब प्रभारी के तौर पर कैप्टन अमरिंदर की विदाई के लिए यूज भर किया गया, लेकिन अब उनकी भी हालत कैप्टन जैसी करने की कोशिशों में पार्टी के ही कुछ लोग लगे हुए हैं। नाराजगी इस बात की भी है कि राज्य में दो रैलियों में रावत के पोस्टर कुछ लोगों ने हटवा दिए। उनमें एक रैली में देवेंद्र यादव भी मौजूद थे।

हरीश रावत चाहते हैं सीएम के चेहरे का बताया जाए नाम

पार्टी सूत्रों का कहना है कि रावत विधानसभा चुनाव में सीएम का चेहरा बनना चाहते हैं, लेकिन पार्टी नेतृत्व इससे बचना चाहता है। इसलिए कि अन्य नेता नाराज न हो जाएं। रावत समर्थकों का मानना है कि रावत को फेस नहीं बनाया गया, तो चुनाव कांग्रेस बनाम मोदी हो जाएगा। रावत बनाम धामी होने पर ही कांग्रेस जीत सकती है।

सूत्रों की मानें तो प्रियंका गांधी से बात होने के बाद हरीश रावत के तेवर ठंडे पड़ गए। उन्होंने गुरुवार को ट्वीट किया, 'मेरा ट्वीट रोजमर्रा जैसा ही ट्वीट है, मगर आज अखबार पढ़ने के बाद लगा कि कुछ खास है, क्योंकि भाजपा और आप पार्टी को मेरी ट्वीट को पढ़कर बड़ी मिर्ची लग गई है और इसलिए बड़े नमक-मिर्च लगाए हुए बयान दे रहे हैं।'

सूत्रों के मुताबिक, रावत टिकट बंटवारे को लेकर खफा हैं और पार्टी मामलों में अपनी बात रखना चाहते हैं। कांग्रेस ने रावत को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है जो उनके समर्थकों की प्रमुख मांग है। शुक्रवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करने वाले हैं।

उत्तराखंड में शुरू हुई गुटबाजी

उत्तराखंड कांग्रेस गुटबाजी से घिरी हुई है, जिसमें प्रीतम सिंह एक समूह का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि हरीश रावत दूसरे खेमे में हैं। इसके अलावा राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का अपना समूह है। प्रीतम सिंह और उपाध्याय के नेतृत्व वाले रावत विरोधी खेमे ने पार्टी नेतृत्व से चुनाव से पहले सीएम चेहरे की घोषणा नहीं करने को कहा है, और इससे रावत नाराज हैं जो टिकट वितरण में उचित हिस्सा चाहते हैं।

हरीश रावत के नए वार से उत्तराखंड में पार्टी के लिए परेशानी पैदा होने की उम्मीद है क्योंकि नारायण दत्त तिवारी और इंदिरा हृदयेश के निधन के बाद उनके पास रावत के अलावा कोई चेहरा नहीं है, जिनकी पूरे राज्य में उपस्थिति है।

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