कोरोना से मौत के मामले में बिना डेथ सर्टिफिकेट मृतक के परिजनों को मिलेगी सरकारी सहायता: अरविंद केजरीवाल
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर: मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोरोना से जान गंवाने वाले परिवारों को सरकारी सहायता मिलने में आ रही समस्या को लेकर अधिकारियों से नाराजगी जाहिर की। वह पीड़ितों को सरकारी दफ्तर बुलाने और विभिन्न तरह के दस्तावेज मांगने से बेहद खफा थे। उन्होंने कोरोना से हुई मौत पर डेथ सर्टिफिकेट और सर्वाइविंग मेंबर सर्टिफिकेट की आवश्यकता को सिरे से खारिज किया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किया कि कोरोना से हुई मौत को सत्यापित करने के लिए गृह मंत्रालय से जारी सूची पर्याप्त है। इसके लिए किसी भी अतिरिक्त दस्तावेज की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया कि गृह मंत्रालय की लिस्ट से मृतकों का नाम सत्यापित कर तत्काल सहायता राशि का वितरित करें। बुधवार तक हर हाल में घर जाकर सभी पीड़ितों को इस राशि का वितरण कर दें। इस संबंध में बुधवार को फिर समीक्षा बैठक की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ कहा कि हमारी व्यवस्था इस तरह होनी चाहिए कि अधिकारी पीड़ित के घर जाएं और सत्यापन के बाद वहीं उनके बैंक खाते में सहायता राशि का तत्काल ट्रांसफर कर दें।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री परिवार आर्थिक सहायता योजना की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम, मुख्य सचिव विजय देव और सभी जिलाधिकारी मौजूद रहे। समीक्षा बैठक के दौरान सीएम अरविंद केजरीवाल ने योजना के तहत जनता को आ रही समस्या पर अधिकारियों को आइना दिखाने के लिए बैठक में एक पीड़ित को बुलाया और आपबीती कहने को कहा।
पीड़ित ने बताया कि मेरे पिता की कोरोना से मौत पर एक शिक्षक ने मेरे घर आकर फार्म भरवाया और सत्यापन करने का लेटर भी दिया। इसके बाद मेरे पास फोन आया कि आपको ऑनलाइन फार्म भरना होगा। मैने ऑनलाइन आवेदन जमा भी जमा कर दिया। फिर एसडीएम कार्यालय से फोन आया कि आप सारे डॉक्यूमेंट लेकर आइए और भौतिक सत्यापन कराइए। साथ ही, मुझसे आरटी पीसीआर रिपोर्ट भी मांगी गई। मेरे पास आरटी पीसीआर रिपोर्ट नहीं है। तब कहा गया कि आरटी-पीसीआर रिपोर्ट अवश्य चाहिए। इसके बाद मैं एसडीएम कार्यालय जाकर अपनी समस्या बताई, तब उन्होंने सत्यापित किया कि मेरे पिता की कोरोना से मौत हुई थी। पीड़ित की ओर से बताई गई आपबीती के बाद समीक्षा बैठक में मौजूद अधिकारी भी हैरान रह गए। मुख्य सचिव विजय देव ने भी नाराजगी जाहिर की।
इसके बाद सीएम अरविंद केजरीवाल ने अधिकारियों से कहा कि हमारी व्यवस्था इस तरह की होनी चाहिए कि हम पीड़ित के घर जाएं और उनके खाते में सहायता राशि ट्रांसफर करके आएं। हमारी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए थी कि जनता हमें शाबाशी दे। हालांकि अब भी बहुत देर नहीं हुई है। हमें अभी से ही अपनी कार्य प्रणाली में सुधार लाना है। अब आप उनके घर जाइए और सत्यापन करिए। सत्यापन होने के बाद वहीं से लाभार्थी के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर कीजिए।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अधिकारी एक-एक आवेदक के घर जाएं और सत्यापन करके उसे तत्काल सहायता राशि प्रदान करें। इसके लिए मृत्यु प्रमाण पत्र की कोई जरूरत नहीं है। हमारे पास मृतक की सत्यापित सूची है। साथ ही, सर्वाइविंग मेंबर सर्टिफिकेट की भी कोई जरूरत नहीं है। अगर सर्वाइविंग मेंबर पति या पत्नी है, तो पूरी राशि उसे दे दिया जाए और अगर सर्वाइविंग मेंबर दो या तीन बच्चे हैं, तो राशि सब में बराबर-बराबर बांट दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें यह समझना चाहिए कि यह सभी लोग हमारे परिवार की तरह ही हैं। हमें उनकी अपने परिवार की तरह ही मदद करनी है। जैसे हम अपने परिवारों में किसी के दुख में साथ देते हैं, उसी तरह हमें साथ देना है। पूरी दिल्ली एक परिवार की तरह हैं। हमें शोक संतप्त परिवारों से कोई प्रमाण पत्र नहीं चाहिए। अधिकारी उनके घर जाकर सारी प्रक्रिया पूरी करे और उनके खाते में पैसे हस्तांतरित करें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन लोगों को अभी तक योजना के तहत आर्थिक सहायता नहीं मिली है, लेकिन उनका सत्यापन हो चुका है, बुधवार तक उन सभी लोगों के खाते पैसे ट्रांसफर कर दिए जाएं। मैं बुधवार को योजना की पुनः समीक्षा करूंगा, जिसमें पूरी रिपोर्ट रखी जाए।
योजना के तहत 7163 लोगों को मिली अनुग्रह राशि
समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री परिवार आर्थिक सहायता योजना के अंतर्गत एकमुश्त अनुग्रह राशि (50 हजार रुपए) प्राप्त करने के लिए 25709 आवेदन आए हैं। इसमें से स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एमएचए की सूची से 24,475 आवेदनों का मिलान कर लिया गया है। इन आवेदकों के घर का विजिट करने के लिए 1130 टीमें बनाई गई हैं और 2019 कर्मचारी लगाए गए हैं। कर्मचारियों ने करीब 19 हजार आवेदकों के घरों का दौरा कर सत्यापन कर लिया है। सत्यापन के दौरान 1250 लोगों ने अनुग्रह राशि लेने से इन्कार कर दिया है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने 24,475 आवेदकों में से 9043 आवेदकों को योजना से लाभांवित करने की मंजूरी प्रदान की है और अभी तक 7163 लाभार्थियों के खाते में अनुग्रह राशि भेजी गई है। वहीं, 1425 आवेदनों को विभिन्न कारणों से रद्द कर दिया गया है। इसके अलावा, अधिकारियों ने सीएम को अवगत कराया कि योजना के तहत मासिक वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए 6700 आवेदन आए हैं। इसमें से 3648 आवेदनों को मंजूरी प्रदान की जा चुकी है और 3131 लाभार्थियों को मासिक वित्तीय सहायता का लाभ मिल रहा है। अभी तक इनके खाते में 1 करोड़ 56 लाख 57 हजार 500 रुपए ट्रांसफर किया जा चुका है।












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