AI से लैस होगी ओडिशा पुलिस, चुटकियों में होगी अपराधियों की पहचान
फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) के साथ एकीकृत किया जाएगा। वर्तमान में सीसीटीएनएस पर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 20,000 से 25,000 व्यक्तियों की तस्वीरें उपलब्ध हैं।

ओडिशा पुलिस अब आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों को ट्रैक करने के लिए एक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) आधारित फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऐसे लोगों के आपराधिक इतिहास को तुरंत सत्यापित करने के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित किया जा रहा है।
इस मकसद के लिए फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) को नई दिल्ली की एक फर्म से खरीदा गया है। कटक में ओडिशा पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'नई एआई-आधारित प्रणाली तीन महीने के भीतर चालू हो जाएगी। एक मोबाइल ऐप भी विकसित किया जा रहा है ताकि राज्य के विभिन्न हिस्सों में नाका जांच करने वाली पुलिस एफआरटी का उपयोग करके तुरंत तस्वीरें खींच सके और जांच कर सके कि किसी का आपराधिक इतिहास तो नहीं है।'
फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) के साथ एकीकृत किया जाएगा। वर्तमान में, सीसीटीएनएस पर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 20,000 से 25,000 व्यक्तियों की तस्वीरें उपलब्ध हैं।
सूत्रों ने बताया, 'ये तस्वीरें पिछले दो साल से सीसीटीएनएस पर अपलोड की जा रही हैं। एफआरटी से प्रभावी परिणाम प्राप्त करने के लिए सभी जिलों के एसपी को पिछले 15 से 20 वर्षों में गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की तस्वीरें अपलोड करने का निर्देश दिया जाएगा।'
साथ ही सभी जिलों के एसपी को यह भी निर्देश दिया जाएगा कि वे यह सुनिश्चित करें कि तीन अलग-अलग कोणों में सामने, दाएं और बाएं तरफ से दृश्य के साथ तस्वीरें ली जाएं। FRT प्रणाली द्वारा सृजित 70 प्रतिशत से अधिक समानता के मिलानों को सकारात्मक परिणाम माना जाएगा।












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