केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल: धर्मेंद्र प्रधान को संगठन में शामिल किए जाने की संभावना

केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा की बातें चल रही है। 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले किसी भी समय केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की जा सकती है। इसी बीच राजनीतिक हलकों में ये चर्चा है कि ओडिशा से आने वाले दो मंत्रियों की संभावित विदाई तय है।

2021 में कैबिनेट के आखिरी फेरबदल के बाद से लगातार सुगबुगाहट हो रही है कि धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रिपरिषद से छुट्टी दे दी जाएगी और प्रमुख संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जाएगी।

cabinet reshuffle

घटनाक्रम से परिचित सूत्रों ने कहा कि अगर धर्मेंद्र प्रधान को मंत्री पद की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाता है, तो उन्हें भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई का प्रभारी बनाया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश एक महत्वपूर्ण राज्य है जो केंद्र में अगली सरकार का भाग्य तय करेगा। धर्मेंद्र प्रधान इस क्षेत्र और इसकी राजनीतिक नब्ज से परिचित हैं क्योंकि वह 2019 के आम और 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले राज्य के प्रभारी थे। जबकि अटकलें ये भी है कि धर्मेंद्र प्रधान, भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा की भी कमान संभाल सकते हैं।

चूंकि पश्चिमी ओडिशा जिसने पांच सांसदों को लोकसभा में भेजा है, उसका कोई प्रतिनिधित्व नहीं रह गया है। ऐसे में सुंदरगढ़ के सांसद और पूर्व मंत्री जुएल ओराम की संभावनाएं उज्ज्वल नजर आ रही हैं। ओरम की पसंद ज्यादा मायने रखती है क्योंकि अगले चुनावों में कुछ मौजूदा सांसदों की जगह नए उम्मीदवारों द्वारा लिए जाने की संभावना है।

भुवनेश्वर से लोकसभा सांसद अपराजिता सारंगी भी दौड़ में सबसे आगे हैं लेकिन यह सब कैबिनेट में रिक्तियों की संख्या और हटाए जाने वाले मंत्रियों पर निर्भर करता है। नियमों के मुताबिक, केंद्र सरकार में प्रधानमंत्री समेत कुल 81 मंत्री हो सकते हैं। कैबिनेट में पहले से ही 78 मंत्री होने के कारण केवल तीन सीटें बची हैं।

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