राजस्थान सीएम अशोक गहलोत बोले-'ERCP के काम में रोड़ा अटका रही केन्द्र सरकार'
राजस्थान सीएम अशोक गहलोत बोले-'ईआरसीपी के काम में रोड़ा अटका कर रही केन्द्र सरकार'
जयपुर, 02 जुलाई। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केन्द्र सरकार पर राजस्थान के प्रति भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि वह पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) के काम में रोड़ा अटका कर रही है। गहलोत आज मुख्यमंत्री निवास पर ईआरसीपी पर आयोजित आमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि केन्द्रीय जलशक्ति मंत्रालय के सचिव द्वारा राजस्थान के मुख्य सचिव को पत्र लिखा गया कि राजस्थान सरकार द्वारा ईआरसीपी से जुड़े किसी भी हिस्से में कार्य संपादित नहीं किया जाए। पत्र में अंतरराज्यीय मुद्दों पर सहमति न बनने का कारण बताकर रोकने के लिए लिखा गया। संविधान के अनुसार जल राज्य का विषय है।
इस परियोजना में अभी तक राज्य का पैसा लग रहा है। पानी राजस्थान के हिस्से का है तो केंद्र सरकार राज्य को परियोजना का कार्य रोकने के लिए कैसे कह सकती है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा राजस्थान के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाकर प्रदेश की जनता को पेयजल और किसानों को सिंचाई के लिए पानी से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के अनुसार जल राज्य का विषय है, केंद्र द्वारा रोडे़ अटकाना अनैतिक है। इस परियोजना की डीपीआर मध्यप्रदेश-राजस्थान अंतरराज्यीय स्टेट कंट्रोल बोर्ड की वर्ष 2005 में आयोजित बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार तैयार की गई है। इसके अनुसार 'राज्य किसी परियोजना के लिए अपने राज्य के कैचमेंट से प्राप्त पानी एवं दूसरे राज्य के कैचमेंट से प्राप्त पानी का 10 प्रतिशत प्रयोग इस शर्त के साथ कर सकते हैं, यदि परियोजना में आने वाले बांध और बैराजों का डूब क्षेत्र दूसरे राज्य की सीमा में नहीं आता हो तो ऎसे मामलों में अन्य राज्य की सहमति आवश्यक नहीं है।
गहलोत ने कहा कि गत वर्षों में मध्यप्रदेश द्वारा पार्वती नदी की सहायक नदी नेवज पर मोहनपुरा बांध एवं कालीसिंध नदी पर कुंडालिया बांध निर्मित किए गए, जिनसे मध्यप्रदेश में लगभग 2.65 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र विकसित हुआ है। इनकी अनापत्ति मध्यप्रदेश द्वारा बांधों के निर्माण के पश्चात वर्ष 2017 में ली गई थी।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश द्वारा ईआरसीपी पर आपत्ति निराधार है। मध्यप्रदेश ने वर्ष 2005 की बैठक के निर्णय के अनुसार ही अपनी परियोजना बना ली और जब राजस्थान की बारी आई तो रोड़े अटकाने का काम किया। इसकी डीपीआर अंतरराज्यीय स्टेट कंट्रोल बोर्ड की बैठक के निर्णयों तथा केन्द्रीय जल आयोग की वर्ष 2010 की गाइडलाइन के अनुसार तैयार की गई है।












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